Home गुजरात विशेष हार्दिक पटेल को कांग्रेस ने बता दी उनकी ‘हैसियत’ !

हार्दिक पटेल को कांग्रेस ने बता दी उनकी ‘हैसियत’ !

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कांग्रेस पार्टी से करोड़ों की डील, अश्लील सीडी का खुलासा और अब कांग्रेस के हाथों पाटीदार समुदाय को गिरवी रखने जैसे आरोप… हार्दिक पटेल की इन्हीं हरकतों ने पाटीदार समुदाय को बीच भंवर में फंसा दिया है। 2015 में  हार्दिक पटेल जब पाटीदार आरक्षण की मांग के लिए खड़े हुए थे तो पाटीदार समुदाय उनकी इस मांग के साथ खड़ा था। परन्तु पाटीदार समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन अब एक व्यक्ति के निजी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम बन गया है। हाल-फिलहाल में हार्दिक पटेल कई ‘हरकतें’ ऐसी रही हैं जिससे साफ हो गया है कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन धन और सत्ता हासिल करने का भी एक जरिया बन गया है।

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बहरहाल हार्दिक पटेल ने जिस राजनीतिक सौदेबाजी के आसरे अपना पॉलिटिकल करियर आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस का हाथ थामना चाहा, अब वही झटक लिया गया है। हार्दिक औंधे मुंह गिरे तो उन्हें अटल जी की कविता भी याद आने लगी है।

”बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते,आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा…।”
पाटीदार अनामत संघर्ष समिति के नेता हार्दिक पटेल ने अपनी व्यथा इन शब्दों में व्यक्त तो जरूर की है, लेकिन इसके माध्यम से वे अपनी लाचारगी भी जता रहे हैं। पाटीदार समुदाय के बीच ही अपनी विश्वसनीयता खो चुके हार्दिक पटेल अब कांग्रेस से कदम मिलाकर चलने की अपील कर रहे हैं, पर कांग्रेस ने ‘हाथ’ मिलाने के बजाय उन्हें अंगूठा दिखा दिया है। अब तक कांग्रेस-कांग्रेस का नारा लगाने वाले हार्दिक के ‘छले’ गए साथी अब कांग्रेस को ही सबक सिखाने की बात कह रहे हैं, लेकिन हार्दिक हैं कि हाथ का साथ छोड़ना नहीं चाह रहे। अलबत्ता हकीकत यह भी है कि कांग्रेस ने हार्दिक पटेल को 77 में से महज 2 सीटें देकर उन्हें उनकी हैसियत दिखा दी है। हालांकि अब वे खुद को धोखा खाया हुआ बता रहे हैं और अपनी कविता सुना रहे हैं।

हार्दिक ने ‘बेच’ दिया पाटीदारों का स्वाभिमान
हार्दिक पटेल अपनी कविता के माध्यम से खुद को ‘ठगा’ हुआ बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्या यही सच है? दरअसल 7 नवंबर को पाटीदारों को आरक्षण देने के प्रस्तावित फॉर्म्यूले को लेकर पाटीदार समिति और कांग्रेस के बीच दिल्ली में हुई अहम बैठक का परिणाम कुछ नहीं निकला, उल्टे कांग्रेस ने पाटीदार नेताओं को कोई भाव ही नहीं दिया। गौरतलब है कि अहमद पटेल ने तो पाटीदार नेताओं के प्रतिनिधि दिनेश बमभानिया से मिलने तक से इनकार कर दिया था। तब दिनेश बमभानिया ने कहा, ”कांग्रेस ने हमें मिलने के लिए बुलाया लेकिन पूरे दिन हमें मिलने का वक्त नहीं दिया, कांग्रेस ने हमारी बेइज्जती की है।” जाहिर है कांग्रेस तो सरदार पटेल से लेकर अब तक पाटीदारों की बेइज्जती ही करती रही है, लेकिन हार्दिक पटेल अपने निजी हित के लिए पाटीदारों के सम्मान से खिलवाड़ कर रहे हैं। 19 नवंबर को एक बार फिर जब कांग्रेस ने पार्टी उम्मीदवारों के टिकट की घोषणा की तो पाटीदारों का अपमान ही किया गया।

