Home समाचार मोदी सरकार की सख्ती का असर, भगोड़ा माल्या बैंक का बकाया चुकाने...

मोदी सरकार की सख्ती का असर, भगोड़ा माल्या बैंक का बकाया चुकाने को तैयार

351
SHARE

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सख्ती के बाद देश से फरार शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा कि वह बैंकों को बकाया रकम चुकाने को तैयार है। इसको लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में 22 जून को एक याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका में उन्होंने 13,900 करोड़ रुपए की अपनी संपत्ति बेचने की बात कही है। शराब कारोबारी माल्या ने कहा कि हमने कोर्ट से दरख्वास्त की है कि वह हमें न्यायिक प्रावधनाओं के अंतर्गत संपत्तियां बेचकर लेनदारों को बकाया रकम चुकाने दें, जिनमें कई पब्लिक सेक्टर के बैंक भी शामिल हैं। माल्या का कहना है कि वह कर्ज चुकाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

गौरतलब है कि विजय माल्या पर नौ हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है, जो उन्होंने कई पब्लिक सेक्टर बैंकों से लिया था। जब कर्ज चुकाने की बारी आई तो विजय माल्या देश से फरार हो गए और लंदन में जा छिपे। भ्रष्टाचार पर वार करने का वादा लेकर सत्ता में आई मोदी सरकार ने एक के बाद एक सख्त कानून बनाए। उसी का असर है विजय माल्या कोर्ट में अर्जी देकर बैंक का कर्ज चुकाने की बात करने लगा है।

विजय माल्या जैसे लोगों को शिकंजे में कसने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की मेहनत रंग लाती दिख रही है। सरकार की कोशिशें एक नजर में –

माल्या के खिलाफ 2014 में शुरू हुई सीबीआई जांच
2014 में सीबीआई ने बैंक लोन में गड़बड़ी की जांच शुरू की और चार्जशीट दाखिल की। जांच की कार्रवाई आगे बढ़ी तो विजय माल्या देश से फरार हो गए और ब्रिटेन के लंदन में जा छिपे। इसके बाद पीएम मोदी की पहल पर माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। सरकार की ओर से ब्रिटेन को प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध पत्र सौंपा गया। अक्टूबर, 2017 में पहली बार माल्या को लंदन में गिरफ्तार हुए। तभी साफ हो गया था कि मोदी सरकार इस भगोड़े को छोड़ने वाली नहीं है। माल्या के खिलाफ आर्थिक गबन के कई मामले चल रहे हैं। कुछ मामलों में अदालत के निर्देश पर माल्या की कंपनियों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियां जब्त की गई हैं।

विजय माल्या की संपत्ति को अटैच करने का आदेश
08 मई, 2018 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फ़ॉरेन एक्सचेंज रेग्युलेशन ऐक्ट (FERA) उल्लंघन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में विजय माल्या की संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भारत के ‘भगोड़े’ हैं और मार्च 2016 से लंदन में रह रहे हैं। पिछले साल अप्रैल में स्कॉटलैंड यार्ड के प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से वह जमानत पर हैं।

सरकार की पहल पर माल्या को लंदन की कोर्ट से मिला झटका
ब्रिटेन और भारत में विजय माल्‍या पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इनमें से एक मामले में विजय माल्या की याचिका को लंदन की एक कोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि भारत के 13 बैंकों के समूह ने माल्या से 1.55 अरब डॉलर से अधिक की वसूली के लिए यहां एक मामला दर्ज कराया था। अदालत के इस आदेश से 10, 000 करोड़ रुपये से अधिक राशि वसूले जाने का रास्ता साफ हो गया है।

भ्रष्टाचार पर सख्ती के लिए बनाए गए कई कानून
मोदी सरकार ने हर बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो बख्शा नहीं जाएगा। सरकार हर स्तर पर देश के आर्थिक अपराधियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए कई सख्त कानून भी बनाए हैं, आइये डालते हैं एक नजर –

फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स ऑर्डिनेंस
राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण को मंजूरी
संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा
इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड
अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर रोक विधेयक
पीएसबी पुनर्पूंजीकरण
एफआरडीआई विधेयक
बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम

LEAVE A REPLY