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मोदी-जिनपिंग की बैठक में आतंकवाद पर हुई चर्चा, कश्मीर का जिक्र भी नहीं

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भारतीय कूटनीति के लिहाज से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दौरा काफी सफल रहा। भारत आतंकवाद के मुद्दे को चर्चा का विषय बनाने का कामयाब रहा। विदेश सचिव विजय गोखले ने मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के दौरान कश्मीर के मुद्दे पर एक बार भी चर्चा नहीं हुई,जबकि आतंक पर विस्तार से बात हुई।

विदेश सचिव ने कहा कि दोनों नेताओं की लंबी बातचीत के दौरान एक बार भी कश्मीर मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। दोनों देशों ने आतंकवाद का मिलकर सामना करने की बात कही। दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि आतंकवाद और कट्टरवार की चुनौतियों का सामना करना जरूरी है।  

गोखले ने कहा कि जिनपिंग ने भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद कहा। दोनों देशों के बीच व्यापार पर चर्चा हुई। जिनपिंग ने अपने दौरे को यादगार बताया। भारत-चीन के बीच आगे भी अनौपचारिक बातचीत होती रहेगी। अगले साल दोस्ती के 70 साल होंगे। इस मौके पर 70 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

6 घंटे तक वन टु वन मीटिंग

गोखले ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच आज करीब 90 मिनट तक बातचीत हुई। इसके बाद डेलिगेशन स्तर की बातचीत हुई। इसके बाद पीएम मोदी ने शी के सम्मान में लंच का आयोजन किया। इस समिट में कुल मिलाकर दोनों नेताओं के बीच 6 घंटे तक वन टु वन मीटिंग हुई।

चीन में अगली अनौपचारिक बैठक 

गोखले ने कहा कि अगली अनौपचारिक बैठक चीन में होगी। जिसकी तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। भारत-चीन के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं पर चर्चा के लिए एक नए तंत्र की स्थापना की जाएगी। चीन का प्रतिनिधित्व जहां वाइस प्रीमियर हु चुन्हुआ करेंगे तो भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री निर्मला सीतारम करेंगी। अब जनता के बीच संबंधों पर ध्यान दिया जाएगा। यह तय किया गया कि दोनों देशों की जनता को इस रिश्ते में लाया जाएगा। इसे लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

मोदी को चीन आने का न्योता

विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि चीन के राष्ट्रवति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी को चीन आने का न्योता दिया है। पीएम मोदी ने चिनफिंग के न्योते को स्वीकार कर लिया है। अगले दौर की बैठक चीन में होगी।

कैलाश मानवसरोवर यात्रियों को सुविधा 

विदेश सचिव ने कहा कि कैलाश मानवसरोवर यात्रियों को चीन सुविधा देगा। भारत ने चीन को दवा और आईटी क्षेत्र में निवेश का न्योता दिया है। 

‘मतभेदों को नहीं बनने देंगे विवाद’

प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 2 हजार सालों के अधिकांश कालखंड में भारत और चीन दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियां थीं। अब इस शताब्दी में हम फिर से साथ-साथ उस स्थिति को प्राप्त कर रहे हैं। पिछले साल वुहान में हमारी अनौपचारिक बैठक में हमारे संबंधों में गति आई है। दोनों देशों में रणनीतिक संवाद बढ़ा है। 

 

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