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हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करती रही है कांग्रेस!

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कांग्रेस पार्टी की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि वह हिंदुओं की हितैषी दिखे, लेकिन जिस पार्टी के डीएनए में ही हिंदू विरोध हो, उसकी पोल तो खुल ही जाएगी।

दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के तटीय इलाकों में पौधारोपण और जल संरक्षण संबंधी मामलों के लिए एक विशेष समिति गठित की है। इसके सदस्य नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और योगेंद्र महंत को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है।

साधु-संतों का सम्मान नहीं देख सकती कांग्रेस
राज्य सरकार का यह निर्णय साधु संतों को सम्मान देने के साथ ही वृक्षारोपण, जल संरक्षण के साथ स्वच्छता जैसे सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से जुड़े मामलों पर संतों का साथ लेने की एक कोशिश है। क्योंकि समाज में हमारे संत अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन हिंदू विरोध की नीति पर चल रही कांग्रेस को यह बात रास नहीं आई। सरकार के इस सकारात्मक और रचनात्मक पहल की प्रशंसा करने के बजाय कांग्रेस ने उल्टा साधु-संतों का अपमान करना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस पार्टी की नेता खुशबू सुंदर ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने इस कदम का उपहास उड़ाते हुए नगा साधुओं की एक तस्वीर डालते हुए लिखा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में कुछ दिनों में यही दृश्य देखने को मिलेगा।

दरअसल समाज में संत प्रेरणा और चेतना जागृत करते हैं, इसलिए जल संरक्षण और वृक्षारोपण के प्रयास उनके माध्यम से तेजी से होंगे। लेकिन कांग्रेस को यह कतई पसंद नहीं कि हिंदू साधु-संतों सम्मान किया जाए। कांग्रेस लगातार खुद को हिंदुओं की हितैषी साबित करने में लगी हुई है। पार्टी के अध्यक्ष लगातार मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया जाना यह साबित करता है कि वास्तव में कांग्रेस क्या है?


बहरहाल एक नहीं ऐसे अनेकों मामले हैं जो ये साबित करते हैं कि कांग्रेस पार्टी लगातार हिंदू आस्था से खिलवाड़ करती रही है। उसे न तो सनातन संस्कृति से प्रेम है और न ही साधु-संतों के प्रति सम्मान का भाव है।

शंकराचार्य के विरुद्ध कांग्रेस की साजिश
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी अपनी किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ में ये खुलासा किया है कि 2004 में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी के पीछे सोनिया गांधी हाथ था। जाहिर है इसके मूल में हिंदू विरोध ही था। दरअसल दक्षिण भारत में बेरोक-टोक ईसाई धर्म का प्रचार चल सके इसके लिए वेटिकन के इशारे पर शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को साजिश के तहत गिरफ्तार करवाया गया। हालांकि 2013 में वे बाइज्जत बरी किए गए, लेकिन उन्हें बेकसूर ही 10 वर्षों तक हिंदू होने की सजा भुगतनी पड़ी और जेल के सलाखों के पीछे रहना पड़ा।

स्वामी असीमानंद को जानबूझकर फंसाया
जिस हिंदू संस्कृति और सभ्यता की सहिष्णुता को पूरी दुनिया सराहती है, उसे भी बदनाम करने में कांग्रेस ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। 18 फरवरी, 2007 को समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट केस में दो पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों को पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था, लेकिन महज 14 दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। उनके स्थान पर निर्दोष हिन्दुओं को गिरफ्तार किया गया।

समझौता विस्फोट में कांग्रेस को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए सोनिया गांधी, अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, शिवराज पाटिल और सुशील कुमार शिंदे ने हिंदू आतंकवाद का जाल बुना और इस केस में स्वामी असीमानंद को फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद की साजिश को अमली जामा पहनाया जा सके।

राम सेतु को तोड़ने का बनया था प्लान
वर्ष 2013 में जब सुप्रीम कोर्ट में सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट पर बहस चल रही थी तो कांग्रेस पार्टी ने अपनी असल सोच को जगजाहिर किया था। पार्टी ने एक शपथ पत्र के आधार पर भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया था। इस शपथ पत्र में कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि भगवान श्रीराम कभी पैदा ही नहीं हुए थे, यह केवल कोरी कल्पना ही है। साफ है कि कांग्रेस ने व्यावसायिक हित के लिए देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर कुठराघात करने की तैयारी कर ली थी। जिस राम सेतु के अस्तित्व को NASA ने भी स्वीकार किया है, जिस राम सेतु को अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भी MAN MAID यानि मानव निर्मित माना है, उसे कांग्रेस पार्टी तोड़ने जा रही थी।

राम मंदिर के विरोध की कांग्रेस की नीति
अयोध्या में राम मंदिर बनाने के मामले को कांग्रेस ने हमेशा से ही उलझाए रखा है। जबकि देश का हर नागरिक अब राम जन्म भूमि पर मंदिर बनने का सपना देख रहा है। अब यह कोई नहीं चाहता कि अयोध्या का हल नहीं निकले, लेकिन कांग्रेस की भूमिका को लेकर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कांग्रेसी मानसिकता को उजागर करते हुए अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर अब जुलाई 2019 के बाद सुनवाई हो। सिब्बल के बयान से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस ने लम्बे समय से राम के नाम पर घिनौनी राजनीति का प्रदर्शन किया है।

भगवान राम की तीन तलाक से की तुलना
16 मई, 2016 को सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता और AIMPLB के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जिस तरह राम हिंदुओं के लिए आस्था का सवाल है उसी तरह तीन तलाक और हलाला मुसलमानों की आस्था का मसला है। साफ है कि कांग्रेस और उसके नेतृत्व की हिंदुओं की प्रति उनकी सोच को ही दर्शाती है।

सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध
हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का जवाहरलाल नेहरू ने विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिरों पर खर्च नहीं होना चाहिए। दरअसल उन्हें डर था कि इससे मुस्लिमों में नाराजगी बढ़ेगी।

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