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प्रधानमंत्री मोदी ने की तूफान फोनी से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चक्रवाती तूफान ‘फोनी’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, प्रधानमंत्री के अपर प्रधान सचिव, गृह सचिव और आईएमडी, एनडीआरएफ, एनडीएमए, प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

प्रधानमंत्री मोदी को इस चक्रवाती तूफान की संभावित दिशा के बारे में जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री को इसके साथ ही विभिन्न एहतियाती कदमों के साथ-साथ इससे निपटने की तैयारियों के तहत किए गए अनेक उपायों से अवगत कराया गया।

इन उपायों में पर्याप्त संसाधनों का प्रावधान करना, एनडीआरएफ एवं सशस्त्र बलों की टीमों की तैनाती, प्रभावित लोगों को पेयजल मुहैया कराने की व्यवस्था करना और बिजली एवं दूरसंचार सेवाओं की बहाली से जुड़ी वैकल्पिक प्रणालियों का इंतजाम करना शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने संभावित हालात की समीक्षा करने के बाद केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित राज्यों के अधिकारियों के साथ समुचित तालमेल निरंतर बनाए रखने का निर्देश दिया, ताकि इस दिशा में निवारणकारी उपाय सुनिश्चित किए जा सकें। प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव कार्यों के लिए ठोस कदम उठाने का भी निर्देश दिया।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी कि 3 मई के पूर्वाह्न में पुरी के दक्षिण में स्थित ओडिशा के तट से चक्रवाती तूफान ‘फोनी’ के टकराने का अंदेशा है। इस दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। यही नहीं, इस वजह से गंजाम, गजपति, खुर्दा, पुरी और जगतसिंहपुर, केन्द्रपाड़ा, भद्रक, जाजपुर एवं बालासोर सहित ओडिशा के कई तटीय जिलों में भारी बारिश होने का अंदेशा है। इसी तरह पश्चिम बंगाल के पूर्वी एवं पश्चिमी मेदिनीपुर, दक्षिणी एव उत्तरी 24 परगना, हावड़ा, हुगली, झारग्राम एवं कोलकाता जिलों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, विजयनगरम और विशाखापत्तनम जिलों के भी इस तूफान से प्रभावित होने की आशंका है।

भारतीय मौसम विभाग ने आगाह करते हुए कहा है कि लगभग 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहर उत्पन्न होने की प्रबल आशंका है, जिससे तटीय क्षेत्र से टकराने के समय ओडिशा के गंजाम, खुर्दा, पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के निचले तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है। आईएमडी सभी संबंधित राज्यों को गत 24 अप्रैल से ही हर तीन घंटे पर बुलेटिन जारी करता रहा है, जबकि आज से वह हर घंटे बुलेटिन जारी कर रहा है, जिसमें नवीनतम पूर्वानुमान की जानकारी दी जाती है।

गृह मंत्रालय संबंधित राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार की एजेंसियों से निरंतर संपर्क में है। गृह मंत्रालय ने उन चार राज्यों को अग्रिम तौर पर 1086 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए हैं, जिनके इस चक्रवाती तूफान से प्रभावित होने का अंदेशा है। राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) ने पांच राज्यों में नावों, पेड़ काटने वाली मशीनों, दूरसंचार उपकरणों इत्यादि से लैस 54 टीमों को पहले से ही पूरी तरह तैयार रखा है। एनडीआरएफ ने इसके साथ ही 31 टीमों की अतिरिक्त या आपातकालीन व्यवस्था भी कर रखी है।

भारतीय तटरक्षक और नौसेना ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जहाजों और हेलिकॉप्टरों को भी पहले से ही तैनात कर दिया है। तीन राज्यों में सेना एवं वायुसेना यूनिटों की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। विशाखापत्तनम में मानवीय सहायता से लैस आठ जहाजों और आपदा राहत यूनिटों की आपातकालीन व्यवस्था की गई है। निगरानी विमान और हेलिकॉप्टर पूर्वी तट की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। चेन्नई, विशाखापत्तनम, चिल्का और कोलकाता में आपदा राहत टीमों (डीआरटी) और चिकित्सा टीमों (एमटी) की अतिरिक्त या आपातकालीन व्यवस्था की गई है।

एनडीआरएफ असुरक्षित स्थानों से लोगों की निकासी करने में राज्य की एजेंसियों की सहायता कर रहा है। एनडीआरएफ इसके साथ ही चक्रवाती तूफान से निपटने के तरीके बताते हुए निरंतर सामुदायिक जागरूकता अभियान भी चला रहा है।

प्रधानमंत्री ने चक्रवाती तूफान से उत्पन्न स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को हरसंभव कदम उठाने का निर्देश दिया, ताकि राज्य सरकारों द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को बिजली, दूरसंचार, पेयजल एवं स्वास्थ्य जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं का समुचित रखरखाव सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया, ताकि इन्हें कोई भी नुकसान पहुंचने की स्थिति में इन सेवाओं की बहाली तत्काल हो सके। प्रधानमंत्री ने नियंत्रण कक्षों का चौबीसों घंटे परिचालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

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