Home समाचार मोदी सरकार के इन फैसलों से एजुकेशन हब बनने की राह पर...

मोदी सरकार के इन फैसलों से एजुकेशन हब बनने की राह पर भारत

124
SHARE

2014 से 2019 के बीच पीएम नरेन्द्र मोदी के राजकाज का एक ही सूत्र वाक्य रहा है- सबका साथ सबका विकास। मोदी जी का यह भी मानना है कि सबको साथ लेकर विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के रास्ते में शिक्षा सबसे बड़ा हथियार हो सकती है। इसीलिए, 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार एजुकेशन टू ऑल को लक्ष्य बनाकर काम करेगी। प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच भारत में हमेशा एक बड़ी समस्या रही है। आजादी के बाद कांग्रेस सरकारों के दौर में शिक्षा की सबसे ज्यादा अनदेखी हुई। कांग्रेस सरकारों ने कभी यह माना ही नहीं कि देश की शिक्षा व्यवस्था में खामियां हैं। पीएम मोदी ने सबसे पहले इस नजरिये को बदला। उनकी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था की खामियों की पहचान की और फिर उन्हें दूर करने के लिए कारगर रणनीति तैयार की। मोदी सरकार की कई योजनाओं का संबंध सीधे शिक्षा क्षेत्र से नहीं था, इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दिया। आइए जानते हैं मोदी सरकार के कुछ नीतिगत फैसलों के बारे में जिनके चलते पिछले पांच वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आए हैं और भारत अब दुनिया का एजुकेशन हब बनने के रास्ते पर कदम बढ़ा चुका है…

स्वच्छ भारत, स्वच्छ विद्यालयः स्कूलों में स्वच्छता की कमी छात्रों, खासकर लड़कियों की शिक्षा के रास्ते में एक बड़ी रुकावट है। लड़कियों में शिक्षा की कमी का सीधा संबंध सामाजिक व्यवस्था से है। कम शिक्षित लड़कियों की शादी अक्सर कम उम्र में हो जाती है। देश में पहली बार मोदी सरकार ने ही अलग-अलग क्षेत्रों में स्वच्छता के महत्व को समझा। स्वच्छ भारत अभियान की तरह स्वच्छ भारत, स्वच्छ विद्यालय अभियान की शुरुआत 2014 में की गई। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम का असर है कि आज स्कूलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट कम है।

असरः

  • शुरुआत के पहले एक वर्ष यानी 15 अगस्त, 2015 तक 2.6 लाख स्कूलों में 4 लाख टॉयलेट बनाए गए।
  • साल 2016 में प्राइम मिनिस्टर्स एक्सीलेंस अवॉर्ड के लिए स्वच्छ विद्यालय को एक अहम पैमाने के रूप में शामिल किया गया।
  • 14 सितंबर, 2017 को उच्च शिक्षा संस्थानों में स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया गया।

यह भी पढ़ेंः मोदी सरकार में मजबूत होती इकोनॉमी, भारत पर फिदा एफपीआई निवेशक

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियानः इसके तहत कम दूरी पर गुणवत्तापूर्ण  माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित है। अभियान के अंतर्गत नए स्कूलों का निर्माण, शिक्षकों के लिए घर बनाना, सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग, नवजातों के लिए शिक्षा आदि भी शामिल हैं। अभियान के अंतर्गत 12682 नए माध्यमिक स्कूलों का निर्माण प्रस्तावित है जिसमें से 8239 का निर्माण हो चुका है। 50713 नए क्लासरूम बनाए जाने हैं जिसमें से 72 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसी तरह 70244 टॉयलेट्स बनाए जाने हैं जिसमें से 49692 बन चुके हैं।

शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 में संशोधनः मोदी सरकार ने 2017 में शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन किया, जिसके तहत कक्षा पांच और आठ के बाद नियमित परीक्षा का प्रावधान किया गया है। संशोधन का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के लर्निंग के स्तर को बेहतर बनाना है। इससे पहले तक आठवीं कक्षा तक नो डिटेंशन पॉलिसी का प्रावधान था, लेकिन स्कूलों में बढ़ते ड्रॉप आउट रेट की वजह से इसमें बदलाव की आवश्यकता थी।

यह भी पढ़ेंः मोदी सरकार में बेहतर हुआ कारोबारी माहौल, भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती हैं अमेरिकी कंपनियां

आईआईएम एक्टः उच्च शिक्षा के संस्थानों को ऑटोनॉमी का मुद्दा लंबे समय से विवादों में रहा है। उसके चलते सरकार और इन संस्थानों के बीच कई बार टकराव के हालत बने। मोदी सरकार ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एक्ट में संशोधन कर उनकी शिकायतें दूर कर दी।

  • नए कानून के तहत आईआईएम संस्थानों को इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस का दर्जा दिया गया है। इन्हें अब छात्रों को डिग्री देने का अधिकार मिल गया है।
  • आईआईटी और आईआईएम के डायरेक्टर अब भी सरकार ही नियुक्त करती है, लेकिन नए कानून में इन संस्थानों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं।

यह भी पढ़ेंः महिला सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार

नेशनल डिजिटल लाइब्रेरीः यह लर्निंग के संसाधनों की लाइब्रेरी है। इसमें 1.5 करोड़ से ज्यादा डिजिटल बुक्स और जर्नल शामिल हैं। पूरे देश में करीब 31 लाख छात्र अभी इसका फायदा उठा रहे हैं।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय– इसके तहत अपर प्राइमरी स्तर पर लड़कियों के लिए रेसीडेंशियल स्कूल का निर्माण किया जा रहा है। इसका लक्ष्य महिलाओं एवं समाज के कमजोर तबकों तक शिक्षण संस्थानों की पहुंच बढ़ाना है।

एआईसीटीई ने तकनीकी शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत छात्राओं को सालाना 4 हजार रुपए की स्कॉलरशिप मिलती है।

पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड टीचिंग 2014 में लॉन्च किया गया था। इसका लक्ष्य स्कूल और कॉलेजों में शिक्षा के स्तर को बेहतर करना, शिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और योग्य लोगों को शिक्षण कार्य के प्रति आकर्षित करना है।

हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी शिक्षा और शोध के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं विकसित करने हेतु गठित की गई है। इसके अंतर्गत 1000 करोड़ रुपए का एक फंड बनाया गया है, जिसके जरिये अगले 10 साल तक शिक्षा और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए धन मुहैया कराएगा।

शिक्षण संस्थानों का विस्तार
मोदी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए केवल नीतियां नहीं बनाईं, उन्हें अमलीजामा भी पहनाया। देश में उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी को दूर करने के लिए नए संस्थानों के निर्माण की अनुमति दी। सरकार ने आईआईटी, आईआईएम, एम्स और आईआईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों का विस्तार किया। इसे इन आंकड़ों से बेहतर समझा जा सकता है…

संस्थान         2014 से पहले        2014 के बाद

आईआईटी            16                 7

आईआईएम           13                 7

एम्स                    7                  15

आईआईआईटी         9                 15

Leave a Reply