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मुसलमानों से कांग्रेस के छल को उजागर करने सामने आ रहीं मुस्लिम महिलाएं

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कांग्रेस खुद को मुस्लिमों की पार्टी तो कहती है, लेकिन ऐसे मामलों की कमी नहीं जिनसे पता चलता है कि देश के मुसलमानों के नाम पर उसने हमेशा अपने राजनीतिक स्वार्थ को साधने का काम किया है। तीन तलाक के मुद्दे पर जहां कांग्रेस का दोहरा रवैया दुनिया के सामने है, वहीं घुसपैठियों से अपना प्रेम जताकर उसने साबित कर दिया है कि मुसलमानों से भी उसका मतलब वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं। कांग्रेस की छल की यह ऐसी राजनीति रही है जिसे उजागर करने के लिए मुस्लिम समाज की महिलाओं ने तैयारी कर ली है।      

तीन तलाक पर कांग्रेस के रुख पर भड़का गुस्सा
मुस्लिम समाज की महिलाओं का कांग्रेस पर अलग-अलग तरह से गुस्सा फूट रहा है। उन्हें अब यह समझ में आ चुका है कि कांग्रेस ने मुसलमानों को बरगलाने के सिवाय कुछ भी नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट में बहुविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की याचिका दायर करने वाली महिलाओं में से एक संभल की मूल निवासी डॉ. समीना ने कहा है कि राहुल गांधी तीन तलाक संबंधी बिल पास कराने में अड़ंगा लगा रहे हैं। उनका कहना है कि राहुल के रवैये से जाहिर होता है कि वह शरिया कानून और बहुविवाह के समर्थक हैं और ऐसे में उन्हें चार तलाक पीड़ित महिलाओं से शादी करनी चाहिए। खुद दो बार तीन तलाक की पीड़िता रह चुकीं डॉ. समीना ने यह भी कहा है कि राहुल गांधी अगर ऐसा नहीं करते तो वे खुद उनके घर बरात लेकर जाएंगी।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल की प्रशंसा
पिछले दिनों तीन तलाक पर कांग्रेस के रुख को लेकर बुलंदशहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली डॉ. समीना ने यह स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ी हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं के हितों के लिए जो सकारात्मक कदम उठाए हैं उसकी प्रशंसा किए बिना वो नहीं रह सकतीं। मुस्लिम महिलाओं के लिए सदियों से दंश बनी तीन तलाक की कुप्रथा को खत्म करने की पहल का साहस किसी सरकार ने दिखाया तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार है। इस सरकार के प्रयासों से लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित भी हो चुका है। लेकिन कांग्रेस के रुख के चलते राज्यसभा में यह लंबित है और इसके कानून बनने में वक्त लग रहा है। मुस्लिम समाज की महिलाएं ये महसूस कर रही हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने जहां राजनीति से ऊपर उठकर उनके हक में आवाज उठाई, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उनके दर्द पर सियासी खेल खेलने में लगे हैं।  

जरूरी है कांग्रेस के दोहरे चेहरे को उजागर करना
मुस्लिम महिलाओं का मानना है कि कांग्रेस ने इंसानी भावना से उनकी स्थिति पर गौर किया होता तो दशकों पहले मुस्लिम समाज में व्याप्त कुप्रथाओं पर पाबंदी लगी होती। मामले में मोदी सरकार के रुख ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया है कि कई महिलाएं तो अब भाजपा में शामिल होकर मुस्लिम महिलाओं के हक में आवाज बुलंद करना चाहती हैं। ऐसी ही दो महिलाएं हैं उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर की सायरा बानो और उत्तर प्रदेश के बरेली की निदा खान। तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने में ये दोनों ही महिलाएं आगे रही हैं। इनका कहना है कि भाजपा ने न सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के हक की लड़ाई में उनका साथ दिया, बल्कि उसी की सरकार है जो संसद में इस पर बिल लेकर भी आई। मुस्लिम समाज में ऐसी महिलाएं लगातार सामने आ रही हैं जो अपने हित में कांग्रेस के दोहरे चेहरे को जनता के बीच उजागर करने को जरूरी मानती हैं ताकि कांग्रेस का वोट बैंक का खेल खत्म हो जाए।

‘खतना’ पर भी खुल चुकी है कांग्रेस की पोल
कांग्रेस किस प्रकार देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के आत्मसम्मान से खिलवाड़ करती आ रही है इसकी बानगी शाहबानो से लेकर खतना मामले तक में दिख जाती है। पिछले महीने खतना की प्रथा पर रोक की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं का जीवन सिर्फ शादी और पति के लिए नहीं होता है और यह खतना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। मोदी सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में साफ कर चुकी है कि खतना प्रथा पर बैन लगाने वाली याचिका का वह समर्थन करती है। लेकिन कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने खतना को शरिया का हिस्सा बताते हुए दलील दी थी कि मुस्लिम महिलाओं का खतना होते रहना चाहिए क्योंकि इसे रोका जाना मजहब में दखल होगा। यानी कांग्रेस ने फिर साबित किया कि वह वोट बैंक के चक्कर में किसी भी हद तक जा सकती है। अब ऐसे में यदि मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस के सियासी चरित्र को समाज के सामने खोलना चाहती हैं तो जाहिर है कि इसके पीछे ठोस वजहें भी हैं।

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