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वाजपेयी के बारे में मीडिया की साजिश का पर्दाफाश, देखिए वीडियो

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी जी का 25 दिसंबर को 92वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर भारतीय मीडिया द्वारा प्रचारित उन दो झूठे तथ्यों की पड़ताल करना जरूरी है, जिसने कई दशक तक आम लोगों में गलतफहमी फैलाए रखी। 

मीडिया में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी के जिन दो बयानों की अक्सर चर्चा होती है। उसमें एक है कि उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान इन्दिरा गांधी को दुर्गा कहा था और बयान ये कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी को राजधर्म का पालन करने की बात कही थी। आज हम न सिर्फ इस राज से पर्दा हटाएंगे बल्कि ये भी बताएंगे कि कैसे आजादी के इतने बरस बाद भी कुछ पत्रकार नेहरू-गांधी परिवार के गुलाम की तरह काम करते हुए सच को लोगों के सामने तोड़-मरोड़ कर पेश करते रहे हैं। 

मीडिया के झूठ का पर्दाफाश – वाजपेयी जी ने कभी इन्दिरा को दुर्गा नहीं कहा था

इंदिरा गांधी की इमेज बढ़ाने के लिए कुछ पत्रकारों ने ये दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उनकी तुलना मां दुर्गा से की है। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद कुछ अखबारों ने छापा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहते हुए उनकी तारीफ की है। इस खबर से खुद वाजपेयीजी चौंक गये और उन्होंने इसका खण्डन किया।

उस समय खण्डन छपा भी, मगर अखबार के भीतर के पन्नों पर। आगे भी ये बात घूम-फिर कर आती रही कि वाजपेयीजी ने इंदिरा गांधी की तुलना दुर्गा से की थी, लेकिन मीडिया ने कभी सच दिखाने की कोशिश नहीं की। आखिर एक बार जब पत्रकार रजत शर्मा ने आपकी अदालत में वाजपेयी से इस बारे में सवाल पूछा था तो उन्होंने इसका जोरदार खंडन किया। आप खुद पढ़िए और देखिए कि कैसे वाजपेयी जी ने इसका खंडन किया था।

रजत शर्मा- इंदिरा गांधी को आपने दुर्गा कहा था?
अटल बिहारी वाजपेयी- मैंने दुर्गा नहीं कहा। ये भी अखबार वालों ने छाप दिया और मैं खंडन करता रह गया कि मैंने नहीं कहा, नहीं कहा। इस पर बड़ी खोज हुई। श्रीमती पुपुल जयकर ने इन्दिराजी के बारे में एक पुस्तक लिखी और उस पुस्तक में वो इस बात का उल्लेख करना चाहती थीं कि वाजपेयी ने इन्दिराजी को दुर्गा कहा है। पहले मेरे पास आईं। मैंने कहा कि मैंने नहीं कहा है। मेरे नाम से छप गया था जरूर, लेकिन मैंने कहा नहीं था। तब उन्होंने लाइब्रेरी में जाकर सारी किताबें खंगाल लीं और सारी कार्यवाहियां देख लीं। उसमें कहीं दुर्गा नहीं मिला। लेकिन अभी भी दुर्गा मेरे पीछे है जैसा कि आपके सवाल से लगता है।

इस सफाई के बाद इसपर कहने को कुछ बाकी नहीं रह जाता है। लेकिन मीडिया और विरोधी राजनीतिक दल फायदे के लिए ये राग छेड़ देते हैं।

मीडिया के झूठ का पर्दाफाश – वाजपेयी जी ने कहा था कि मुझे विश्वास है कि मोदी राजधर्म का पालन कर रहे हैं

एक और बयान से कुछ कथित सेक्यूलर पत्रकार आपको गुमराह करते रहे हैं। ये वही पत्रकार हैं जो इशरत जहां को शहीद बताते हैं। संसद पर हमला करने वाले को धर्म से जोड़कर देखते हैं। अब देखिए वाजपेयीजी के राजधर्म वाले बयान को किस तरह आपके सामने पेश किया गया था। उस समय वाजपेयीजी प्रधानमंत्री थे और नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री। हम आपको उस बयान का पूरा अंश सुनाते हैं-

पत्रकार- प्रधानमंत्रीजी। अधिकारियों के लिए आपका संदेश है। आपका चीफ मिनिस्टर के लिए भी कोई मैसेज है?
अटल बिहारी वाजपेयी- चीफ मिनिस्टर के लिए मेरा एक ही संदेश है कि वो राजधर्म का पालन करें। राजधर्म।
(कोई सवाल आता है…ठीक से सुनाई नहीं पड़ता)
अटल बिहारी वाजपेयी- ये शब्द काफी सार्थक है।
(फिर कोई सवाल, सनाई नहीं देता)
अटल बिहारी वाजपेयी- मैं उसी का पालन कर रहा हूं। पालन करने का प्रयास कर रहा हूं।
(थोड़ी चुप्पी के बाद)
अटल बिहारी वाजपेयी- राजा के लिए शासक के लिए प्रजा-प्रजा में भेद नहीं हो सकता – न जन्म के आधार पर, न जाति के आधार पर, न सम्प्रदाय के आधार पर।
अटल बिहारी वाजपेयी- मुझे विश्वास है कि नरेन्द्र भाई यही कर रहे हैं।

पूर्वाग्रह से ग्रसित मीडिया ने इस बातचीत में से आखिरी लाइन हटा दी। आखिरी लाइन जिसमें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कह रहे हैं कि उन्हें विश्वास है कि नरेन्द्र भाई राजधर्म का पालन कर रहे हैं।

मीडिया ने वाजपेयीजी के इस बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। अगर आप आज इस बाइट को ना सुनते तो आप जो अभी तक गुमराह थे, आगे भी होते रहते। वाजपेयीजी को इन दोनों बयानों के लिए कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है। राजधर्म के बहाने नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधे जाते रहे हैं। ये सिलसिला आज भी खत्म नहीं हुआ है। आखिर कब सुधरेगा मीडिया?

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