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कठघरे में रही है केजरीवाल सरकार, वक्त के साथ लम्बी होती गयी आरोपों की सूची

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दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। कपिल मिश्रा के बाद एक और पूर्व मंत्री असीम अहमद खान ने केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। असीम ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल ने केबल नेटवर्क खरीदने के लिए उनसे 5 करोड़ रुपये मांगे थे। असीम का कहना है कि आम आदमी पार्टी को केबल नेटवर्क खरीदने के लिए 25 करोड़ रुपये की जरूरत थी। इसमें से 5 करोड़ रुपये मुझसे जबकि बाकी दूसरे विधायकों से मांगे गए थे। जब मैंने पैसे देने से इनकार कर दिया तो मुझे गलत आरोपों में फंसाकर पार्टी से बाहर कर दिया गया। पुरानी दिल्ली की मटिया महल सीट से विधायक असीम का कहना है कि अब खुद सीएम केजरीवाल और मंत्री सत्येंद्र जैन पर आरोप हैं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

इसके पहले कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर दो करोड़ की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया। मिश्रा ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने केजरीवाल को सत्येंद्र जैन से दो करोड़ रुपये लेते हुए देखा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और व्यवस्था में बदलाव की वकालत करने वाले केजरीवाल ने सत्ता मिलते ही ना सिर्फ जनता से किए अपने वादे को तोड़ा बल्कि खुद आकंठ भ्रष्टाचार में डूब गए। आइए देखते हैं केजरीवाल सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के कुछ गंभीर आरोपों को-

रिश्तेदारों पर घोटाले के आरोप
दिल्ली पुलिस मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके रिश्तेदार सुरेन्द्र कुमार बंसल और पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। बंसल पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों के सहयोग से फर्जी कागजातों के आधार पर कई कंपनियों के नाम पर काम लिए और फर्जी बिल बनाये।

मुख्य सचिव का भ्रष्टाचार में लिप्त होना
केजरीवाल के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार भी भ्रष्टाचार के घेरे में हैं। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने मई 2015 में पत्र लिखकर राजेन्द्र कुमार के भ्रष्टाचार के बारे में बताया था। लेकिन केजरीवाल ने कोई कदम नहीं उठाया। राजेन्द्र कुमार ने 2007-2015 के बीच अपने रिश्तेदारों की कम्पनी को दिल्ली सरकार में काम करने का ठेका दिया और उसके बदले में धन भी लिया। इस तरह से दिल्ली सरकार को 12 करोड़ का चूना लगाया और खुद अपने लिए तीन करोड़ रुपये भी कमा लिए।

उपमुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप
सीबीआई उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। उन्होंने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था लेकिन सरकार ने बात नहीं मानी।

सत्येंद्र जैन का हवाला लिंक
सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सत्येंद्र जैन पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपए मंगाने का आरोप है। ये वो जानकारी है जिसे आयकर विभाग ने ट्रैस किया है। सूत्र बताते हैं कि सत्येंद्र जैन के करीबी कोड वर्ड के साथ नकद में रुपए ट्रेन के माध्यम से कोलकाता भेजते थे और कोलकाता के हवाला कारोबारी छद्म कंपनियों के नाम से जैन की कंपनी में शेयर खरीदने के बहाने पैसे चेक या आरटीजीएस के माध्यम से लौटाते थे।

स्वास्थ्य मंत्री ने पुत्री को बनाया सरकार में सलाहकार
सीबीआई स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की पुत्री सौम्या जैन को मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाये जाने की जांच कर रही है। उपराज्यपाल के आदेश के बाद यह जांच हो रही है। मंत्री सत्येन्द्र जैन का कहना है कि उनकी पुत्री एक रुपया लिए बगैर काम कर रही है।

महिला व बाल विकास मंत्री का भ्रष्टाचार
केजरीवाल के सामाजिक कल्याण, महिला व बाल विकास मंत्री संदीप कुमार ने राशन कार्ड बनवाने के लिए एक महिला के साथ जबरदस्ती संबंध बनाये। इन संबंधों की सीडी सार्वजनिक होने पर केजरीवाल को इन्हें भी मंत्रालय से बर्खास्त करना पड़ा।

पूर्व कानून मंत्री पर फर्जी डिग्री बनाने का मामला
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने दावा किया था कि उन्होंने सत्र 1994-97 के दौरान मुंगेर (बिहार) के विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज से पढ़ाई की थी। मामला पकड़ में आने के बाद पता चला कि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर तोमर को कानून की डिग्री जारी कर दी गई थी। डिग्री लेते समय माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अंकपत्र जमा करने पड़ते हैं। लेकिन तोमर द्वारा जमा किए गए दोनों सर्टिफिकेट अलग-अलग विश्वविद्यालयों के हैं। अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद का अंकपत्र और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा किया गया। दोनों विश्वविद्यालयों ने इन प्रमाणपत्रों की वैधता को खारिज कर दिया है।

विज्ञापन घोटाला
हाल ही में जारी सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि केजरीवाल सरकार ने दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली सरकार के खजाने का दुरुपयोग किया। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने 522 करोड़ रुपये विज्ञापन के लिए खर्च कर दिए।

