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पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का खून बहाना गुनाह नहीं, ‘ममता मॉडल पॉलिटिक्स’ है!

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भद्रजनों का प्रदेश कहा जाने वाला पश्चिम बंगाल दंगों की आग में जल रहा है। गाड़ियों में भर-भर कर दंगाई जाने कहां से आ रहे हैं और बंगाल बिहार से लगती सीमा पर बसे आसनसोल को आग के हवाले कर रहे हैं। चुन-चुन कर हिंदुओं की बस्तियां जलाई जा रही हैं और घरों में घुसकर महिलाओं से अभद्रता की जा रही है। प्रदेश के करीब आधा दर्जन जिलों में दंगाई तांडव किए जा रहे हैं। गोलियां और बम धमाकों के बीच डर से हिंदुओं का पलायन हो रहा है और हजारों हिंदू अपना घर-बार छोड़ कर भागने को मजबूर हो गए हैं। जी हां, ये पश्चिम बंगाल है और ये सेक्युलरिज्म का ममता मॉडल है।

हिंदुओं की धार्मिक आजादी पर बैन मॉडल
बंगाल में एक हिंदू त्योहार बिना हिंसा, बिना दंगा, बिना हमले के नहीं मना सकते। सरस्वती पूजा, होली,  दीपावली,  रामनवमी, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी हो या फिर बंगाल के ही परंपरागत पर्व ही क्यों न हो… ममता राज में इन पर्वों पर एक तरह से अघोषित बैन है। हिंदुओं को पूजा-पाठ तक के लिए कोर्ट के दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं वहीं अपनी परंपरा को निभाने में सरकारी डंडे खाने पड़ते हैं।

मुसलमानों को दामाद बनाने का मॉडल
हिंदुओं को अपनी ही धरती पर ही अपने धार्मिक रीति रिवाजों के लिए प्रशासन से परमिशन की जरूरत है, वहीं मुसलमानों को पश्चिम बंगाल में दामाद बनाकर रखा गया है। उनकी धार्मिक ‘आजादी’ पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं है चाहे वह खुलेआम हथियारों का भी प्रदर्शन क्यों न करें। आलम यह है कि हिंदुओं के मंदिर बोर्ड का चेयरमैन तक मुसलमानों को बनाया जा रहा है। मुसलमान लगातार हिंसा कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन भी उनके साथ खड़ा है।

प्रत्येक आठ दिन में एक दंगा मॉडल         
आंकड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में हर आठ दिन में एक दंगा होता है। राज्य के सीमावर्ती इलाकों में जहां हिंदू आबादी कम हो गई है उन्हें हर रोज निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन ममता सरकार ने जैसे हिंदुओं से मुंह मोड़ लिया है।  बेगुनाहों पर हमले हो रहे हैं, लोगों के घर जलाए जा रहे हैं, हजारों लोग बेघर हो गए हैं लेकिन क्या मजाल कि कोई ममता के सेक्युलरिज्म पर सवाल उठा सके।

तथाकथित सेक्युलर मीडिया का ‘मौन’ मॉडल
पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर दंगे हुए हैं। यहां तक कि मस्जिद से बम फेंक कर एक पुलिस अधिकारी का हाथ तक उड़ा दिया गया है। हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा जा रहा है और उनके घर लूटे जा रहे हैं, लेकिन मीडिया मौन है। किसी बीजेपी शासित राज्य में इस तरह के दंगे हुए होते तो अब तक मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गया होता। विडंबना देखिए कि पश्चिम बंगाल में हो रहे दंगों पर देश का तथाकथित सेक्युलर जमात भी सोया हुआ है।

बंगाल से हिंदुओं को भगाओ मॉडल
ये जानकर किसी को भी हैरत होगी कि राज्य के करीब 38 हजार गांवों में से 8000 ऐसे गांव हैं जहां एक भी हिंदू नहीं रहता। दरअसल बंगलादेश से आए घुसपैठिए प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के मुसलमानों से हाथ मिलाकर गांवों से हिन्दुओं को भगा रहे हैं और हिन्दू डर के मारे अपना घर-बार छोड़कर शहरों में आकर बस रहे हैं।

बंगाल में आबादी संतुलन बिगाड़ो मॉडल
पश्चिम बंगाल में 1951 की जनसंख्या के हिसाब से 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में भारी कमी आई है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की हिन्दू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिन्दुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय स्तर से दुगनी दर से बढ़ी है।

जिला-दर-जिला कब्जा करो मॉडल
पश्चिम बंगाल के तीन जिले ऐसे हैं जहां पर मुस्लिमों की जनसंख्या बहुमत में हैं। मुर्शिदाबाद 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू, और उत्तरी दिनाजपुर 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू हैं। इन जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण चंद हजार की संख्या वाले मुस्लिम अब लाखों में ही नहीं, बल्कि बहुमत में हैं।

वंदे मातरम पर प्रतिबंध का ममता मॉडल
बंकिंम चंद्र चटर्जी ने वन्दे मातरम गीत लिखा तो उन्हें कभी यह अंदेशा नहीं रहा होगा कि उनके ही प्रदेश में इसपर पाबंदी लग जाएगी। लेकिन यह हमारा दावा है कि आप बंगाल के बहुतेरे इलाकों में वंदे मातरम गुनगुना भी देंगे तो आपका सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा। ये ममता का सेक्युरिज्म का मॉडल है जहां आप अपना राष्ट्र गीत तक नहीं गा सकते हैं।

क्या बंगाल मॉडल आप पूरे देश में चाहते हैं?
ममता मॉडल को इस तरह से भी समझिये…  हिंसा करने वाला एक शख्स गिरफ्तार नहीं होता, एक भी दंगाई जेल में नहीं डाला जाता, पुलिस के संरक्षण में हिंदुओं के घर जलाए जाते हैं, महिलाओं से अभद्रता की जाती है। एक ओर ममता बनर्जी सेक्यूलरवाद के नाम पर प्रधानमंत्री बनने का सपना बुन रही हैं। उनका कहना है की सभी मिलकर देश से मोदी को हटा दो और वही मॉडल स्थापित करो पूरे देश में लागू करेंगे। दूसरी ओर बंगाल में हिंदुओं पर हमले को जायज ठहराने से नहीं चूकतीं हैं। 

बहरहाल हमरा सवाल यह है कि क्या आपको यह सोचकर चुप रहना चाहिए कि आग तो पड़ोसी के घर लगी है? क्या इस कृत्य के लिए इतिहास आपको माफ करेगा? क्या आप बंगाल का मॉडल हिमाचल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और  छत्तीसगढ़ में चाहते हैं?  जाहिर है सोचना तो आपको ही पड़ेगा कि क्या ये बंगाल वाला मॉडल पूरे देश के लिए चाहिए?

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