Home योग विशेष अपनाएं योग, भगाएं रोग

अपनाएं योग, भगाएं रोग

309
SHARE

पुरानी और गंभीर से गंभीर बीमारियों का हमेशा के लिए निदान चाहते हैं योग कीजिए। ये बात हमेशा से कही जाती रही है। आधुनिक मेडिकल साइंस भी इस बात को स्वीकार करता आया है। मेडिकल साइंस में इसको लेकर तरह-तरह के रिसर्च भी होते चले आ रहे हैं। अब भारत के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के डॉक्टरों ने भी वैज्ञानिक आधार पर इस बात की पुष्टि की है कि योगाभ्यास से कई गंभीर रोगों से छुटकारा मिल सकता है। हिंदी समाचार पोर्टल नवभारत टाइम्स के अनुसार एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि, रिसर्च से साबित हो गया है-रोग से मुक्ति पाने में योग काफी असरदार है।

एम्स में लंबे समय तक किए गए प्रयोगों से ये बात सामने आई है अगर नियमित योगाभ्यास किया जाए तो उपचार में भी योग काफी लाभकारी है। इसके अलावा प्राणायाम का प्रभाव भी शरीर और दिमाग दोनों पर देखने को मिला। इसे करने वाले लोग शारीरिक रूप से तंदरुस्त और मानसिक रूप से काफी संतुलित नजर आए। प्राणायाम करने वालों की याददाश्त और एकाग्रता में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है। प्राणायाम करने वाले मरीजों की स्ट्रेस लेवल में भी गिरावट देखी गई है।

एम्स ने कुछ बीमारियों पर योग के असर को प्रयोगशाला में परखने के बाद पाया है कि इन बीमारियों में योग बहुत कारगर हो सकता है-

अस्थमा और Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD)में कारगर
एम्स ने पाया है कि अस्थमा के मरीज अगर सही आसन-प्राणायाम करें तो उन्हें सांस फूलने की परेशानियों में काफी हद तक आराम मिल सकता है। इसी तरह COPD के मरीज भी अगर नियमित योगाभ्यास करें तो एक ही हफ्ते में इनहेलर की आवश्यकता पड़ सकती है और बाहर से लगाए जाने वाले ऑक्सीजन की जरूरत भी कम हो सकती है। यानी अगर ये मरीज नियमित योग करें तो उन्हें अस्पताल का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मेटाबोलिक सिंड्रोम में लाभकारी
मोटापा, खून में कोलेस्ट्राल की अधिकता और डायबिटीज। इन सभी रोगों के समूह को मेटाबोलिक सिंड्रोम का नाम दिया गया है। अनियमित खानपान, आराम तलबी जीवनशैली इस सिंड्रोम के मुख्य कारण है। इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में हृदय रोग की संभावना भी दो गुना रहती है। एम्स के रिसर्च में पाया गया है कि स्ट्रेस या तनाव इस सिंड्रोम का बहुत बड़ा कारण है। एम्स के रिसर्च में पाया गया है कि योगाभ्यास से स्ट्रेस बढ़ाने वाले हॉर्मोंस का स्तर काफी कम हो जाता है, जबकि स्ट्रेस कम करने वाले हॉर्मोंस का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। इसी के साथ डिप्रेशन में भी योग बेहद लाभकारी साबित हुआ है।

डायबिटीज
रिसर्च के अनुसार योग से डायबिटीज टाइप-2 में भी काफी राहत मिलती है। कई मामले में योग करने वाले मरीजों को दवाइयों से भी मुक्ति मिल गई है। खासकर जिन मरीजों को अलग से इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती उनके लिए योग के जरिए अपनी बीमारी को मैनेज करने में काफी राहत मिली।

मोटापा
रिसर्च ने साफ कर दिया है कि अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसी योग क्रियाओं से मोटापा कम होता है। यानी अगर नियमित अभ्यास किया जाए तो मोटापा के रोगियों के लिए ये रामबाण है।

बांझपान मिटाता है योग
एम्स ने रिसर्च में पाया है कि महिलाओं में बच्चे पैदा करने की क्षमता बढ़ाने में भी योग लाभकारी है। रिसर्च से पता चला है कि कुछ खास आसन और योग मुद्रा ऐसे हैं, जिन्हें करने से महिलाओं के पेट के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। अगर इसका नियमित अभ्यास किया जाए तो बहुत लोगों की परेशानी मिट सकती है।

