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मोदी राज में बेहतर ग्रामीण सड़कों से बढ़े रोजगार के अवसर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विशेष जोर रहता है। मोदी सरकार देश के हर गांव में सड़क, बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम कर रही है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत इस साल के अंत तक हर गांव को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य है और इस दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। अब विश्व बैंक ने भी कहा है कि भारत के गांवों में बेहतर सड़कों से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। बेहतर सड़क से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को सौंपे गए विश्व बैंक की रिपोर्ट में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनी सड़कों से हुए बदलाव का मूल्यांकन किया गया। रिपोर्ट में मध्यप्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में 2009 के बाद से हुए बदलावों का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार बेहतर सड़क के कारण ना सिर्फ रोजगार बल्कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन में भी बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना योजना के तहत अब तक राज्यों में 6 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जा चुका है।

मोदी सरकार के पांच साल में किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर एक नजर – 

2019 तक हर गांव को रोड कनेक्टिविटी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देश के हर गांव को 2019 तक रोड कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस योजना की रफ्तार का पता इसी से चलता है कि 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी 56 प्रतिशत थी, आज वो बढ़कर 82 प्रतिशत तक जा पहुंची है। शहरों और सड़कों की कनेक्टिविटी से गांवों तक आर्थिक और सामाजिक सेवाएं पहुंचे और रोजगार के लिए नए अवसर तैयार हो सके, इस योजना में सबसे बड़ा प्रयास यही रहा है। रोड कनेक्टिविटी गरीबी कम करने में भी मददगार होगी। 

20 हजार गांवों में बिछेगा सड़कों का जाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए कार्य कर रही है। मोदी सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब गांवों का विकास होगा तभी देश का विकास होगा। किसी भी क्षेत्र के विकास में सड़क, संपर्क मार्ग, यातायात के साधन अहम भूमिका निभाते हैं। इसीलिए मोदी सरकार का जोर देश के एक-एक गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने का है। पिछले चार वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत रिकॉर्ड स्तर पर सड़कें बनाई गई हैं। अब मोदी सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में देश के 20,000 गांवों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 61 हजार किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें बनाई जाएंगी। सबसे अहम बात यह है कि इनमें से कुल 12 हजार किलोमीटर सड़कें ग्रीन टेक्नोलॉजी से निर्मित की जाएंगी।

नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सड़क निर्माण
मोदी सरकार का मानना है कि विकास के जरिए ही हिंसा और नक्सलवाद की समस्या को खत्म किया जा सकता है। इसके लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण पर सरकार का खास ध्यान है। देश में कई राज्यों में नक्सल प्रभावित ऐसे इलाकों में सड़कें बनाई जा रही हैं, जहां अभी तक किसी के जाने की हिम्मत तक नहीं होती थी। चालू वित्त वर्ष में नक्सल प्रभावित इलाकों में कुल 268 सड़कों के लिए 4134 किमी लंबाई की सड़कों के बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके लिए 4142 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। ये सड़कें बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिसा और मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में  बनाई जाएंगी।

राजमार्ग निर्माण में तेज रफ्तार से काम कर रही है मोदी सरकार
मोदी राज में भारत राजमार्ग निर्माण में सबसे तेज गति से विकास वाला देश बन गया है। मोदी राज में देश में प्रतिदिन 30 किलोमीटर लंबे राजमार्गों का निर्माण हो रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 में राजमार्गों का निर्माण और विस्तार 10,800 किमी तक पहुंच गया। यह यूपीए शासन के दौरान 2013-14 की तुलना में ढाई गुना अधिक है। यूपीए-2 शासन के दौरान 2012-13 में सबसे अधिक राजमार्गों का निर्माण और विस्तार का काम हुआ। इस दौरान 5,732 किमी राजमार्गों का निर्माण और विस्तार किया गया था। जबकि 2018-19 में 30 किमी प्रतिदिन की दर से 10,800 किमी राजमार्गों का निर्माण और विस्तार किया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यूपीए- 2 के पांच वर्षों के दौरान कुल 24,690 किमी का निर्माण या चौड़ीकरण किया गया था, जबकि मोदी राज में कुल निर्माण 39,350 किमी को छू गया, जो लगभग 70% की वृद्धि है।

3 हजार किमी एक्सप्रेसवे, 4 हजार किमी ग्रीनफील्ड हाइवे बनाने का प्रस्ताव
मोदी सरकार ने भारतमाला प्रॉजेक्ट के दूसरे चरण के तहत एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरे चरण में सरकार ने कुल तीन हजार किलोमीटर एक्सप्रेस-वे और चार हजार किलोमीटर ग्रीनफील्ड हाइवे बनाने का लक्ष्य तय किया है। नई योजना के तहत वाराणसी-रांची-कोलकाता, इंदौर-मुंबई, बेंगलुरु-पुणे और चेन्नै-त्रिचि के बीच एक्सप्रेस-वे बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही ग्रीनफील्ड हाइवे योजना के तहत पटना से राउरकेला, झांसी से रायपुर, सोलापुर से बेलगाम, गोरखपुर से बरेली और वाराणसी से गोरखपुर के बीच नए राजमार्ग बनाए जाएंगे। इन सड़कों के निर्माण के लिए 2024 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।

भारत-चीन सीमा पर 44 सड़कें बनवाएगी मोदी सरकार
सरकार चीन से लगती सीमा पर 44 सामरिक सड़कों का निर्माण करेगी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एजेंसी को भारत-चीन सीमा पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 44 सड़कों के निर्माण के लिए कहा गया है। इससे टकराव की स्थिति में भारतीय सेना का सीमाओं पर पहुंचना आसान हो जाए।’ भारत और चीन के बीच करीब 4,000 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के इलाकों से गुजरती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 44 सड़कों को बनाने में करीब 21 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। ये सड़कें पांच राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में बनेंगी।