पाटीदार समुदाय को ‘धोखा’ देने की थी चाल !
दरअसल 10 नवंबर को हार्दिक पटेल ने जब प्रेस कान्फ्रेंस किया तो साफ हो गया था कि उनका उद्देश्य भाजपा को हराना है न कि आरक्षण की मांग को पूरी करवाना। दूसरी ओर कांग्रेस पाटीदारों को अपने पाले में लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है और कहा जा रहा है कि हार्दिक पटेल से डील तय कर चुकी है। लेकिन बीते दिनों जब गुजरात कांग्रेस के सीनियर नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष मोहन सिंह राठवा ने भी साफ किया कि पटेलों को एक प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की हैसियत किसी की नहीं है… तो हार्दिक और कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम की पोल खुल गई। हालांकि कांग्रेस पर्दे के पीछे से पूरा जोर लगा रही है कि किसी तरह हार्दिक पटेल इस चुनाव में खुलकर समर्थन कर दें, लेकिन इस जोड़तोड़ में पाटीदारों की आरक्षण की मांग पीछे छूट चुकी है।

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हार्दिक की हरकतों से घटा पाटीदारों का सम्मान
रेशमा पटेल, चिराग पटेल, केतन पटेल, अमरीश और श्वेता पटेल … ये ऐसे युवा चेहरे हैं जो पाटीदार आरक्षण आंदोलन के अगुआ रहे हैं, लेकिन आज इनकी राहें हार्दिक पटेल से अलग हैं। दरअसल जिस भाजपा ने पाटीदारों के मान-सम्मान को हमेशा बरकरार रखा, हार्दिक पटेल ने इसमें विभेद पैदा करने की कोशिश की। आज जब कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में हार्दिक पटेल को उनकी हैसियत दिखा दी तो साफ हो गया कि हार्दिक की हरकतों ने पाटीदार समुदाय के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाई है। एक ओर जहां पाटीदारों के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है, वहीं कांग्रेस टिकट बंटवारे में भी इस समुदाय को धोखा दे रही है। पटेल नेताओं ने 30-35 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए जाने की मांग की थी, लेकिन कांग्रेस इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है। जाहिर है कांग्रेस अपनी KHAM (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम) राजनीति में पाटीदारों को एंट्री नहीं देना चाहती और उसे काबू में रखना चाहती है।

पाटीदारों को धोखा दे रहे हार्दिक के लिए चित्र परिणाम

कांग्रेस के हाथों का मोहरा बना पाटीदार समाज
हार्दिक पटेल के बारे में कहा जाता है कि वे साधारण घर से आते हैं। 2015 के पहले वे पैदल ही घूमा करते थे। औसत दर्जे के छात्र थे और सामाजिक रुतबे में भी उनका कोई स्थान नहीं था। लेकिन बीते दो सालों में उनका खूब ‘विकास’ हुआ है। अब वे पैदल नहीं बल्कि फॉर्चुनर गाड़ी में घूमते हैं। उनके साथ महंगी गाड़ियों का काफिला चलता है। प्रदेश से बाहर जहां भी जाते हैं हवाई जहाज से ही जाते हैं। सवाल यह कि दो सालों में ही हार्दिक पटेल का इतना विकास कैसे हो गया? कौन है जो उनका इतना ‘विकास’ कर रहा है? उनके फाइनैंसर कौन हैं? इन सवालों के बीच एक सवाल ये भी कि अब वे ओबीसी कोटे में वे आरक्षण की बात नहीं करते, बल्कि वे राजनीति की बात करते हैं। गुजरात की सत्ता से करीब दो दशक से बाहर कांग्रेस इस बार हर स्तर पर जाकर राजनीति कर रही है। गुजराती समाज को बांटकर पाटीदारों को ‘अकेला’ खड़ा कर दिया है।

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