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महत्वपूर्ण परियोजनाओं को यूपीए ने लटकाए रखा, प्रधानमंत्री मोदी ने उसे तय समय में पूरा करवाया

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर कहते हैं कि अटकाना, लटकाना और भटकाना कांग्रेस की कार्यशैली रही है। दरअसल बीते कई दशकों में देश के अनेक प्रोजेक्ट को कहीं न कहीं अधूरा छोड़ दिया गया था। हजारों ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिसकी पॉलिटिकल माइलेज लेने के लिए शुरुआत तो कर दी गई, लेकिन फिर वे कब पूरे होंगे इसकी कोई समय सीमा नहीं होती थी। किसकी जवाबदेही है इसकी भी कोई स्पष्टता नहीं होती थी। कई प्रोजेक्ट तो चार दशकों तक लटके पड़े रहे और लागत में सैकड़ों गुना तक की वृद्धि हो गई। प्रधानमंत्री मोदी ने बीते चार साल में इस कार्य संस्कृति को बदलने का काम किया है।

आइये कुछ ऐसे कुछ महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर नजर डालते हैं जिसे कांग्रेस ने लटकाए रखा, लेकिन पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में उसे लक्ष्य निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से पूरा करवाया।

39 साल से लटकी बाणसागर परियोजना को पीएम मोदी ने देश को सौंपा
15 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 3148.91 करोड़ की लागत से तैयार बाणसागर परियोजना का लोकार्पण किया। इससे बिहार के रोहतास, बक्सर भोजपुर, भभुआ, गया और पटना समेत दर्जन भर जिलों में किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। आपको बता दें कि इस परियोजना का शिलान्यास 14 मई 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने किया था, लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने इसे लटकाए रखा। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इसे दोबारा शुरू किया, लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने इसे लटकाए रका। अगर कांग्रेसी सरकारों ने इसे पूरा करने में रुचि ली होती तो 20 साल पहले ही इलाके के किसानों को इसका लाभ मिल जाता। इतना ही नहीं 303 करोड़ की मूल लागत वाली 71 किलोमीटर की लंबाई वाली इस नहर परियोजना पर 3420.24 करोड़ रुपये की कुल लागत न आई होती।  

नर्मदा बांध की बाधाओं को दूर कर 38 सालों से लटकी पड़ी परियोजना पूरी करवाई
17 सितंबर, 2017  को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 67वें जन्मदिन के अवसर पर सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित किया। इस बांध को गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को लिए लाइफ लाइन माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि देश के इस सबसे ऊंचे बांध को बनने 56 साल लगे, लेकिन 2014 में जब प्रधानमंत्री ने इसे पूरा करने की समय सीमा तय की और और देश को सौंप भी दिया। आपको बता दें कि इस बांध की आधारशिला देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रैल, 1951 को रखी थी। लालफीताशाही और कांग्रेस की घोटाले की कार्य संस्कृति ने इस प्रोजेक्ट को वर्षों तक लटकाए रखा। 1986-87 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, उस समय इसकी लागत 6400 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन इसकी लागत बढ़ती गई और यह पूरा होते-होते 65 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जाहिर है इसकी लागत 100 गुना से भी अधिक बढ़ गई। अगर समय पर काम शुरू होकर पूरा हुआ होता तो यह काफी कम खर्च में पूरा हो जाता।

