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प्रचार अभियान में तय हो गया था आएगा तो मोदी ही, जानिए क्यों

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2019 का लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम चरण में है। वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब नतीजों का इंतजार है। इस बीच एग्जिट पोल्स में ये बताया गया है कि पीएम नरेन्द्र मोदी का दोबारा प्रधानमंत्री बनना तय है। यह भी करीब-करीब तय है कि बीजेपी और एनडीए को 2014 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। एग्जिट पोल वोटिंग के बाद किया जाता है लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान ही स्पष्ट हो गया था कि मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने से रोकना विपक्षी पार्टियों के लिए असंभव होगा। यदि बीजेपी और कांग्रेस के प्रचार अभियान पर गौर करें तो पीएम मोदी ने अपनी रैलियों के जरिए पार्टी के मजबूत गढ़ों को बचाने के साथ नए इलाकों में विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अपने मजबूत गढ़ों को बचाना ही चुनौतीपूर्ण हो गया।

मोदी का सबसे ज्यादा फोकस यूपी पर
पीएम मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कुल 144 रैलियां और रोड शो किए। उत्तर प्रदेश को पीएम मोदी और बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। इसका कारण भी स्पष्ट है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें मिली थी, लेकिन 2019 में सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन और प्रियंका गांधी की एंट्री से उसके लिए चुनौतियां ज्यादा थीं। इस बार पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश में 36 रैलियां और रोड शो किए। यानी पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश में हर 2.5 सीट पर एक रैली की। 

बंगाल और ओडिशा पर ध्यान
उत्तर प्रदेश के बाद मोदी का सबसे ज्यादा फोकस पश्चिम बंगाल पर रहा जहां बीजेपी और टीएमसी के बीच बीते कुछ समय से खींचतान जारी है। मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पास केवल दो सीटें हैं और वह टीएमसी को बड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिशों में जुटी है। बीजेपी की मंशा केवल लोकसभा चुनाव तक ही सीमित नहीं थी। पार्टी का लक्ष्य है कि राज्य में अगले विधानसभा चुनाव में वह तृणमूल कांग्रेस के लिए चैलेंजर नंबर वन बने। पीएम मोदी ने यहां की 42 सीटों के लिए 17 रैलियां की हैं यानी 2.5 सीट के लिए एक रैली। पश्चिम बंगाल के बाद पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा रैली ओडिशा में की। ओडिशा की कुल 21 सीटों से में बीजेपी के नाम सिर्फ एक सीट है जबकि अन्य 20 सीटों पर बीजू जनता दल के पास है। पीएम मोदी ने इस बार ओड़िशा में आठ रैलियां की, यानी हर 2.6 सीट के लिए एक रैली।

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पीएम का 40 फीसदी प्रचार तीन राज्यों में
इस लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी द्वारा किए गए प्रचार का 40 फीसदी यूपी, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में किया गया। पीएम ने इन तीनों राज्यों में कुल 58 रैलियां की हैं। इन तीनों राज्यों में कुल 143 लोकसभा सीटें हैं जो इस बार सत्ता में आने के लिए अहम भूमिका निभा सकती हैं। अगर पिछली बार से तुलना करें तो नरेंद्र मोदी ने 2014 में बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पश्चिम बंगाल से ज्यादा रैलियां कीं। पिछली बार मोदी ने पूर्वी यूपी के बलिया में रैली के जरिए चुनाव अभियान खत्म किया था तो इस बार मध्य प्रदेश के खरगौन में आखिरी रैली की। 

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राहुल का कांग्रेस शासित राज्यों पर रहा जोर
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस लोकसभा चुनाव में कुल 125 रैलियां की। राहुल ने चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल पर फोकस किया है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य की 80 सीटों को ध्यान में रखते हुए कुल 18 रैलियां की, यानी हर 4.5 सीट के लिए एक रैली। उत्तर प्रदेश और खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि उनकी बहन प्रियंका गांधी के लिए भी साख की लड़ाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में महज दो सीटें अमेठी और रायबरेली के रूप में जीती थीं।

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दक्षिण भारत में राहुल की ज्यादा रैलियां
उत्तर प्रदेश के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान में सबसे ज्यादा प्रचार किया। राजस्थान की 25 सीटों के लिए राहुल गांधी ने कुल 12 रैलियां की। यानी 2.08 सीट के लिए एक रैली। 2014 में राजस्थान में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली थी। राहुल ने दक्षिण भारत पर भी इस बार खासा फोकस किया। यही वजह है कि वे इस बार अमेठी के साथ-साथ वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल ने केरल की 20 सीटों के लिए 12 रैलियां की यानी हर 1.66 सीट के लिए एक रैली। फिलहाल केरल में कांग्रेस के पास कुल सात सीटें हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वह केरल में इस बार ज्यादा सीटें जीतकर अन्य राज्यों में होने वाले नुकसान की भरपाई करेगी। 

4 राज्यों में राहुल की 52 रैलियां
राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, राजस्थान और केरल में कुल 52 रैलियां की। कांग्रेस मध्य प्रदेश को लेकर खासी उत्साहित है। यहां कांग्रेस ने 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद यहां सरकार बनाई थी। कांग्रेस ने इस लोकसभा चुनाव में एमपी में कुल 10 रैलियां की। 2014 में कर्नाटक राहुल गांधी की शीर्ष प्राथमिकता में था, उसके बाद पूर्वोत्तर के राज्यों और केरल पर उनका फोकस रहा था। 

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मोदी की नजर विस्तार पर, राहुल प्रयोग करने में पिछड़े
बात अगर क्षेत्रीय पार्टियों की करें तो उनका फोकस मुख्य तौर पर संबंधित गृह राज्यों पर रहा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ उन कुछ मौजूदा मुख्यमंत्रियों में शुमार रहे, जिन्होंने अपने राज्य से बाहर भी प्रमुखता से प्रचार किया। अगर दोनों बड़ी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की रैलियों की संख्या को देखें तो पीएम मोदी का फोकस पिछली बार के मजबूत गढ़ों (यूपी, राजस्थान आदि) के बचाए रखने के साथ-साथ पार्टी के लिए नई जमीन तैयार करने (पश्चिम बंगाल) पर रहा। दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष का फोकस उन्हीं राज्यों पर रहा, जहां पार्टी ने हाल के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि, इस मामले में उनके लिए यूपी कुछ हद तक अपवाद रहा, जहां उन्होंने काफी जोर लगाया। साफ है कि चुनाव प्रचार में राहुल गांधी ने प्रयोगों पर जोर नहीं दिया।

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