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बुद्धिजीवियों ने की प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल की निंदा

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प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जिस प्रकार कांग्रेस और दूसरी पार्टियां गालियों का इस्तेमाल कर रही है, उससे देश भर के बुद्धिजीवी गुस्से में हैं। कला, साहित्य, पत्रकारिता, लोकपालिका और न्यायपालिका जगत के प्रमुख बुद्धिजीवियों ने अपील जारी कर कहा है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अर्मायदित भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है। नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘मेकिंग इंडिया ए मोर इवॉल्वड डेमोक्रेसी’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में यह अपील जारी की गई।

इस गोष्ठी में विधि, पत्रकारिता, कला, साहित्य, रक्षा, समाजसेवा, प्रशासन समेत समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी में भाग लेने वालों में पद्मश्री व वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय, वरिष्ठ विचारक के.एन. गोविंदाचार्य, पूर्व चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, पूर्व जज न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शोभा दीक्षित, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष राकेश खन्ना, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रुपिंदर सिंह सूरी, भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त एयर मार्शल आर. सी. वाजपेयी, भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त एयर कमोडोर रंजन मुखर्जी, समाजसेवी संतोष तनेजा, संविधान विशेषज्ञ चन्द्रशेखर प्राण, इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर आलोक बंसल, शिक्षाविद हेमन्त गोयल, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ हरीश चन्द्र बर्णवाल और पत्रकार भारत भूषण शामिल हैं।

फोरम फॉर डेमोक्रेटिक डायलॉग की ओर से आयोजित इस गोष्ठी में कहा गया कि प्रधानमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक दल के नेता जिस प्रकार से अर्मायदित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह निंदनीय है। इस गोष्ठी में सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं से अपील की गई कि प्रचार के दौरान मर्यादित भाषा का इस्तेमाल हों।

सभी बुद्धिजीवियों ने एकमत से यह माना कि आजकल जिस तरह से चुनाव के दौरान भाषा की मर्यादा तार-तार हो रही है, उसका सीधा असर आज के युवाओं के मस्तिष्क पर पड़ रहा है और वह लोकतंत्र में अपनी अहम हिस्सेदारी से विमुख हो रहा है। यह लोकतंत्र के भविष्य के लिए घातक संकेत है। गोष्ठी में सभी पार्टियों और उनके नेताओं से भाषा में संयम बरतने की अपील करते हुए यह भी कहा गया कि मीडिया डिबेट के दौरान भी भाषा को लेकर संयम बनाकर रखना चाहिए और असहमति को भी पूरी तरह से सम्मान देना चाहिए।

आठ सूत्री अपील में कहा गया है कि आज भारतीय लोकतंत्र जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिस प्रकार से नैतिकता का क्षरण हुआ है, वो दुर्भाग्यजनक है। भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परंपरा के अनुरूप हम सबके लिए देश सर्वोपरी होना चाहिए। इसके बाद दल और सामाजिक संगठन का स्थान होना चाहिए। और आखिर में व्यक्ति का खुद का स्थान होना चाहिए।

अपील में यह भी कहा गया कि मतदान लोकतंत्र का एक उत्सव है इसलिए मतदान अवश्य करें लेकिन नोटा से बचें। जो उपलब्ध उम्मीदवार है उसमें से सर्वश्रेष्ठ का चयन करें और अपना वोट डालते समय जाति, धर्म, क्षेत्र की बजाए देशहित को प्राथमिकता दें।

फोरम फॉर डेमोक्रेटिक डायलॉग की ओर से जारी इस अपील में सोशल मीडिया पर, विशेषकर व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर पर भ्रामक एवं झूठी सूचनाओं से बचने को भी कहा गया है। फोरम ने इसके साथ ही चुनाव आयोग से सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाले अफवाह और फेक न्यूज पर निगरानी के लिए उचित व्यवस्था करने की भी अपील की है।

गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि हमारी कोशिश लोगों के बीच संवाद कायम करने की है। आज जिस तरह से आम जनमानस के सामने फेक न्यूज के जरिए गलत जानकारी परोस कर गुमराह करने की कोशिश की गई है, उन्हें उससे बाहर निकालने की है।

 

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