स्ट्रीट लाइट घोटाला
आप नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरटीआई के हवाले से दावा करते हुए बीजेपी ने आरोप लगाया कि मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाली सीसीटीवी कैमरे पर 6 लाख रुपये खर्च किए गए।

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला
केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।

संसदीय सचिव बनाने का मामला
13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए भी कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को लालबत्ती वाली गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा। अब उन विधायकों की सदस्यता पर चुनाव आयोग की तलवार लटकी हुई है।

चाय-समोसे पर करोड़ों लुटाए
फरवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच केजरीवाल के कार्यालय में 1.20 करोड़ रुपये के समोसे और चाय का खर्च दिखाया गया है। आरटीआई के जरिए इस बात की सूचना सार्वजनिक हुई। आम आदमी पार्टी के अंदरखाने की हकीकत सामने आ गई। इसी आरटीआई से यह भी पता चला कि उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सचिवालय स्थित कार्यालय में 8.6 लाख और कैंप आफिस में 6.5 लाख रुपये का चाय और स्नैक्स में खर्च किए गए।

दावत में उड़े लाखों
केजरीवाल ने सरकार की दूसरी वर्षगांठ मनाने के लिए 11-12 फरवरी, 2016 को अपने आवास पर दावत दी। एक थाली का खर्च 12, 000 रुपये था। नियमों के मुताबिक दावतों में खाने का खर्च 2, 500 रुपये प्रति थाली से अधिक नहीं हो सकता है। लेकिन नियमों की अनदेखी कर ताज होटल में दिए गए इस दावत में 11.4 लाख रुपये का खर्च आया था।

सैर सपाटे में लुटाया जनता का पैसा
2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे। उपराज्यपाल की डांट पड़ी तो वापस आए। इसी तरह 11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। इसी तरह मंत्री सत्येंद्र जैन और अन्य मंत्री, विधायक भी विदेश यात्राओं पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाया। केजरीवाल के साथी मंत्री उपराज्यपाल की अनुमति के बिना 24 बार विदेश यात्रा पर गए।

रिश्तेदार को बनाया ओएसडी
केजरीवाल ने अपने रिश्तेदार डॉ. निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति वेकेंसी ना होने के बावजूद की। पहले तो हस्तलिखित मंगवाए और इसी अवैध आवेदन के आधार पर उन्हें सीनियर रेजिडेंट बनवा दिया। इस नियुक्ति में सीबीसी गाइडलाइन्स और मेडिकल एथिक कोड की धज्जियां उड़ाई गईं। इसके एक महीने बाद सितंबर 2015 में उन्हें दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का ओएसडी बना दिया। अग्रवाल ने दिल्ली सरकार द्वारा फंड किए गए अंतरराष्ट्रीय टूर भी किए है। ऐसा इसलिए हुआ कि निकुंज अग्रवाल केजरीवाल की पत्नी की बहन के दामाद हैं।

जनता के पैसे से इलाज
दिल्ली में बड़े-बड़े अस्पतालों को छोड़ केजरीवाल बेंगलुरू के जिंदल नेचुरोपैथी केंद्र इलाज करवाने जाते हैं। जब से वे दिल्ली के सीएम बने हैं तब से दो बार वे इलाज करवाने जा चुके हैं। बीते साल तो उनका परिवार भी उनके साथ गया था। इस दौरान वे 17,000 रुपये प्रतिदिन वाले कमरे में रहे। इसका खर्च भी दिल्ली सरकार ने ही वहन किया। केजरीवाल के फाइव स्टार इलाज से सरकारी खजाने पर लाखों रुपए का बोझ पड़ा।

बिजली बिल में लाखों गुल
एक आरटीआई के जरिये यह भी पता चला कि 19 मार्च 2015 से 4 सितंबर 2016 के बीच मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास स्थान का बिल 2.23 लाख रुपये था। लेकिन बिजली बिल बचाने की नसीहत देने वाले मंत्री सत्येंद्र जैन के घर 3.95 लाख रुपये का बिजली बिल आया।

स्वाति मालीवाल मामला
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को घर मुहैया कराने पर सीएजी ने सवाल उठाए। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 18 जुलाई 2016 को दिल्ली महिला आयोग के पद पर नियुक्त होने से पहले स्वाति मालीवाल को अपने सचिवालय में उप सचिव के पद पर 1.15 लाख रुपए और अन्य सुविधाओं के साथ नियुक्त किया था। इस समय वह जनता की शिकायतों और जनता संवाद का कार्य देख रही रही थी। स्वाति मालीवाल हरियाणा के बहुचर्चित आप नेता नवीन जयहिंद की पत्नी हैं।

सरकार बनाने से पहले और बाद में सैकड़ों वायदे करने वाले केजरीवाल दिल्ली की जनता से एक भी वायदा पूरा नहीं कर पाए। चाहे वह सार्वजनिक स्थानों को वाई-फाई करने, डेढ़ लाख जनशौचलाय बनाने, 500 नये स्कूलों के निर्माण,10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने, 3000 डीटीसी बसों के साथ एकीकृत परिवहन व्यवस्था देने, महिलाओं की बसों में सुरक्षा, 1000 मोहल्ला क्लिनिक देने, यमुना की सफाई के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट लगाने या फिर जनलोकपाल देने का वायदा हो उन्होंने दिल्ली की जनता को निराश ही किया।

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