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कांग्रेस पैदा करना चाहती है डोकलाम पर नया विवाद?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक काबिलियत के चलते चीन को डोकलाम विवाद पर भारत के सामने नतमस्तक होना पड़ा। लेकिन लगता है बिना युद्ध किये चीन का इस तरह से हथियार डाल देना पीएम मोदी के विरोधियों को रास नहीं आया। शायद इसीलिए वो सब कुछ ठीक होने के बावजूद महज कुछ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कृत्रिम तरीके से नये विवाद को पैदा करना चाहते हैं।

कांग्रेस चीन से लड़ाना चाहती है?

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर जिस तरह से देश के अंदरूनी मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं उसी तरह का उनका रवैया संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी दिखता है। शुक्रवार को उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट को शेयर करते हुए ट्वीट कर प्रधानमंत्री से उस पर जवाब की मांग कर दी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि डोकलाम पर अभी भी 500 से अधिक चीनी सैनिक तैनात हैं। लेकिन डोकलाम में जो मौजूदा स्थिति है वो मीडिया रिपोर्ट से बिल्कुल अलग है। ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राहुल गांधी एक शांत हो चुके मसले को फिर से सुलगाने में लगे हैं? 1962 के भारतीय नेतृत्व के सामने शेर बने चीन को पीएम  मोदी ने 2017 में ढेर कर दिया, क्या राहुल गांधी को इससे दर्द हुआ है?

डोकलाम में बनी हुई है यथास्थिति: विदेश मंत्रालय  

डोकलाम में चीन द्वारा सड़क को चौड़ा किये जाने और चीनी सैनिकों की मौजूदगी से संबंधित खबरों को केंद्र सरकार ने नकार दिया है। विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा है कि डोकलाम में जहां भारत और चीन की सेना आमने-सामने थी वहां कोई नई गतिविधि नहीं हुई है। 28 अगस्त के बाद से वहां यथास्थिति बरकरार है।

चीन से क्या मिलीभगत है कांग्रेस की?

अब यथास्थिति के बावजूद कांग्रेस अगर अलग तस्वीर पेश करने की कोशिश करती है तो इसे क्या माना जाए? पार्टी उपाध्यक्ष के रुख से तो डोकलाम पर कांग्रेस की साजिश जैसे सवाल भी उभरने लगते हैं। आखिर ये वही राहुल गांधी हैं जो करीब तीन महीने पहले डोकलाम पर उभरी तनातनी के बीच भारत में चीनी राजदूत से गुपचुप तरीके से मिलने गए थे। चीन के भड़काऊ बयान से बिगड़ते दिख रहे हालात में भी सरकार को सूचना दिए बिना कांग्रेस के ‘युवराज’ ने चीनी दूतावास जाकर वहां के राजदूत लियो झाओहुई से मुलाकात की थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि चीनी दूतावास के WeChat अकाउंट ने 8 जुलाई को राहुल की मुलाकात की पुष्टि की थी जबकि कांग्रेस ने राहुल गांधी की चीनी राजदूत से मुलाकात करने की खबरों को ‘फर्जी’ बताते हुए इसे सिरे से खारिज किया था। 

जब चीन को मजबूर होना पड़ा भारत के सामने

भूटान के डोकलाम पर भारत और चीन की सेना करीब ढाई महीने तक आमने-सामने रही। डोकलाम पर विवाद 16 जून को शुरू हुआ था, जब चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) ने सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया था। भारतीय सेना ने इसका जोरदार विरोध करते हुए कंस्ट्रक्शन को रुकवा दिया था। 28 अगस्त को जाकर ये विवाद तब जाकर खत्म हुआ जब चीन अपनी शर्तों से पीछे हटते हुए दोनों देशों की सेनाओं की एक साथ वापसी पर राजी हुआ।

रक्षा मंत्री रख रहीं हर स्थिति पर नजर

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण दो दिन के सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश दौरे पर हैं। इस दौरान चीन से लगती सीमाओं पर स्थिति की समीक्षा भी होनी है। वैसे चीन अगर अपनी सीमा में कड़ी चौकसी बरत रहा है तो भारत भी हर तरह से अलर्ट पर है। क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर भारतीय सैनिकों की कड़ी नजर है। जरूरत है कि विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति से बाज आए।

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