भारत-पाक सीमा पर भी बनेंगी 2100 किलोमीटर लंबी सड़कें
इसके अलावा, सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किलोमीटर लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण करेगी। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी। सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान और पंजाब में 5,400 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। राजस्थान में 945 किलोमीटर मुख्य और 533 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे। जबकि पंजाब में 482 किलोमीटर मुख्य और 219 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे।

पूर्वोत्तर की लाइफलाइन बोगीबील पुल राष्ट्र को समर्पित
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 दिसंबर, 2018 को वाजपेयी जी के जन्मदिन पर असम में बोगीबील पुल को राष्ट्र को समर्पित किया। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह देश का सबसे लंबा रेल सह सड़क पुल है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में इसका शिलान्यास किया था। इस पुल को वैसे तो 6 साल में बनकर तैयार होना था लेकिन इसे पूरा होने में 16 साल का लंबा वक्त लग गया। यूपीए सरकार के दौरान पुल का काम एक तरह से रुका रहा और 12 साल में सिर्फ 58% काम किया पूरा किया गया। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आने के बाद ब्रिज का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू हुआ और 2018 में बनकर तैयार हो गया। बोगीबील रेल-रोड पुल असम समेत पूर्वोत्तर में विकास के नए रास्ते खोल रहा है। असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर बनाया गया यह पुल असम के धीमाजी जिले को डिब्रूगढ़ से जोड़ता है। पुल के निर्माण में 5920 करोड़ रुपए की लागत आई।

धुआंधार गति से सड़कें और हाईवे निर्माण
अच्छी सड़कें अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण होती हैं। मोदी सरकार का सड़कों और हाईवे के निर्माण पर शुरू से जोर रहा है। यह इससे पता चलता है कि 2013-14 में यूपीए सरकार के सड़कों के निर्माण का बजट जहां 32,483 करोड़ रुपये था वो 2017-18 में मोदी सरकार में बढ़कर 1,16,324 करोड़ रुपये हो गया। 2013-14 में नेशनल हाईवे 92,851 किलोमीटर तक विस्तारित था जो 2017-18 में 1,20,543 किलोमीटर तक पहुंच गया। 2013-14 में कंस्ट्रक्शन की स्पीड 12 किलोमीटर प्रतिदिन थी जो 2017-18 में बढ़कर 27 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई। 2018-19 में यह 30 किलोमीटर प्रतिदिन पर पहुंच गई है। इसके साथ ही 2,000 किलोमीटर के कोस्टल कनेक्टिविटी रोड की भी पहचान की गई है जिसका निर्माण और विकास किया जाना है।

सबसे लंबी सड़क सुरंग और पुल राष्ट्र को समर्पित
पिछले वर्ष सड़क पर देश की सबसे लंबी सुरंग चेनानी-नाशरी सुरंग राष्ट्र को समर्पित किया गया। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल को भी जनता को समर्पित किया गया। 9.15 किलोमीटर लंबे ढोला-सादिया पुल (भूपेन हजारिका पुल) ने ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से के बीच चौबीस घंटे की कनेक्टिविटी को सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही भरुच में नर्मदा के ऊपर और कोटा में चंबल के ऊपर बने पुल भी जनता को समर्पित किए जा चुके हैं।

भारतमाला परियोजना फेज-1  
भारतमाला परियोजना के तहत देश के पश्चिम से लेकर पूर्व तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सड़कों का जाल बिछाने की योजना है। इसके लिए नेशनल हाईवे के 53,000 किलोमीटर के हिस्से की पहचान की गई है जिसके फेज-1 में 2017-18 से 2021-22 तक 24,800 किलोमीटर के काम को पूरा किया जाएगा। इसके दायरे में नेशनल कॉरिडोर के 5,000 किलोमीटर, इकोनॉमिक कॉरिडोर के 9,000 किलोमीटर, फीडर कॉरिडोर और इंटर-कॉरिडोर के 6,000 किलोमीटर, सीमावर्ती सड़कों के 2,000 किलोमीटर, 2,000 किलोमीटर कोस्टल और पोर्ट कनेक्टिविटी रोड और 800 किलोमीटर के ग्रीन-फील्ड एक्सप्रेसवे आते हैं। फेज-1 पर लगभग 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि फेज-1 के इस पूरे कार्य के दौरान रोजगार के करीब 35 करोड़ श्रमदिवसों का सृजन होगा।

सेतु भारतम से सड़क पर सुरक्षा
मार्च 2016 में लॉन्च की गई इस योजना का मकसद है सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना। इसके तहत 2019 तक सभी नेशनल हाईवे को रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास बनाकर रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त करना है। 1500 पुराने और जीर्णशीर्ण पुलों को नए सिरे से मजबूती के साथ ढालना है और चौड़ा करना है। 20,800 करोड़ की लागत से 208 रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण किया जाना है।

चारधाम महामार्ग विकास परियोजना
27 दिसंबर 2016 को लॉन्च की गई इस परियोजना का मकसद है हिमालय में स्थित चारधाम तीर्थ केंद्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर करना। इससे तीर्थयात्रियों का सफर और अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगा। नेशनल हाईवे के करीब 900 किलोमीटर के हिस्से के आसपास होने वाले इस कार्य की अनुमानित लागत है करीब 12,000 करोड़ रुपये। मार्च 2020 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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