Home झूठ का पर्दाफाश पीएम मोदी की नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दुनिया का भरोसा

पीएम मोदी की नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दुनिया का भरोसा

भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसे का सवाल उठाने वालों को आईना दिखाती रिपोर्ट

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आप छोटी पूंजी से कारोबार शुरू करना चाहते हैं। आप बड़े उद्योगपति हैं। जिस सेक्टर में चाहें उसमें पूंजी निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कृषि, रसायन, रक्षा, डेयरी, शिक्षा, सेवा या फिर कोई अन्य क्षेत्र, भारत सरकार की नीतियों ने देश-दुनिया के बिजनेसमैन की राह आसान कर दी है। पीएम मोदी ने विविधता से भरे देश में जीएसटी जैसे कानून लागू करवाकर देश में कारोबारी माहौल को और भी मजबूती प्रदान की है। केंद्र सरकार की नीतियों से देश-दुनिया के व्यापारियों को भारत में अपार संभावनाएं नजर आ रहीं हैं। लेकिन कुछ ऐसे संगठन भी हैं जो भारत को बिजनेस के लिहाज से भरोसेमंद देश नहीं मानते हैं। इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन यानि ICA ने भारत में कारोबारी माहौल की आलोचना की है और प्रक्रियाओं को बोझिल बताते हुए भारत को कारोबार के लिए सबसे खराब देश करार दे दिया। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा ही है, या फिर सच कुछ और है?

तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था में भारत चौथे नंबर पर- विश्व बैंक
10 जुलाई 2017 को जारी विश्व बैंक की सूची के अनुसार, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाली सूची में भारत का स्थान चौथा है। विश्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि साल 2017 में भारत की जीडीपी 7.2 प्रतिशत रहेगी। इसका सबसे बड़ा कारण, नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद स्टैंडअप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसे प्रोजेक्ट के कारण देश के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश को माना जा रहा है।

हार्वर्ड विवि ने माना भारतीय अर्थव्यवस्था का लोहा
09 जुलाई 2011 को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने भी एक अध्ययन के बाद कहा है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है। आने वाले दशक में उम्मीद है कि भारत नेतृत्व को जारी रखेगा। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (सीआईडी) के अनुसार विभिन्न कारणों के चलते, भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। हार्वर्ड के अनुसार भारत में अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की गति औसत 7.7 प्रतिशत की वार्षिक रहेगी।

विकास की धुरी बना रहेगा भारत-CID
CID यानि सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है। भारत ने अपने एक्सपोर्ट के आधार का विस्तार किया है और कई जटिल क्षेत्रों जैसे रसायन, वाहन और कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को इसमें शामिल किया है।

नयी क्षमताओं के विकास से बढ़ी रफ्तार
CID के रिसर्च में कहा गया है कि तेल पर निर्भर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट हो रही है क्योंकि ये एक ही संसाधन पर निर्भर हैं। भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने विविधता के लिए अपनी नयी क्षमताओं को विकसित किया है और कई तरह के उत्पादन की वजह से आने वाले वर्षों में उनका विकास तेजी से होने की संभावना है। जीएसटी लागू होने के बाद प्रक्रियागत खामियों को दूर करने में सहायता मिलेगी और भारत पर दुनिया का भरोसा और बढ़ेगा। 

चीन से ज्यादा तेज गति से बढ़ रही भारत की इकोनॉमी
2015 में जहां चीन की विकास दर 6.9 थी, जबकि भारत की 7.2 थी। 2016 में यह आंकड़ा चीन के लिए 6.7 प्रतिशत था जबकि भारत ने इस दौरान 7.6 प्रतिशत की रफ्तार से वृद्धि की। वहीं इस वर्ष भारत ने 7.1 प्रतिशत की दर से विकास किया है जबकि चीन का आंकड़ा आना अभी बाकी है। लेकिन चीन ने 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान जताया है। जाहिर भारत जहां पिछले तीन सालों में सात प्रतिशत से ज्यादा की गति से वृद्धि कर रहा है वहीं चीन की विकास दर अभी भी सात से कम है।

भारत की अर्थव्यवस्था में दुनिया का भरोसा बढ़ा
वित्त वर्ष 2016-17 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दौरान (एफडीआई) में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये बढ़कर अब 60.08 अरब डॉलर की नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। दरअसल एफडीआई नीति में बदलाव तथा विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा मंजूरी की सीमा में वृद्धि और देश में ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति को बढ़ावा देने से एफडीआई में बढ़ोतरी हुई है। एफडीआई इक्विटी प्रवाह वित्त वर्ष 2016-17 में 43.48 अरब डॉलर रहा, जो किसी एक वित्त वर्ष में यह सर्वाधिक है।

विदेशी निवेश के मामले में चीन से आगे भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया भर में बढ़ते प्रभाव से भारत विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। दुनिया भर की तमाम बड़ी कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही है। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद मेक इन इंडिया कार्यक्रम के चलते डिफेंस, फार्मा, ऑटो से लेकर मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां भारत आ रही है। मेक इन इंडिया, ईज ऑफ डुईंग बिजनेस के बाद जीएसटी से आकर्षित होकर निवेशक भारत आ रहे हैं। विदेशी निवेश के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। 2015 में जहां भारत को 63 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मिला था वहीं चीन को मात्र 56 बिलियन डॉलर मिला।

