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मोदी सरकार में आए सूट-बूट वालों के बुरे दिन

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सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो सबसे पहला काम किया था वो था भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसना। अगर आप आज के परिदृश्य में बात करेंगे तो अब धीरे-धीरे सारे भष्ट्राचारी अंदर जा रहे हैं या उनकी सम्पत्ति जब्त हो रही है। जिन बड़ी-बड़ी कंपनियों ने कांग्रेस के राज में मलाई खाई थी वो आज एक-एक पैसे के लिए तरस रही हैं। कांग्रेस राज में बैंक से लोन लेकर अपना व्यापार करने वाली और कर्ज को वापस न करने वाली कंपनिंया आज अपनी सम्पत्तियों को बेचकर बैंक का पैसा वापस देने को मजबूर हो रही हैं। आइये नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही कंपनिंयों पर-

जिंदल स्टील
यह कंपनी कांग्रेस नेता नवीन जिंदल की है। कांग्रेस सरकार के दौरान इन्होंने भारी मात्रा में बैंक से लोन लिया जिसे अब तक नहीं चुकाया गया। पीएम मोदी के सत्ता में आते हैं अब ये बैंक का पैसा वापस करने को मजबूर हैं। इसके लिए जिंदल स्टील अपने रेल व्यापार का 49 प्रतिशत हिस्सा 3500 मेगावाट का पावर प्लांट बेच दिया है।

एस्सार
एस्सार कंपनी बैंक का कर्ज चुकाने के लिए स्टील का बड़ा हिस्सा बेच रहा है और यही नहीं 49 प्रतिशत अपने तेल व्यापार को बेच रहा है। जो लोग कहते थे कि मोदी सरकार सूट-बूट की सरकार है यह उनके मुंह पर तमाचा है।

GVK
कांग्रेस के राज में फायदा लेने वाली GVK कंपनी के लिए भी बुरी खबर है। अब वह अपने बैंगलोर और बॉम्बे एयरपोर्ट की 33 प्रतिशत हिस्सेदार बेच रही है, यही नहीं सड़क संपत्ति को पूरा हिस्सा कंपनी को कर्ज चुकाने के लिए बेचना पड़ रहा है। मोदीराज में अब भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं।

DLF
कांग्रेस के समय खूब पैसे कमाने वाली DLF कंपनी आज मुसीबत में दिख रही है। बैंक को पैसे देने के लिए अब मशहूर साकेत मॉल को डीएलएफ बेच रही है और यही नहीं अपने रेंटल और भूमि संप्पति को 40 प्रतिशत बेच रही है।

GMR
बैंक का कर्ज उतारने के लिए GMR हाइवे प्रोजेक्ट, साउथ अफ्रीकन कोल माइन, इस्तांबुल एयरपोर्ट और सिंगापुर पावर पोजेक्ट का 70 प्रतिशत हिस्सा और इंडोनेशिया के 2 कोयला खदानों को बेच रहा है। यही हैं आम आदमी के लिए अच्छे दिन।

JP ग्रुप
जयप्रकाश गौड़ यानि जेपी, यमुना एक्सप्रेस वे बनाने का ठेका इनके पास ही था, लेकिन बैंक का कर्ज अभी तक नहीं दे पाए। पीएम मोदी की सख्त कार्रवाई के बाद इस ग्रुप को अल्ट्राटेक, यमुना एक्सप्रेस वे और JSW में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचनी पड़ रही है।

TATA
देश के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन रतन टाटा की मुश्किलें भी मोदी सरकार में बढ़ गई हैं। बैंक का कर्ज देने के लिए टाटा समूह को UK में कोरस स्टील प्लांट बेचना पड़ रहा है, धमरा पोर्ट को बेचा जा रहा है, बॉम्बे में जमीन तक बेची जा रही है।

Lanco
लेन्को की भी उल्टी गिनती शुरू हो गई है और उसे आंध्रा और उडूपी में अपनी बिजली उत्पादन संपत्ति बेचनी पड़ रही है।

Videocon
इलेक्ट्रॉनिक कंपनी वीडियोकॉन का हाल भी अच्छा नहीं है। वीडियोकॉन अपने 6 सर्किल में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम बेच रहा है वहीं मोन्जाबिक में तेल संपत्ति को बेच रहा है।

श्री रेनुका सुगर्स
बैंक के कर्ज में डूबी रेनुका सुगर अपना ब्राजील पावर प्लांट, चीनी और बॉयो फ्यूल का व्यापार बेच रही है।

सहारा
खबर सहारा श्री के लिए भी अच्छी नहीं हैं। बैंक और जनता से लिए गए पैसों के चलते समूह की 86 भू संपत्ति बिक रही हैं। वहीं फार्मूला वन का 42 प्रतिशत, मुंबई में सहारा होटल, लंदन के होटल, न्यूयॉर्क प्लाजा होटल, द ड्रीम न्यूयॉर्क होटल और 4 हवाई जहाज सहारा बेच रहा है।

विजय माल्या
लिकर किंग विजय माल्या आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। भारत तो भारत लंदन में भी उनकी संपत्ति सुरक्षित नहीं हैं। माल्या की सारी संपत्ति बेची जा रही है।

रिलायंस
बैंक लोन चुकाने के लिए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर मुंबई में बिजली उत्पादन वितरण की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है। ये सबसे ज्यादा चौकाने वाला मामला है।

बिड़ला सीमेंट
बिड़ला सीमेंट का हाल भी कुछ खास नहीं है। बिड़ला सीमेंट अपने सीमेंट के व्यापार और सड़क की सारी परियोजनाएं बेच रहा है।

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