Home नरेंद्र मोदी विशेष जलमार्ग के जरिए खुल रहे हैं विकास के महाद्वार

जलमार्ग के जरिए खुल रहे हैं विकास के महाद्वार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के हर इलाके के विकास के लिए कितनी बारीकी से योजना बनाते हैं, वो जलमार्ग विकास की योजनाओं से साफ हो जाता है। अब तो ये योजना धरातल पर उतरना भी शुरु हो गई है। मोदी सरकार देश में 111 जलमार्गों के विकास में जुटी हुई है। आजादी के बाद पहली बार गंगा के जरिए हल्दिया (प.बंगाल)-प्रयागराज (यूपी) जलमार्ग शुरू हो गया है। इस मार्ग पर 2000 टन के जहाजों का आवागमन संभव है। अब डाबर इंडिया ने भी अपने प्रोडक्ट और कच्चे माल की ढुलाई के लिए जलमार्ग को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। कंपनी का दावा है कि वह अंतर्देशीय जलमार्ग से वाणिज्यिक माल भेजने वाली पहली एफएमजीसी कंपनी है। डाबर इंडिया के मुताबिक वाराणसी में पोत पर चढ़ाए गए उसके कंटेनर में फलों के रस से तैयार पेय पदार्थ भरे हैं। इससे न सिर्फ लागत में कमी आयेगी बल्कि माल भी जल्दी पहुंचेगा।  

पीएम मोदी ने 12 नवंबर को वाराणसी में देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया था। हालांकि जब चार साल पहले पीएम मोदी ने देश में जलमार्गों के विकास का विजन दिया था तो कई लोगों ने इसके लिए उनका मजाक भी उड़ाया था। मल्टी मॉडल टर्मिनल  की शुरुआत करने के मौके पर कहा  कि ” काशीवासी साक्षी हैं कि चार साल पहले जब मैंने बनारस और हल्दिया को जल मार्ग से कनेक्ट करने का विचार रखा था, तो किस तरह से इसका मजाक उड़ाया गया था।” लेकिन अपनी लगन के पक्के पीएम मोदी ने चार साल बाद जलमार्ग के जरिए हल्दिया से वाराणसी आए मालवाहक जहाज का स्वागत किया।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब गंगा मैया के बुलावे पर वाराणसी से लोकसभा चुनाव का बिगुल बजाया था, उन्होंने तभी जान लिया था कि बिना जलमार्गों के विकास के न तो वाराणसी के विकास की रुकी गाड़ी को जोरशोर से दौड़ाया जा सकता है और न पूर्वांचल की। इसलिए उन्होंने ये सपना देखा कि पूर्वांचल की बड़ी नदियों, गंगा, यमुना, कोसी, सरयू, गंडक जैसी नदियों में विशाल जहाज चलें।

दरअसल अंग्रेजों के आने से पहले भारत का ज्यादातर कारोबार नदियों के जरिए होता था। नदियों के रास्ते से ही पूर्वांचल का माल दुनियाभर में जाता था। इसी की बदौलत भारत सोने की चिड़िया बना था। अंग्रेज इस समृद्धि का राज भांप गए थे, इसलिए उन्होंने भारत के प्राचीन जलमार्गों को तबाह कर दिया औऱ ट्रेन के जरिए ट्रांसपोर्ट का नया जरिया बनाया। इससे अब तक जो सारा सामान नदियों के जरिए इधर उधर आता जाता था, वो रेल से जाने लगा। पूर्वांचल में नदियों के किनारे बसे नगर और वहां की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। आजादी के बाद दुर्भाग्य से कांग्रेस की सरकार के आने के बाद भी हालात नहीं बदले। कांग्रेस सरकारों में वो दूरदर्शिता ही नहीं थी कि वो पूर्वांचल के इस पिछड़ेपन के कारण जान पाती।

आजादी के बाद भारत जलमार्ग को लेकर कोई योजना नहीं बना सका लेकिन चीन और अमेरिका जैसे देशों ने जलमार्गों का महत्व जान लिया और आज ये उनकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। आंकड़ों की तुलना में देखें तो भारत में जलमार्ग से महज 0.1 प्रतिशत ढुलाई होती है, जबकि अमेरिका अपने 21 प्रतिशत सामान को जलमार्ग से भेजता है। ये बात भी गौरतलब है कि हमारे यहां जलमार्ग के विकास की ज्यादा संभावनाएं हैं क्योंकि हमारे ज्यादातर बड़े शहर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। 

एक अनुमान के मुताबिक भारत में कुल 14,500 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है। इनमें बड़े कार्गो को 5,000 किलोमीटर ले जाया जा सकता है, इसके अलावा लगभग 4,000 किलामीटर लंबी नहरों के जरिए भी माल ढुलाई हो सकती है। मोदी सरकार ने इस सुनहरे अवसर को समझते हुए ब्रह्मपुत्र नदी में 891 किलोमीटर, केरल की वेस्ट कोस्ट नहर में 205 किलोमीटर और गुजरात की तापनी नदी पर 173 किलोमीटर लंबा जलमार्ग बनाने की योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इनके शुरू होने से सड़कों पर बोझ, जाम, ईंधन का खर्च और प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी।

 

रोजगार के अलावा नदियों के किनारे और जलमार्गों पर पर्यटन की भी असीम संभावनाएं हैं। गंगा नदी में 9 स्थानों पर रोरो सेवा शुरू हो रही है। मुंबई में रोरो सेवा से अलीबाग तक 15 मिनट में पहुंचा जा सकता है। मोदी सरकार के आंकलन के मुताबिक अभी मुंबई में साल भर में 80 क्रूज आते हैं, जिनकी संख्या अगले चार वर्ष में 950 क्रूज हो जाने की संभावना है। भारत में सी प्लेन तैयार करने की कोशिशें हो रही है। मोदी सरकार ने ठाणे-विरार जलमार्ग विकसित करने के लिए 1200 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की है. नवी मुंबई में जो नया हवाईअड्डा बन रहा है, उसे  वाटर टैक्सी सेवा से जोड़ने की योजना है। जाहिर है इस हवाईअड्डा से जलमार्ग से कहीं भी जाया जा सकेगा। यूपी सरकार गंगा और यमुना के 11 जलमार्ग विकसित करने की दिशा में बढ़ रही है। गंगा नदी पर बना राष्ट्रीय जल मार्ग 1 और यमुना पर बनने जा रहा राष्ट्रीय जलमार्ग 110 को जोड़ने की दिशा में भी सोचा जा रहा है।

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