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विश्व बैंक ने भी नोटबंदी के फैसले पर लगायी मुहर, कहा- आएंगे अच्छे दिन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सबसे साहसिक और दूरदर्शी कदम पर विश्व की आला वित्तीय संस्थाओं की मुहर लगती जा रही है। जी हां, बात हो रही है नोटबंदी के फैसले की जिसको लेकर विपक्ष की ज्यादातर पार्टियों और नेताओं ने मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी। विश्व बैंक की रिपोर्ट से अब ये साफ हो गया है कि नोटबंदी से काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था पर चोट पड़ी है। यानी कालाधन से जुड़ी आतंकवाद, हवाला, भ्रष्टाचार और तस्करी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के जिस इरादे के साथ नोटबंदी का निर्णय लिया गया था, वो इरादे पूरे होने के मजबूत संकेत मिलने लगे हैं।

 

रंग ला रहा है नोटबंदी का कदम

विश्व बैंक के अनुसार 2017 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी जो 2016 में 6.8 प्रतिशत रही थी। विश्व बैंक ने जनवरी के अनुमान की तुलना में भारत की वृद्धि दर के आंकड़े को 0.4 प्रतिशत संशोधित किया है, वहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। विश्व बैंक के अधिकारियों के अनुसार चीन की वृद्धि दर के 2017 के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर ही कायम रखा गया है। इसके साथ ही चीन की वो खुशी छिन गई है जो 2016-17 की आखिरी तिमाही में भारत की विकास दर में आई गिरावट को लेकर छलकी थी। दुनिया भर में जारी कारोबारी मंदी के चलते ये गिरावट थी जिसे चीन नोटबंदी से जोड़कर भारत को नसीहत देने में लगा था।

टैक्स दायरे में आने वालों की संख्या में तेजी

‘इंडियाज ग्रेट करंसी एक्सचेंज’ नाम से लिखे चैप्टर में विश्व बैंक की ओर से टिप्पणी की गई:  ‘’2016-17 में भारत ने नोटबंदी और एमनेस्टी स्कीम के जरिए अघोषित आय को टैक्स के दायरे में लाने में सफलता हासिल की।’’ आने वाले समय के लिए विश्व बैंक की तरफ से जताई गई आर्थिक संभावनाओं को मानें तो नोटबंदी की सफलता राजस्व बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है क्योंकि इससे ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स के दायरे में आने लगे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि नोटबंदी के चलते सरकार अनियमित अर्थव्यवस्था में शामिल संसाधनों को नियमित अर्थव्यवस्था में शामिल कर उसे मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर

पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी के फैसले ने मोदी सरकार की उस इच्छाशक्ति की मजबूती को जाहिर किया कि अर्थव्यवस्था की साफ-सफाई के लिए वह बड़े और कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकेगी। देश में अर्थव्यवस्था के आकार को बढ़ाने के लिए कदम तो पहले भी उठाये जाते रहे हैं लेकिन नोटबंदी के साथ ऐसा पहली बार हुआ कि अर्थव्यवस्था की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिश भी दिखी। एक जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद 91 लाख नये करदाता सामने आये हैं जो पिछले साल के मुकाबले 80 प्रतिशत ज्यादा हैं।

देश के दुश्मनों पर नोटबंदी की मार

नोटबंदी के खिलाफ भ्रम फैलाने की तमाम कोशिश के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये विश्वास कायम रहा कि ये सख्त कदम देशवासियों के अच्छे दिनों के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी को ये भी भरोसा था कि नोटबंदी की असली मार काले धन के कुबेरों पर या फिर देश के दुश्मनों पर पड़ेगी और इसी दृढ़ विश्वास के साथ उठाये गए कदमों की सराहना करते हुए अब अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं के अनुमान भी सामने आ रहे हैं..जो भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे दिनों की तसदीक करते हैं।  

नई उड़ान पर होगी भारतीय अर्थव्यवस्था

सरकार को उम्मीद है कि अगले दो साल में सरकारी खजाने में लोगों से मिलने वाला टैक्स बढ़कर दो गुना हो जाएगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था एक नई उड़ान पर दिख सकती है। कुल मिलाकर अब ये साफ हो चुका है कि नोटबंदी से भारत की अर्थव्यवस्था को अच्छी खासी ताकत हासिल होने जा रही है।

घेरे में आने लगे काले धन के कुबेर

1000 और 500 के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद से अब तक करीब 4.6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी पकड़ी जा चुकी है। अप्रैल 2017 तक ऑपरेशन क्लीन के तहत 60,000 लोग आयकर विभाग के रडार पर हैं। ये वो लोग हैं जिनकी बिक्री या मुनाफे में नोटबंदी के बाद अचानक कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

बेनामी संपत्ति के खिलाफ अभियान भी होगा कारगर

नोटबंदी और सरकार के भ्रष्टाचार निरोधी प्रयासों से अब तक करीब 9.5 हजार करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा भी हुआ है। आने वाले दिनों में बेनामी संपत्तियों के खिलाफ मुहिम से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलने वाला है।

 

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