मिर्गी और लकवा में भी फायदेमंद
योग, मिर्गी और लकवा के रोगियों के लिए भी रामबाण साबित हुआ है। एम्स ने मिर्गी के रोगियों के 6 महीने के मेडिटेशन के बाद पाया है कि उनकी दिमागी अल्फा वेव्स काफी बढ़ गई। यही नहीं जो रोगी स्ट्रोल के चलते लकवाग्रस्त हुए थे उन्हें भी योग से काफी लाभ मिला। उनका बैलेंस बढ़ गया और उनकी स्पीच और शरीर पर कंट्रोल में भी बढ़ोत्तरी देखी गई।

पेट के रोगों में भी लाभकारी
आज की भागम-भाग वाली दिनचर्या में पेट के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ये समस्या हर देश को परेशान कर रहा है। एम्स के रिसर्च में पाया गया है कि पेट से जुड़े कुछ खास आसन को अपनाने से मरीजों को काफी राहत मिलती है।

कुछ प्राणायाम और एम्स के अनुसार उसके लाभ-

अनुलोम-विलोम
सांस की ये बेहद खास तकनीक को काफी लाभकारी पाया गया है। ये हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है। रिसर्च में पाया गया है कि दाहिने नथुने से सांस लेने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। जबकि बाएं नथुने से सांस लने से दिमाग सक्रिय होता है। अनुलोम-विलोम से ब्लड प्रेशर में भी गिरावट आती है।

धीमी भस्त्रिका
धीरे-धीरे भस्त्रिका करने वालों की स्ट्रेस में काफी कमी देखी गई है।

कपालभाति
लैब में पाया गया कि तेजी से सांस लेने और छोड़ने से दिमाग तेजी से सक्रिय होता है, जो शरीर को भी सक्रिय कर देता है।

शीतली
मुंह और नाक के माध्यम से की जाने वाली इस क्रिया को लैब में परखा गया और पाया गया कि इससे सांस से संबंधित रोग दूर होते हैं।

योग कई और रोगों का निदान कर सकता है-

माइग्रेन का उपचार
माइग्रेन नाड़ीतंत्र की विकृति से उत्पन्न रोग है जिसमें बार- बार सिर के आधे भाग में मध्यम से बहुत अधिक तेज सिरदर्द होता है| पाया गया है कि योग इस समस्या का जड़ से निदान करने में सक्षम है।

हाइपरटेंशन से छुटकारा
हाईब्‍लड प्रेशर कई बीमारियों की जड़ है। कई अध्ययनों के बाद साबित हुआ है कि योग और मेडिटेशन उक्त रक्तचाप को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम है। अगर आप योग से हाईब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर लें तो ढेर सारी बीमारियां यूं ही दूर हो सकती हैं। एम्स में पाया गया है कि धीमी स्पीड से किया जाने वाला प्राणायाम हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए काफी लाभकारी है। वहीं धीमी सांस लेने से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में भी काफी कंट्रोल देखा गया है।

पीठ दर्द में असरदार
आजकल की जिंदगी में लोग पीठ दर्द की अक्सर शिकायत करते देखे जाते हैं। खासकर लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करने वालों में इसकी दिक्कत अधिक देखी जाती है। आसन-प्राणायाम से इसमें राहत मिलती देखी गई है। जो भी आसन पीठ से संबंधित है उसके निरंतर अभ्यास से काफी फायद मिल सकता है।

गठिया में राहत
गठिया या जोड़ों के दर्द का कोई भी उपचार करा लो, अधिकतर मरीज इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा नहीं पाते हैं। लेकिन अगर संबंधित जोड़ों से जुड़े आसन किए जाएं, तो गंभीर से गंभीर दर्द से भी राहत मिल सकती है और लोग आसानी से चलने-फिरने लायक बना रह सकता है।

वैसे एम्स के डॉक्टर योग को लेकर कैंसर और हृदय रोगों पर भी प्रयोगों में जुटे हैं। अबतक उनका जो अनुभव रहा है वो बहुत ही उत्साहवर्धक है। इस समय एम्स के 20 विभागों में योग पर अलग-अलग रिसर्च चल रहा है और आने वाले दिनों में कुछ और चौंकाने वाले परिणाम आने की उम्मीद है। एम्स के डॉक्टरों का मानना है कि योग से दवाइयों की आवश्यकता पूरी तरह खत्म नहीं भी हो तो भी, उसकी जरूरत काफी कम हो सकती है। साथ ही मरीजों की रिकवरी की गति में चौंकाने वाली वृद्धि हो सकती है।

LEAVE A REPLY