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कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी तो राजीव गांधी संस्थागत भ्रष्टाचार के पिता

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पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय 1957 में मूंदड़ा घोटाला हो, इंदिरा गांधी के समय 1973 में मारूति घोटाला या फिर राजीव गांधी के समय में बोफोर्स घोटाला हो देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में कांग्रेस का हाथ रही है। डॉ मनमोहन सिंह के नाम पर पराकांतर से सरकार चलाने वाली सोनिया गांधी के समय तो बस घोटाला ही घोटाला रहा है। अगर कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है तो निश्चित रूप से राजीव गांधी संस्थागत भ्रष्टाचार के पिता हैं। क्योंकि वे अकेले प्रधानमंत्री है जिन्होंने केंद्र से चले एक रुपये में 85 पैसे गायब होने की बात जानते हुए भी कुछ नहीं किया। संस्थागत भ्रष्टाचार का इसे बड़ा और सबूत क्या हो सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके पूरे जीवनकाल को भ्रष्टाचार से लिप्त बताया तो इसमें झूठ क्या है।

बोफोर्स घोटाला का दाग
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर आज भी बोफोर्स घोटाले का दाग है। यह वही घोटाला है जिसके माध्यम से राजीव गांधी ने देश में भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दिया था। जिस दलाली को देश में एक अनाचार के रूप में देखा जाता था उसे राजीव गांधी सरकार ने महिमामंडित कर दिया। राजीव गांधी ने घूस को डील का भाग बना दिया। तभी तो 1437 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप के सौदे के लिए बोफोर्स कंपनी ने भारत के नेताओं से लेकर अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। खास बात है कि कंपनी ने इस सौदे के कमीशन के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उसके परिवार को 64 करोड़ रुपये दिए थे। इसी सौदे में इटली के करोबारी ओतावियो क्वात्रोची का नाम सामने आया था। जिसे बाद में साजिश के तहत देश से भगा दिया गया।

भोपाल गैस कांड के आरोपी को भी देश से भगाया
ये वही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे जिन पर भोपाल गैस कांड के मुख्य आरोपी एंडरसन को भगाया था। यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा उनके निकट के सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह ने अपनी किताब में किया था। भोपाल गैंस कांड के दंश को आज भी वहां के लोगों ने भूला नहीं है।

देश में सिख दंगा के दौरान होने दिया सबसे बड़ा नरसंहार
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित पूरे देश में जब आतताइयों ने सिखों को खिलाफ दंगा के नाम पर उनका नरसंहार करना शुरू किया उस समय राजीव गांधी ही देश के प्रधानमंत्री थे। लेकिन दंगा को रोकने के उपाय करने की बजाय उन्होंने आतताइयों को ही उकसाने वाला बयान दे दिया। सभी को याद है, उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। उनके इस बयान के बाद तो देश के सिखों पर खासकर दिल्ली में तो कयामत आ गई थी।

राजीव गांधी पर पहली बार नहीं उठे हैं सवाल
राजीव गांधी देश के एक ऐसे इकलौता प्रधानमंत्री हुए जिन्हें राजशाही की तरह प्रधानमंत्री मां इंदिरा गांधी के निधन पर राजगद्दी के रूप में प्रधानमंत्री का पद मिल गया। उन पर तो यह भी सवाल उठता रहा है कि पायलट होने के बाद भी उन्होंने 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में कोई योगदान क्यों नहीं किया? आखिर क्यों नहीं राजीव गांधी ने जीते जी खुद पर उठे इन सवालों का जवाब दिया?

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