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मोदी की कूटनीति से झुका चीन, जम्मू कश्मीर और अरुणाचल को माना भारत का हिस्सा

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चीन ने पहली बार यह मान लिया है कि पूरा जम्मू कश्मीर तथा अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा हैं। दूसरे बेल्ट एंड रोड समिट में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भारत का एक नक्शा जारी किया है, जिसमें इन दोनों राज्यों को भारत का हिस्सा बताया गया है। देश की नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए यह बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता है। जम्मू कश्मीर के एक हिस्से को भी वह पाकिस्तान का बताता रहा है। चीन ने हाल ही में कई ऐसे नक्शों (Maps) को नष्ट कर दिया था जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया गया था। बता दें कि पिछले साल नवंबर में चीन के सरकारी चैनल CGTN ने पाकिस्तान के नक्शे से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को अलग दिखाया था। इससे पहले चीन ने बीआरआई को लेकर जम्मू-कश्मीर का जो नक्शा जारी किया था, उसमें पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) को पाकिस्तान का हिस्सा बताया था।

भारत को भी बताया BRI का हिस्सा
इस नक्शे में भारत को भी BRI का हिस्सा दिखाया गया है। हालांकि, भारत इस प्रोजेक्ट का विरोधी है और उसने इस समिट का बहिष्कार किया है। 2017 में BRI के पहले समिट में भी भारत शामिल नहीं हुआ था। इस समिट में 37 देश शामिल हैं। बीआरआई का मकसद राजमार्गों, रेल लाइनों, बंदरगाहों और सी-लेन के नेटवर्क के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ना है। 

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पाक की नाराजगी पड़ेगी भारी?
पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान के नक्शे से बाहर करने का असर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर भी पड़ सकता है। भारत इस प्रोजेक्ट के पीओके से गुजरने का विरोध कर चुका है। चीन ने पीओके में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है। इसे लेकर भारत अपनी नाराजगी जता चुका है। चीन की ओर से कुछ साल पहले जम्मू और कश्मीर के निवासियों को स्टैपल वीजा जारी करने के कारण भी दोनों देशों के बीच संबंध खराब हुए थे। इतना ही चीन ने हुर्रियत नेताओं की भी मेजबानी की थी जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था।

पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है चीन
चीन अपने हित साधने के लिए लगातार खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने को लेकर भी वह अड़ंगा लगाता आया है। UNSC में मसूद अजहर को बचाने वाला चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है। वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी साफ कर चुका है कि संकट के समय पूरी तरह पाकिस्तान की मदद करेगा।

ऐसे रास्ते पर आया चीन

  • डोकलाम में चीनी सेना के खिलाफ डंटे रहे और बीआरआई का दुनिया में सबसे पहले विरोध किया।
  • पड़ोसी देशों को अपने पाले में किया। श्रीलंका में चीन विरोधी दलों के बीच गठबंधन कराया। नेपाल में चीनी सहयोग वाले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर रोक लगवाई।
  • पाकिस्तानी आतंकवाद और इसे चीन के अप्रत्यक्ष समर्थन के खिलाफ पूरी दुनिया में माहौल तैयार किया। 

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