Home गुजरात विशेष एक व्यक्ति को ‘बचाने’ में कांग्रेस ने पूरे गुजरात को ‘डुबो’ दिया!

एक व्यक्ति को ‘बचाने’ में कांग्रेस ने पूरे गुजरात को ‘डुबो’ दिया!

व्यक्ति पूजा में डूबी कांग्रेस को जनता की फिक्र नहीं, रिपोर्ट

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‘आसमान से गिरे मियां पर खजूर में अटक गए’… ये लोकोक्ति आजकल गुजरात के कांग्रेसी विधायकों पर खूब फिट बैठ रही है। पार्टी के 44 विधायक पूरे नौ दिन कर्नाटक के रिसॉर्ट में ‘कैद’ रहे और अब गुजरात पहुंचे तो अहमदाबाद के एक रिसॉर्ट में नजरबंद कर दिए गए। अब वे सभी सीधे इसी रिसॉर्ट से विधानसभा जाकर राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान करेंगे। स्पष्ट है कि यह देश के लोकतांत्रिक चरित्र को ठेंगा दिखाने जैसा है। यह विधायकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का मामला है। एक तरह से यह मानव अधिकारों के हनन का भी मामला है क्योंकि उन्हें रक्षा बंधन के मौके पर भी घर नहीं जाने दिया गया। इतना ही नहीं कांग्रेस ने इन विधायकों से उनका जनप्रतिनिधि होने का अधिकार भी छीन लिया, क्योंकि गुजरात की बाढ़ में भी इन विधायकों को जनता के बीच जाने से रोका गया। साफ है कि केवल एक व्यक्ति को बचाने के लिए कांग्रेस ने पूरे गुजरात को दांव पर लगा दिया और पार्टी की साख को दांव पर लगा दिया गया।

कांग्रेस विधायकों के बागी तेवर
दरअसल नेतृत्व की अक्षमता कांग्रेस का नकारात्मक पहलू तो है ही पार्टी की व्यक्तिपरक राजनीति ने भी बड़ा नुकसान किया है। जो हैसियत केंद्रीय राजनीति में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की है वही हैसियत अहमद पटेल की गुजरात में मानी जाती है। कहा जाता है कि अहमद पटेल के इशारे पर शंकर सिंह वाघेला की लगातार उपेक्षा की जाती रही और इससे तंग आकर आखिरकार उन्होंने पार्टी को अलविदा कह दिया। वाघेला का जाना उनकी मजबूरी थी या कांग्रेस के लिए जरूरी ये तो पार्टी के भीतरी हालात की जानकारी रखने वाले बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि वाघेला का जाना कांग्रेस में बगावत की चिंगारी भड़का गया।

कांग्रेस की विभाजन कारी नीतियां के लिए चित्र परिणाम

…बड़े धोखे हैं इस राह में
कांग्रेस पार्टी यह मान कर चल रही है कि अपने 44 विधायकों को ‘कैद’ कर अहमद पटेल को जिता ले जाएंगे तो ये गलतफहमी भी साबित हो सकती है। दरअसल विधायकों की नाराजगी के कारण ही विधायकों को कैद में रखना पड़ा है। जाहिर तौर पर इस ‘कैद’ की कहानी के पीछे अहमद पटेल की कारस्तानी की भी बड़ी भूमिका है। पार्टी पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए जोड़-तोड़ का गणित करना अहमद पटेल की विशेषता रही है। यही कारण है कि विधायकों के बीच अहमद पटेल को लेकर नाराजगी है। लेकिन पार्टी की नीतियों और अहमद पटेल का सोनिया गांधी का करीबी होने के कारण पार्टी के लोगों को उन्हें झेलना मजबूरी है।

अहमद पटेल बलवंत सिंह राजपूत के लिए चित्र परिणाम

वोटों के गणित में घिरे पटेल
दरअसल वर्तमान में राज्यसभा चुनाव के लिए जबरदस्त जोड़-तोड़ जारी है। पार्टी में अहमद पटेल के प्रति नाराजगी के बीच जीत हार का गणित उलझ गया है। साल 2012 में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में बीजेपी के 121 और कांग्रेस के 57 विधायक जीते थे। एनसीपी के 2, बीएसपी के 1 और एक निर्दलीय ने भी बाजी मारी थी। हाल ही में कांग्रेस के 57 विधायकों में से 6 पार्टी का दामन छोड़ चुके हैं। अब कांग्रेस के पास 51 विधायक बचे हैं। इसके अतिरिक्त 10-12 विधायकों के पार्टी से नाराज होने की खबरें हैं। लेकिन राज्यसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 44 मतों की जरूरत होगी। जाहिर है समीकरण उलझ गया है क्योंकि इस बार चुनावों में विधायकों के पास नोटा का विकल्प भी है।

एनसीपी ने बढ़ायी पटेल का टेंशन
बीजेपी ने कांग्रेस के पूर्व विधायक बलवंत सिंह राजपूत को भी टिकट दिया है ऐसे में कई कांग्रेसी विधायकों के बीजेपी को वोट देने की संभावना है। अहमद पटेल के जीत के दावों के बीच एनसीपी ने भी अहमद पटेल की परेशानी बड़ा दी है। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी ने गुजरात में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए अभी तक किसी दल को समर्थन देने के बारे में निर्णय नहीं किया है। शरद पवार की पार्टी का राज्य में 2012 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन था और वर्तमान में उसके दो विधायक – कांधल जडेजा और जयंत पटेल हैं।

कांग्रेस की संभावनाएं खत्म!
एक वक्त में पूरे देश की सत्ता संभालने वाली कांग्रेस महज पांच राज्यों में सिमट गई है। गुजरात में तो पार्टी पिछले 23 सालों से सत्ता से बाहर है।  राज्य में गुजरात में कांग्रेस ने अहमद पटेल को जिताने के क्रम में निश्चित तौर पर 2017 में अपनी स्थिति में सुधार की संभावनाओं को गंभीर खतरे में डाल दिया है। कांग्रेस ने इस मौके को व्यक्ति विशेष को बचाने में गंवा दिया है।

बाढ़ में जनता से कांग्रेस का धोखा
जब गुजरात बाढ़ के प्रलय से त्राहिमाम है, प्रदेश के दस जिले डूब रहे हैं तो बाढ़ के वक्त अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने से बीजेपी को कांग्रेस के परंपरागत गढ़ में बढ़त का मौका दे दिया। जब लोग बाढ़ की विभिषिका झेल रहे हैं, अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजकर कांग्रेस ने एक व्यक्ति के लिए अपनी उम्मीदों को धो दिया। कांग्रेस को देखकर लगता है कि पूरी पार्टी गुजरात और पूरे देश देश में सिर्फ एक परिवार और उनके राजनीतिक सलाहकार के लिए काम कर रही है। कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा बनासकांठा अब बीजेपी की तरफ खिसकता दिख रहा है।

हमलावर बीजेपी, पस्त कांग्रेसी
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी पहले ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में 5 दिन बिता चुके हैं। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर राहत कार्यों का निरीक्षण किया । लेकिन बीते शुक्रवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष के बनासकांठा दौरे पर जाने को लेकर विजय रूपानी ने राहुल पर निशाना साधा, उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ”सतत पर्यटक श्री राहुल गांधी गुजरात आए लेकिन गुजरात के लोग पूछ रहे हैं कि इस संकट के समय में हमारे कांग्रेसी विधायक कहा हैं?” उन्होंने आगे लिखा, ”राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पार्टी में काम कर रही है। उनके नक्शेकदम पर कांग्रेसी विधायक भी अब वकेशन मोड में हैं!”

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