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देश की सबसे बदनाम पुलिस बनी पश्चिम बंगाल की पुलिस

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वेस्ट बंगाल में जब से ममता बनर्जी की सरकार बनी है प्रदेश के साथ-साथ वहां की पुलिस भी बदनाम होती चली गई है। हाल के दिनों में हुई हिंसक घटनाओं को देखें तो स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की शह पर वहां की पुलिस हिंसक वारदातों को अंजाम देने में जुटी है। प्रदेश में जैसे-जैसे ममता बनर्जी सरकार की साख गिरती गई वहां की पुलिस को हिंसक होने की छूट मिलती गई। सीएम ममता बनर्जी ने प्रदेश में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को दबाने के लिए पुलिस का धड़ल्ले से उपयोग किया है। खासकर लोकसभा चुनवा के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पुलिस का नंगा नाच सामने आया है। इस कारण बदनाम सूची में पश्चिम बंगाल पुलिस पहले स्थान पर पहुंच गई है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार की अलोकप्रियता के कारण पश्चिम बंगाल का नाम भी सबसे बदनाम राज्यों में पहले नंबर पर आ गया है। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इतना अहंकार हो गया है कि वह प्रदेश की जनता के विकास और उसकी भलाई को लेकर प्रधानमंत्री तक से मिलने से इनकार कर दिया है।  

पांचवें चरण के मतदान के दौरान भारी हिंसा
आज यानि सोमवार को पश्चिम बंगाल में हो रहे पांचवें चरण के मतदान के दौरान काफी हिंसा हुई है। बैरकपुर लोकसभा के अंतर्गत मोहनपुर में टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने हिंसा को अंजाम दिया है। लेकिन बंगाल पुलिस मूकदर्शक बनी रही। वहां से भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह ने टीमएमसी कार्यकर्ताओं पर हमला कर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया है। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का दौर जारी है। इससे पहले हुए चारों चरण के मतदान के दौरान भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया।

चौथे चरण में बाबुल सुप्रियो की कार पर हमला
चौथे चरण में भाजपा के कब्जे वाले आसनसोल में तो टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के सांसद बाबुल सुप्रियो की कार पर हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। जबकि बंगाल पुलिस ने बाबुल सुप्रियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बाबुल सुप्रियो ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ हमला कराने का आरोप लगाया है। मतदान को प्रभावित करने के लिए पुलिस के संरक्षण में टीएमसी के कार्यकर्ता किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आसनसोल के बूथ संख्या 125 तथा 129 पर तो टीएमसी कार्यकर्ता केंद्रीय सुरक्षाबलों से भिड़ गए। वहां टीएमसी कार्यकर्ताओं और सुरक्षाबलों के बीच जमकर झड़प हुई।

तीसरे चरण में सीपीएम सांसद के काफिले पर हमला

तीसरे चरण के मतदान के दौरान वीरभूमि में टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने जमकर गुंडागर्दी की थी। वीरभूमि के इस्लामपुर क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सीपीएम के सांसद मोहम्मद सलीम के काफिले पर हमला किया। इस घटना के बात टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

दूसरे चरण में दार्जिलिंग में सर्वाधिक हिंसा

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के दौरान रायगंज सीट के सासंद और उम्मीदवार मोहम्मद सलीम ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने यहां पर दोबारा वोटिंग कराने की मांग की। इस चरण में सबसे ज्यादा हिंसा दार्जिलिंग सीट के चोपरा में हुई है। वहां के मतदाताओं ने तो अपनी सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की है। वहां के लोगों का कहना है कि बंगाल पुलिस उनकी सुनती नहीं बल्कि शिकायत करने पर उन्हें ही फंसा देती है।

टीएमसी कार्यकर्ताओं को पुलिस का संरक्षण प्राप्त होने के कारण ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या होती रही लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की। वह चाहे पेड़ से लटकाकर फांसी देने जैसा जघन्य अपराध का मामला हो या फिर दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं की हत्या

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