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नोटबंदी ने तोड़ी आतंकवाद-नक्सलवाद की कमर !

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नोटबंदी जहां देश में आर्थिक क्रांति का सूत्रपात है, वहीं नोटबंदी कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी, गहन और निरंतर लड़ाई की शुरुआत भी है। नोटबंदी न केवल अर्थतंत्र के लिए एक क्रांति है, बल्कि सुरक्षा तंत्र के लिए भी एक सकारात्मक कदम है। सरकार द्वारा उठाए गए इस अप्रत्याशित कदम के बाद पत्थरबाजी और नक्सली घटनाओं में जबरदस्त कमी आई है। दरअसल 500 और 1000 रुपये के हाई वेल्यू नोट के बंद होने से नक्सलियों, आतंकवादियों और हवाला कारोबारियों की कमर बुरी तरह टूट गई है।

नोटबंदी ने आतंकी-नक्सली फंडिंग की चेन तोड़ी
देश के सुरक्षा फ्रंट पर नोटबंदी की सफलता इस बात से सहज ही समझी जा सकती है कि इस कदम ने टेरर फंडिंग की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान से हो रही टेरर फंडिंग का खुलासा मंगलवार को तब हुआ जब 36 करोड़ रुपये के पुराने नोट पकड़े गए। ये सारी रकम पत्थरबाजों और आतंकियों की मदद के लिए लाए गए थे।

80 प्रतिशत तक कम हो गई पत्थरबाजी की घटनाएं
नोटबंदी के बाद आए आंकड़े दिखाते हैं कि टेरर फंडिंग रुकी है। इसी का नतीजा है कि इस साल गर्मियों में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुईं हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार बीते साल घाटी में पत्थरबाजी की 2800 घटनाएं हुई थीं। वहीं वर्तमान वर्ष में अब तक ऐसी 600 घटनाएं ही देखने को मिलीं। जाहिर है यह नोटबंदी का सकारात्मक परिणाम है।

आतंकी नेटवर्क हुआ ध्वस्त, 198 हो गए ढेर
नोटबंदी का अच्छा परिणाम ये भी देखने को मिला कि कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता मिली है। इसी कारण वर्तमान वर्ष में अब तक 198 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर किया है। दरअसल पहले जब भी कोई आतंकी मारा जाता तो पत्थरबाजी की घटनाएं बढ़ जाती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। यहां तक कि आतंकियों द्वारा सहायता मांगने पर भी अब लोग नहीं आते हैं।

पैसों का हुआ टोटा, बैंक लुटेरे बन गए आतंकी
दरअसल क्वेटा और कराची स्थित पाकिस्तान की सरकारी प्रिटिंग प्रेसों में भारत के नकली करेंसी नोट छापने का जो नापाक खेल चलता था, वो नोटबंदी से चौपट हो गया है। इसी कारण अब आतंकियों के पास फंड नहीं है। टेरर फंडिंग की चेन टूटने से आतंकियों के पास पैसों का इतना टोटा हुआ कि कुछ आतंकवादी बैंक लूट की घटनाओं को ही अंजाम देने लगे।

आतंकियों ने बैंक लूटा के लिए चित्र परिणाम

नक्सलवाद पर नकेल कसने में मिली सफलता
नोटबंदी के कारण एक ओर जहां कश्मीर में इसका सकारात्मक असर है वहीं left wing extremist प्रभावित क्षेत्रों में भी इसका खासा असर है। नोटबंदी की वजह से नक्सली संगठनों का पूरा आर्थिक ढांचा चरमरा गया है। उनके पास बड़ी मात्रा में नकदी थी जो 500 और 1000 के नोट बंद होते ही मिट्टी में मिल गई।

नक्सली नोटबंदी के लिए चित्र परिणाम

1700 नक्सली पकडे गए, 600 ने किया सरेंडर
नक्सलियों पर एक ओर नोटबंदी की मार पड़ी तो दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन प्रहार चलाकर इनकी कमर तोड़ दी है। नक्सलियों पर इस दोहरी मार के कारण जहां 1700 नक्सली पकड़े गए, वहीं 600 ने सरेंडर कर दिया। इस दौरान सुरक्षा बलों से मुठभेड़ के दौरान 130 नक्सलियों को मार गिराया गया।

नोटबंदी ने नक्सली के लिए चित्र परिणाम

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