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कांग्रेस के चहेते विजय माल्या के दामाद ने किया कांग्रेस-एनसीपी नेता का चुनाव प्रचार

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फोटो सौजन्य

शराब कारोबारी विजय माल्या पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का हाथ रहा है। कांग्रेस राज में माल्या का कारोबार खूब फला-फूला, जिसके बदले में उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेताओं को फेवर भी किया था। यूपीए शासनकाल में कांग्रेस के कई शीर्ष नेता के वरदहस्त में घोटाला करने वाले विजय माल्या को मोदी सरकार की सख्ती के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा। राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेसी नेता इसके लिए बीजेपी को निशाने पर लेते रहे हैं, लेकिन उसी माल्या के दामाद ने महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी उम्मीदवार का चुनाव प्रचार किया है।

शराब कारोबारी विजय माल्या के दामाद समर सिंह ने कांग्रेस-एनसीपी के उम्मीदवार पार्थ पवार का चुनाव प्रचार किया। पार्थ पवार एनसीपी चीफ शरद पवार के पोते और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अजीत पवार के बेटे हैं। पार्थ पवार महाराष्ट्र की मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मिड डे अखबार के अनुसार समर सिंह पार्थ पवार के सोशल मीडिया की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अखबार के अनुसार समर सिंह और पार्थ पवार लंबे समय से दोस्त रहे हैं। विजय माल्या की बेटी लैला के पति समर सिंह अमेरिका में एक कारोबारी और इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं।

दिलचस्प बात यह है कि समर सिंह जहां कांग्रेस के सहयोगी एनसीपी से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कुछ उद्योगपतियों और व्यापारियों से अपनी न्याय योजना के लिए पैसा निकालने की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी की न्याय के लिए पैसा विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े व्यापारियों की जेब से आएगी।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे दिया। आइए अब आपको दिखाते हैं विजय माल्या से राहुल-सोनिया-मनमोहन के गहरे रिश्ते-

हाल ही में रिपब्लिक टीवी ने खुलासा किया कि यूपीए सरकार के दो पूर्व मंत्री ने लंदन में विजय माल्या से मुलाकात की। इससे यह बात तो साबित होती है कि विजय माल्या और कांग्रेस के नेताओं के गहरे रिश्ते हैं।

                          भगोड़े विजय माल्या पर कांग्रेस की ‘मेहरबानी’
                             2002 और 2008 में कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा
                                सितंबर 2004 में विजय माल्या को लोन दिया
                               डिफॉल्टर होने पर भी 2008 में फिर लोन दिया
                              दो बार में 8040 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया
                                2009 में कंपनी को एनपीए घोषित किया गया
                               एनपीए के बावजूद भी 2010 में दोबारा कर्ज दिया
                              2010 में किंगफिशर एयरलाइंस को बंद किया गया
                              2010 में 2000 करोड़ का लोन रिस्ट्रक्चर कर दिया
                           अक्टूबर, 2011 में माल्या ने मनमोहन सिंह को ‘थैंक्यू’ कहा
                              कांग्रेस शासन में ऑडिट टीम ने भी नहीं उठाए सवाल

 

सोनिया गांधी एंड फैमिली को माल्या देते थे विशेष सुविधाएं
रिपब्लिक टीवी की एक रिपोर्ट से साफ होता है कि विजय माल्या ने सोनिया गांधी और फारुक अब्दुल्ला जैसे नेताओं को फेवर किया। रिपब्लिक टीवी ने खुलासा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ऑफिस से उनके और उनके संबंधियों का टिकट मुफ्त में Upgrade करने के लिए लिखा था।
यह भी खुलासा हुआ कि सोनिया गांधी के पीए ने Upgrade के लिए किंगफिशर एयरलाइंस से संपर्क किया था। SFIO (Serious Fraud Investigation Office) की रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी या उनके संबंधियों ने जब भी किंगफिशर एयरलाइंस की सेवा ली, उन्हें मुफ्त में Upgrade की सुविधा दी गई।

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माल्या के हस्ताक्षर से सोनिया एंड फैमिली को मिली विशेष सुविधा
दरअसल किंगफिशर एयरलाइंस सेल्स टीम के विजय अरोड़ा की ओर से CFO और दूसरों के भेजे गए मेल से साफ हो जाता है कि सोनिया गांधी और उनके परिवार को कम पैसों में ही हाइयर क्लास का टिकट दिया गया। मेल से यह भी खुलासा होता है कि किंगफिशर एयरलाइंस ने कैसे उनके economy class के टिकट को बिना ज्यादा पैसे लिए first class tickets में upgrade कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि टिकट को अपग्रेड करने की अनुमति विजय माल्या ने स्वयं दी। सबसे खास यह है कि ऐसा उस समय हो रहा था जब UPA-2 की सरकार एक के बाद एक घोटालों में उलझती जा रही थी।

 

