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योग दिवस विशेष: सियाचिन ग्लेशियर में माइनस 25 डिग्री तापमान में दिखता है शानदार नजारा

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एक कौतुहल का विषय होता है कि 18 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई और -25 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे के तापमान में सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय जवान खुद को फिट कैसे रख पाते हैं? इसके जवाब में दो पहलू खास तौर पर उभरकर हमारे सामने आते हैं। एक है इतनी अधिक ऊंचाई पर जवानों के लिए कई तरह के विशेष सुरक्षा इंतजाम और दूसरा है योग का बड़ा योगदान।

देह जमाने वाली सर्दी में योग दिवस पर शानदार रंग
नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय जवानों के लिए योग कैसे दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है इसका पता चलता है 2015 के पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से यहां होने वाले योगाभ्यास की तस्वीरों से। ये वो जवान हैं जो हर हमेशा मौत के मुंह में खड़े होकर दुश्मनों से भारत माता की रक्षा करते हैं। योग दिवस पर हर साल इनकी जिस तरह की प्रेरक तस्वीरें सामने आती रही हैं उनसे इस बार भी इनके कार्यक्रम को लेकर गहरी दिलचस्पी पैदा हो गई है।  

योग ऊंचाई पर होने वाली दिक्कतें दूर करने में कारगर
सियाचिन को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। ऐसे में जवानों के लिए यहां सबसे बड़ी चुनौती भी खुद को फिट रखने की हो जाती है। योग उनके बड़े काम आता है क्योंकि इससे स्वास्थ्य संबंधी उनकी कई मुश्किलों का समाधान हो जाता है। इतनी अधिक ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन मिलने की समस्या से प्राणायाम के जरिए निपटा जा सकता है। वहीं फेफड़े की समस्या, मानसिक तनाव और थकान जैसी दिक्कतें दूर रखने में भी योग अत्यंत कारगर है।

पराक्रम के लिए फिट रखता है योग
सियाचिन ग्लेशियर के साथ ही लेह, करगिल और दूसरी सीमाओं पर भी सेना के जवान अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाते आ रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे पराक्रम को अंजाम देना और और दुर्गम परिस्थितियों में भी जांबाजी का प्रदर्शन करना भारतीय सैनिकों की पहचान रही है। दुनिया को इससे हमारे जवानों की फिटनेस का पता चलता है। जाहिर है, देश के लिए समर्पित जवान फिटनेस के लिए योग के महत्त्व का संदेश सीधे तौर पर दे जाते हैं।  

जब प्रधानमंत्री मोदी बर्फीली ऊंचाइयों पर पहुंचे थे
देश का नेतृत्व संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पहली दिवाली सियाचिन ग्लेशियर में जवानों के साथ मनाई थी। वहां उन्होंने कहा था: ‘’जब तक कोई इन बर्फीले ग्लेशियर को नहीं देखेगा कि माइनस 30-40 डिग्री में यहां जवान कैसे तैनात होता है, तो वो कल्पना भी नहीं कर सकता कि हमारी फौज, हमारे जवान कितनी कठिनाइयों के बीच, कितने दुर्गम क्षेत्रों में मातृभूमि की रक्षा के लिए पुरुषार्थ कर रहे हैं।‘’
गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री ने सियाचिन की बर्फीली पहाड़ियों पर बिना किसी विशेष तैयारी के पहुंचकर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने बताया था कि योग ही उन्हें वह शक्ति देता है जिसके चलत वो ऐसा कर पाए।

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