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करप्शन पर मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति बरकरार, वित्त मंत्रालय के 15 भ्रष्ट अफसरों को दिया रिटायरमेंट

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मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी को बरकरार रखते हुए मंगलवार, 18 जून को वित्त मंत्रालय के 15 सीनियर अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया। इसमें मुख्य आयुक्त, आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं। इन अधिकारियों को अर्टिकल 56 के तहत रिटायरमेंट दिया गया है।

कैसे काम करता है अर्टिकल 56

असल में रूल 56 का प्रयोग उन अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हों। सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है। सरकार के जरिए अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने का नियम काफी पहले से ही प्रभावी है।

अफसर और आरोप

इनमें 1985 बैच के आईआरएस अशोक अग्रवाल का नाम सबसे ऊपर है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अफसर अग्रवाल ईडी के संयुक्त निदेशक रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप में 1999 से 2014 के बीच निलंबित रहे हैं।

इन पर कारोबारियों से वसूली और तांत्रिक चंद्रास्वामी की मदद का आरोप रहा है। 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी होमी राजवंश को सेवानिवृत्ति दी गई है। उन पर पद का गलत इस्तेमाल कर संपत्ति जुटाने का केस चला और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया, तभी से वो निलंबित हैं।

नोएडा के कमिश्नर रहे 1989 बैच के आईआरएस एसके श्रीवास्तव को भी सेवानिवृत्त किया गया है। इन पर कमिश्नर रैंक की दो महिला आईआरएस के साथ यौन शोषण करने का आरोप है। अन्य अफसरों में बी.बी. राजेंद्र प्रसाद, बी. अरुलप्पा, अशोक मित्रा, चंदर सैनी भारती,अंदासु र्रंवदर, श्वेताभ सुमन, विवेक बत्रा व राम कुमार भार्गव शामिल हैं। सभी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के करप्ट अफसरों पर भी की थी कार्रवाई

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के करप्ट अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 12 बड़े अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के इन अधिकारियों पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जबरन वसूली, रिश्वत और यौन उत्पीड़न के आरोप हैं।

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