चीन ने भी माना मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा भारत
पिछले तीन साल में भारत ने विदेशी निवेश और मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अब तो चीन ने भी मान लिया है कि उसे पछाड़ कर भारत मैन्यूफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने पिछले महीने (जुलाई) में लिखा कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है और कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है।

मूडीज का अनुमान, देश में तेज रहेगी जीडीपी ग्रोथ
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने 30 मई को जारी अपनी ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का नकारात्मक असर अल्पकालिक था। मूडीज के मुताबिक अगले तीन से चार सालों में भारत के अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ प्रतिशत हो जाएगी। मूडीज के अनुमान में वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2018-19 में 7.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी। मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी।

इंग्लैंड से बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
पीएम मोदी की विकास नीतियों के कारण आर्थिक तरक्की के मामले में भारत ने इंग्लैंड को पछाड़ दिया है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। 17 दिसंबर 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सौ साल में पहली बार ऐसा है कि कभी दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाला ब्रिटेन उपनिवेश रहे भारत से पीछे हो गया है। हालांकि 2011 में विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई थी कि भारत अर्थव्यवस्था के मामले में 2020 तक इंग्लैंड को पीछे छोड़ देगा लेकिन भारत ने उससे काफी पहले ही इंग्लैंड को पछाड़ दिया।

मोदी और आईएमएफ के लिए चित्र परिणाम

IMF ने कहा अर्थव्यवस्था में आएगी तेजी
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की विकास दर में 2017-2018 तक तेजी आने की उम्मीद जताई है। आईएमएफ ने 2018 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.8 फीसदी की दर से विकास करने का अनुमान व्यक्त किया है, जो मौजूदा आर्थिक गतिविधियों की तुलना में कहीं अधिक है। आईएमएफ ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की विकास दर में 2017 और 2018 तक तेजी आने की उम्मीद है, जो अप्रैल, 2017 में जताए गए अनुमान के अनुकूल है।

दुनिया देख रही भारतीय शेयर बाजार का दम
बीते छह हफ्ते से भारतीय शेयर बाजार में लगातार उछाल है। 13 जुलाई को पहली बार सेंसेक्स 32,000 का आंकड़ा भी पार गया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साहसिक और त्वरित फैसले लेने, उसे लागू करने के लिए आगे बढ़कर काम करने की कार्यशैली से भारतीय अर्थव्यवस्था में दिन-ब-दिन सुधार हो रहा है। मोदी सरकार के तीसरी वर्षगांठ पर जब केंद्र सरकार ने तीन साल का लेखा-जोखा 26 मई, 2017 को जारी किया। तब शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक पहली बार 31,000 के आंकड़े को पार किया था। तब सेंसेक्स का यह उछाल ऐतिहासिक था।

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चीन के असर से बोल रहे पंकज महिंद्रू
आईसीए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महिंद्रू ने IAMAI के सेमिनार में बोलते हुए ने भारत में कारोबार सुगमता को लेकर भारत में भरोसा पर सवाल उठाया था। लेकिन अब आपको जरूर लग गया होगा कि पंकज महिंद्रू चीन की भाषा बोल रहे हैं। दरअसल भारत के मोबाइल कारोबार में चीन का हिस्सा पचास प्रतिशत से ज्यादा है और पंकज महिंद्रू इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। ऐसा लगता है कि पंकज महिंद्रू भारत के भरोसे को कम और चीनी निवेश को ज्यादा देखते हुए बात कह रहे हैं।

भारत में रोजगार के अवसर के लिए चित्र परिणाम

भारत में बेहतर हैं रोजगार के परिदृश्य
एशिया प्रशांत क्षेत्र में रोजगार को लेकर भारत का परिदृश्य सबसे बेहतर है। करीब 84 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों का मानना है कि देश में बेहतर आर्थिक परिदृश्य की संभावानाएं दिख रही हैं। माइकल पेज रोजगार आवेदक विश्वास सूचकांक, 2017 के अनुसार भारतीय पेशेवरों में से अधिकांश ने अगले छह महीने के दौरान अपनी नौकरियों और आर्थिक स्थिति को सकारात्मक माना है। उन्होंने इसे अच्छा से लेकर काफी शानदार बताया है। भारत में जहां 84 प्रतिशत पेशेवरों को देश के आर्थिक परिदृश्य के प्रति भरोसा है वहीं एशिया प्रशांत में ऐसा मानने वाले पेशेवरों की संख्या 66 प्रतिशत है।

देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिली
दरअसल तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश की बागडोर संभाली थी, देश एक के बाद एक घोटालों के चलते त्राहिमाम कर रहा था। अर्थव्यवस्था दम तोड़ चुकी थी। लेकिन मात्र तीन साल में देश की इकोनॉमी रफ्तार पकड़ चुकी है और सरकार के खजाने भरे हुए हैं। अर्थव्यवस्था पर नजदीकी नजर रखने वाले दुनियाभर के विशेषज्ञ भी हैरानी जताते हैं कि आखिर मोदी सरकार ने ऐसा चमत्कार कर दिया। लेकिन सच्चाई ये है कि ये सब संभव हुआ है मोदी सरकार की कड़ी मेहनत और लगन से और सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री मोदी की दूर-दृष्टि और भारत माता के प्रति उनके समर्पण भाव से।

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