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पीएम मोदी के विजन को आगे बढ़ाएंगे योगी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुरानी परिपाटियों को तोड़ने के लिए ही ज्यादा जाना जाता रहा है। पीएम मोदी को लीक से हटकर काम करना ज्यादा पसंद है। उनके निर्णय लेने के साहस की तारीफ तो विरोधी भी करते हैं। मराठा बहुल राज्य महाराष्ट्र में पार्टी के ब्राह्मण चेहरे देवेंद्र फड़णवीस को राज्य की कमान सौंपना हो, हरियाणा में अनजाना चेहरा मनोहर लाल खट्टर के हाथ में जाट बहुल प्रदेश का नेतृत्व सौंपना हो या झारखंड में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री के तौर पर रघुवर दास को राज्य की बागडोर देने की बात हो। सब के सब फैसले नरेंद्र मोदी ने चली आ रही राजनीतिक व्यवस्था को दरकिनार कर लिए थे। जाति जमात की राजनीति को नकारते हुए शासन चलाने की योग्यता के आधार पर लिए थे। अब यूपी में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद सौंपना भी उनके लीक से हटकर सोचने का ही सबूत है। दूसरी तरफ यह सच्चाई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी देश और दुनिया में स्वीकार्यता विकास कार्यों को लेकर उनके विजन की वजह से भी है। योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के विजन के बड़े प्रशंसक हैं। ऐसे में ये बात तय है कि केंद्र में जिस तरह मोदी सरकार चल रही है, यूपी में योगी सरकार उसी एजेंडे पर आगे बढ़ेगी।

केंद्र में मोदी, यूपी में योगी
योगी आदित्यनाथ को यूपी की कमान सौंपने के पीछे पीएम मोदी के साहस की तारीफ एक बार फिर हो रही है। दरअसल पार्टी का एक कर्मठ कार्यकर्ता, जिसने अपने दल के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया हो। बीते चुनाव में तीन सौ से ज्यादा रैलियां की हो। पूर्वांचल की एक सौ चालीस सीटों में एक सौ सीटों पर पार्टी की जीत में जिनका अहम योगदान रहा हो। जाति की जकड़न से बाहर समाज निर्माण जिनका उद्येश्य हो, उसे यूपी की कमान सौंपना एक सही फैसला है।

पीएम मोदी पर होते रहे हैं हमले
26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ले रहे थे तब भी तथाकथित सेकुलर जमात देश का माहौल खराब होने की बात कह रहे थे। ये प्रोपगैंडा किया जा रहा था कि देश के मुसलमानों के साथ कुछ अनहोनी होने वाली है। देश में दंगे भड़कने की बात जोर-शोर से कही जा रही है थी। बीस करोड़ मुसलमानों में डर पैदा करने की कोशिश की गई थी। लेकिन पीएम मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र के साथ सारी आशंका को न सिर्फ धता बता दिया, बल्कि मुस्लिम समाज भी पीएम मोदी के साथ जुड़ गया है। मुस्लिम महिलाओं ने तो पीएम मोदी पर अपना पूरा विश्वास दिखाया है। पीएम मोदी ने सवा सौ करोड़ देशवासियों का साथ लेकर देश के विकास को नई गति दी है और अब भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।

निरर्थक डर दिखाया जा रहा
यूपी में योगी आदित्यनाथ ने भी सीएम पद के नाम की घोषणा होने के बाद अपने पहले वक्तव्य में ही पीएम मोदी के मूल मंत्र को ही दोहराया है। योगी ने नाम की घोषणा के साथ ही डीजीपी जाविद अहमद को कहा कि उत्सव के नाम पर उपद्रव की इजाजत नहीं है। साफ है कि उन्होंने सबसे पहले यही संदेश देने की कोशिश की है कि उनके एजेंडे में यूपी की 22 करोड़ जनता है, न कि कोई खास जाति या धर्म। योगी आदित्यनाथ के संकल्प से साफ है कि तथाकथित सेकुलर जमात द्वारा जो डर दिखाने की कोशिश की जा रही है वो निर्मूल है।

आजम सेकुलर तो योगी कट्टर कैसे ?
यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान की हिंदू विरोधी छवि किसी से छिपी नहीं है। साल 2013 में यूपी के मंत्री आजम खान को कुंभ मेले का प्रभारी बनाया गया था। तब देश की 82 प्रतिशत आबादी के एक धार्मिक आयोजन का जिम्मा एक मुसलमान के हाथ में सौंपा गया था। उस वक्त सवाल उठाने वाले कहां थे? इलाहाबाद स्टेशन पर इसी दौरान हादसा भी हुआ था जिसमें बीसियों जानें चली गईं थी, बावजूद इसके आजम खान पर हिंदुओं ने सवाल नहीं उठाए थे। अब बीजेपी के एक कर्मठ कार्यकर्ता को जब यूपी की कमान सौपी गई है तो सवाल क्यों ?

धर्मनिरपेक्षता या दोगलापन
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट किया है, जिसमें लिखा है- देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य की 18 प्रतिशत आबादी अपने भविष्य को लेकर डर में है। साफ है कि उमर अब्दुल्ला का एक सबसे बड़े सीएम पर इस तरह की टिप्पणी कहीं से जायज नहीं है। उमर अब्दुल्ला ये क्यों भूल गए कि कश्मीर से लाखों कश्मीरी पंडितों का पलायन उनकी पार्टी की ही सरकार में हुई थी। तब ये डर उन्हें नजर नहीं आया था क्या ? कैराना पलायन के मुद्दे पर ये क्यों चुप थे ? क्या ये तथाकथित सेकुलर जमात का दोगलापन नहीं ?


धर्मनिरपेक्ष योगी
योगी का सबसे करीबी सेवक एक मुस्लिम लड़का है। दरअसल इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। यह बच्चा अनाथ रूप में योगी आदित्यनाथ के पास आया था। उसी नाम, धर्म और पहचान के साथ उसे उन्होंने अपने पास रख लिया, जो उसे उनके माता पिता ने दिया था। तब से मुस्लिम लड़का योगी आदित्यनाथ के साथ है। 

छद्म सेकुलरवाद को आईना दिखाते योगी
जिस गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ हैं उसमें बड़ी संख्या में मुसलमानों की दुकानें हैं। यही नहीं मंदिर के तीनों तरफ मुसलमानों की बड़ी आबादी है, जो आदित्यनाथ को अपना संरक्षक मानती है। योगी जी के खास लोगों में कई मुस्लिम भी हैं। पांच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को इन मुसलमानों का भी समर्थन मिलता रहा है।

दरअलस छद्म सेकुलरवाद से चिढ़े योगी आदित्यनाथ की जुबान भले ही कट्टर दिखता हो लेकिन वो सही मायनों में कर्मठ और ईमानदार जननेता है। जिनका एजेंडा केवल आम आदमी का हित है। 

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