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प्रधानमंत्री मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात के बाद महाबलीपुरम में उमड़ रही है पर्यटकों की भीड़, देखिए तस्वीरें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद तमिलनाडु के महाबलीपुरम में पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। दोनों नेताओं के मुलाकात ने इस प्राचीन शहर को एक बार फिर से दुनिया भर में फेमस कर दिया है। दुनिया भर के लोग यहां आकर महाबलीपुरम के सौंदर्य को निहार रहे हैं। पर्यटकों के आने से यहां के लोगों की कमाई में भी वृद्धि हुई है। स्थानीय लोग इससे काफी खुश है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग ने 11-12 अक्तूबर को हुई अपनी ऐतिहासिक अनौपचारिक वार्ता में हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक विविधता, संगीतमय शाम के बीच प्राचीन संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश की। दक्षिण भारत के परम्‍परागत पोशाक पहने प्रधानमंत्री मोदी ने खुद राष्ट्रपति को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सैर कराई थी।

अतिथि देवो भव के मूल्‍यों के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी ने राष्‍ट्रपति जिनपिंग को अर्जुन तपस्‍या स्‍थल के ऐतिहासिक महत्‍व से अवगत कराया। उन्होंने चीनी राष्‍ट्रपति को स्‍मारकों में अंकित चि‍त्रों के अर्थ को भी समझाया। प्रधानमंत्री और चीनी राष्‍ट्रपति ने पांडवों के प्रसिद्ध पंच रथ के सामने तनावमुक्‍त वातावरण में बैठकर बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग ने पंच रथ परिसर का दौरा करते हुए ताजे नारियल का आनंद लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग को स्मारकों की वास्तुकला और महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग को समुद्र तट पर स्थित प्रसिद्ध शोर मंदिर भी ले गये जो भगवान शिव और विष्‍णु को समर्पित है।

यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कूटनीतिक बातचीत के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खास तोहफे भी दिए। प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को कांचीपुरम सिल्क से बना शॉल गिफ्ट किया। राष्ट्रपति जिनपिंग ने भी प्रधानमंत्री मोदी को एक प्लेट उपहार स्वरूप दी, जिस पर प्रधानमंत्री की तस्वीर छपी हुई है।

महाबलीपुरम को मामल्‍लापुरम के नाम से भी जाना जाता है। मामल्लापुरम यूनेस्‍को विश्‍व धरोहर शहर है। इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व है और तमिलनाडु का यह प्राचीन शहर अपने भव्य मंदिरों, स्थापत्य और सागर-तटों के लिए बेहद ही लोकप्रिय है। चेन्नई से करीब 55 किमी दूर स्थित महाबलीपुरम अपने विशालकाय मंदिरों और समुदी तटों के लिए मशहूर है। यहां के स्मारक और वास्तुकला ऐतिहासिक होने के साथ ही बेहत खूबसूरत भी है। महाबलीपुरम को 7वीं सदी में पल्लव वंश के राजा नरसिंह देव बर्मन ने बसाया था। राजा नरसिंह मामल्ल नाम से भी प्रसिद्ध थे इसलिए बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित इस स्थल को मामल्लपुरम के नाम से भी जाना जाता है। महाबलीपुरम के पास पहाड़ी पर एक लाइटहाउस बना हुआ है। यहां पांच रथ, एकाश्म, शोर मंदिर भी हैं। यहां चट्टानों का काट कर गुफा मंदिर भी बनाए गए हैं।

द्रविड वास्तुकला की दृष्टि से यह शहर अग्रणी स्थान रखता है। सातवीं शताब्दी में यह शहर पल्लव राजाओं की राजधानी था और इस दौरान चीन के साथ कई स्तरों पर संबंध भी थे।

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