फारूक अब्दुल्ला को विजय माल्या ने खुद दी थी चार्टर सुविधा
माल्या ने फारूक अब्दुल्ला को मुफ्त में चार्टर सेवा देने के लिए खुद हस्ताक्षर किया था। SFIO के गोपनीय दस्तावेज के अनुसार 2008 में जम्मू-कश्मीर चुनाव के दौरान फारूक अब्दुल्ला द्वारा इस्तेमाल चार्टर सेवा का भुगतान नहीं किया गया। उसी दिन, किंगफिशर एयरलाइंस ने chopper operator को लिखा था कि, फारूक अब्दुल्ला के बकाये का भुगतान उनके मित्र विजय माल्या द्वारा मंजूर किया गया। दरअसल 29 नवंबर, 2008 की एक मेल में अरुण सिंह, ए रघुनाथन, सीएफओ और विजय माल्या के बीच आंतरिक पत्राचार का विवरण है। इस मेल से साफ होता है कि फारुक अब्दुल्ला को हेलिकॉप्टर के लिए भुगतान नहीं करना था।

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कांग्रेस के दबाव के कारण विजय माल्या को मिले 2000 करोड़ के कॉरपोरेट कर्ज
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के बड़े कद्दावर नेताओं से माल्या के कनेक्शन के कारण ही वे आज भी लंदन में मौज की जिंदगी जी रहे हैं। कांग्रेस सरकार के भीतर माल्या की कितनी पैठ थी इसका अंदाजा इस बात से भी लगता है कि 2000 करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर्ज तो केवल बाहरी दबाव (कांग्रेस) के कारण दे दिया गया था। सीबीआई द्वारा जब्त कंप्यूटर के ई-मेल्स से SFIO ने ये भी खुलासा किया है कि कैसे वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने किंगफिशर एयरलाइंस को ऋण स्वीकृति के लिए भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों को सलाह दी थी। ई मेल से ये भी खुलासा होता है कि वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी की सलाह के से माल्या 2009 में पूर्व एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी से मिले थे, जिन्होंने माल्या को 500 करोड़ रुपये का ऋण देने का आश्वासन दिया था।

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कांग्रेस शासन में डीजीसीए से पहले माल्या को पता रहती थी नीतियां
SFIO ने ये भी खुलासा किया है कई ऐसे निर्णय जो सरकार के अधिकारियों को भी नहीं पता होता था वो माल्या को पता होता था। इसका कारण होता था कि डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के अधिकारियों से पहले ही माल्या को यात्रियों की संख्या, बाजार हिस्सेदारी जैसी जानकारियां पहले मिल जाया करती थीं। इस जानकारी के आधार पर माल्या अपनी विमान कंपनी का किराया से लेकर तमाम तरह की नीतियां तय कर लेते थे। इस एवज में वे बड़े नेताओं को अपने विमानों में बिजनेस क्लास, फर्स्ट क्लास की सीट और चार्टर्ड हेलीकॉप्टरों के किराये पर खर्च का भुगतान करते थे। कई मौकों पर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को उन्होंने विदेश यात्रा के लिए टिकटों की कीमतें 50 प्रतिशत तक कम कर दी थीं। यही कारण था कि वित्त मंत्रालय के अधिकारी माल्या द्वारा की गई अनियमितताओं पर कोई सवाल नहीं उठाते थे।

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ऑडिट टीम ने माल्या के घोटालों पर कभी सवाल क्यों नहीं उठाए?
भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप के बावजूद भी किंगफिशर द्वारा किए गए परिवर्तनों पर ऑडिट कमिटी भी माल्या की कंपनी पर सवाल नहीं उठाते थे। ऐसा लगता है कि वे इस मामले में जानबूझकर अनजान बने रहते थे। कई स्वतंत्र निदेशकों ने कंपनी और केएमपी (key management persons) से परिचालनों की आर्थिक व्यवहार्यता और बैठकों में लेनदारों और ऋणों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की क्षमता पर सवाल नहीं किया। गौरतलब है कि किंगफिशर पर एसबीआई, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया सहित कम से कम 17 उधारदाताओं को 9000 करोड़ रुपये का बकाया है।

                                माल्या पर प्रधानमंत्री मोदी की सख्ती
नवंबर, 2014 सीबीआई ने बैंक लोन में गड़बड़ी की जांच शुरू की और माल्या पर चार्जशीट दाखिल की
अक्टूबर, 2017 मोदी सरकार के दबाव के कारण माल्या को पहली बार लंदन में गिरफ्तार किया गया
मई, 2018 FERA कानून के उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग केस में संपत्तियों को अटैच करने का आदेश
जून, 2018 माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट में 13,900 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचने की याचिका दायर की
2016-2018 भारतीय स्टेट बैंक ने माल्या की संपत्ति3यों की नीलामी कर 963 करोड़ रुपये वसूले

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