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वित्त मंत्रालय की सफाई से मीडिया के दुष्प्रचार का पर्दाफाश

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वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए राजनीतिक पार्टियों को एक हिदायत दी थी जिस पर मीडिया में घमासान मचा हुआ है। मीडिया दुष्प्रचार कर रही है कि सरकार ने नोटबंदी से राजनीतिक पार्टियों को बाहर कर दिया है और विरोधी पार्टियों के सामने मोदी सरकार झुक गई है।

वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन को लेकर ज्यादातर मीडिया घरानों ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है, वह भ्रम पैदा करने वाला है। इसे देखते हुए वित्त मंत्रालय ने शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया है।

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि नोटिफिकेशन में जो छूट की बात कही गयी है वह पांच दशक से राजनीतिक दलों को मिल रही है। नयी बात सिर्फ इतनी है कि राजनीतिक दलों को चंदे की सूची व्यवस्थित रखनी होगी। उस सूची की जांच आयकर विभाग के अधिकारी कभी भी कर सकते हैं। सामान्यत: राजनीतिक पार्टियां इसके प्रति लापरवाही बरतती रही है।

राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा है कि राजनीतिक दल 500 और 1000 रुपये के नोट अपने खातों में जमा करा सकते हैं। शर्त यह होगी कि इसमें नकद के रूप में लिया गया चंदा 20 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। सभी चंदे 8 नंवबर, 2016 और उससे पहले का होना चाहिए।

राजस्व सचिव ने कहा है कि राजनीतिक दलों के पास 20 हजार से ज्यादा के चंदे के लिए उसका पूरा हिसाब उनके पास होना चाहिए। ये चंदे मौजूदा कानून के तहत चेक या बैंक ड्राफ्ट के जरिए होना चाहिए।

अधिया ने कहा है कि इनकम टैक्स 1961 की धारा 13ए के तहत राजनीतिक दलों को टैक्स छूट हासिल है। उनकी यह आय आवास संपत्ति, अन्य स्रोत, पूंजीगत लाभ और किसी व्यक्ति की ओर से स्वैच्छिक योगदान से हो सकती है। राजस्व सचिव ने साफ किया है लेकिन यह छूट तभी मान्य होगी जब संबंधित कागजात पास होंगे।

  • राजनीतिक दलों को 55 साल से मिल रही है छूट
  • आईटी एक्ट-1961 के सेक्शन 13 ए के तहत है छूट
  • अब रखना होगा चंदे का हिसाब
  • चंदे से जुडे़ दूसरे दस्तावेज भी सम्भाल कर रखना होगा
  • कभी भी हो सकती है एक-एक डोनर की जांच
  • नकद में पार्टियां नहीं ले सकेंगी 20 हज़ार से ज्यादा चंदा
  • चुनाव आयोग को देना होता है 20 हजार से ज्यादा चंदे का ब्योरा
  • पूर्व के नियम में कोई बदलाव नहीं 

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