धीमी गति से बन रही भूपेन हजारिका पुल को समय से करवाया पूरा
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने अगस्त, 2003 में ‘ढोला-सदिया पुल’ जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भूपेन हजारिका पुल का नाम दिया है, के निर्माण के लिए फिजिबलिटी स्टडी करने का आदेश दिया था।  उनकी सरकार 2004 में चली गई तो यह योजना भी लटक गई। छह साल बाद इसे मनमोहन सिंह कैबिनेट ने जनवरी, 2009 में सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।  ये पुल अरुणाचल प्रदेश सड़क-परिहवन पैकेज के तहत घोषित 4 बड़ी परियोजनाओं में एक था, लेकिन इसमें देरी होती चली गई। दो साल बाद 2011 में पुल बनाने का काम शुरू हुआ और इसे दिसंबर, 2015 में पूरा हो जाना था, लेकिन कांग्रेस की कार्यशैली के कारण ये पूरा नहीं हो सका। मंजूरी के वक्त 9.15 किलोमीटर लंबे इस पुल पर आने वाले कुल खर्च का अनुमान 876 करोड़ था जबकि पूरा होते-होते इस पर कुल 2056 करोड़ रुपए खर्च हो गए।

बाड़मेर रिफाइनरी में कांग्रेस ने किया देश का नुकसान, भाजपा ने की भरपाई
वर्ष 2013 में चुनाव आचारसंहिता लागू होने वाली थी, तभी कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रिफाइनरी का शिलान्यास कर दिया। दरअसल बाड़मेर की धरती में करीब 4 अरब बैरल तेल का खजाना है। यहां के पचपदरा रिफाइनरी से रोज 200 कुओं से करीब 1.75 लाख बैरल तेल उत्पादन किया जाएगा। हालांकि कांग्रेस ने इसमें भी घोटाला कर दिया था जिसे मोदी सरकार ने सुधारा। दरअसल मोदी सरकार ने इस पुराने डील को खत्म कर जनवरी, 2018 में परियोजना का शुभारंभ किया और इसमें 2613 करोड़ रुपये की बचत की। गौरतलब है कि एचपीसीएल के साथ पंद्रह साल तक 1123 करोड़ रुपये सालाना बिना ब्याज के देने का करार किया है जो कांग्रेस राज में 3736 करोड़ रुपये सालाना पंद्रह सालों तक दिया जाना था। जाहिर है एक झटके में ही 2613 करोड़ रुपये का घोटाला करने की योजना कांग्रेस ने तैयार कर रखी थी, जिसे मोदी सरकार ने पकड़ लिया।

26 वर्षों से बंद पड़े गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट को शुरू कराया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई, 2016 को गोरखपुर में 26 वर्षों से बंद पड़े फर्टिलाइजर प्लांट को दोबारा शुरू करने का एलान किया। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के बरौनी और सिंदरी के फर्टिलाइजर प्लांट भी शुरू करने की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि “26 वर्षों से यह फर्टिलाइजर कारखाना हमारी वजह से बंद नहीं पड़ा था। पहले की सरकारों ने जनहित से जुडे ऐसा काम नहीं किए, अब दिल्‍ली में आप लोगों के ‍लिए काम करने वाली सरकार बनी है, इसलिए ये काम हो रहा है। अगर आप अपने हितों को ध्‍यान में रख करके सरकार चुनते है तो सरकार भी आपके लिए काम करने के लिए दौड़ती है।“ जाहिर है कि कांग्रेस के राज में किसानों, गरीबों, अदिवासियों, महिलाओं के विकास से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान नहीं जाता था।

असम में अटकी रिफाइनरी परियोजना को पूरा कराया
असम के डिब्रूगढ़ में 5 फरवरी, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिफाइनरी प्‍लांट का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए प्रोजेक्‍ट में देरी पर अफसोस जताया और कहा कि यह प्रोजेक्ट 25 साल पहले बन जाना चाहिए था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने अटकी हुई कई परियोजनाओं को मुक्त किया है, और वह प्रगति की निगरानी और अड़चनें दूर करने के लिए हर महीने राज्यों के मुख्य सचिवों से व्यक्तिगत तौर पर बातचीत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने असम में 10,000 करोड़ रुपये के पेट्रोरसायान संयंत्र का उद्घाटन किया जो कच्चे तेल की रिफाइनरी में प्लास्टिक के लिए कच्चा माल और वैक्स बनाने वाली इकाई बनाएगा। जाहिर है कि ब्रह्मपुत्र क्रैकर एंड पॉलीमर लिमिटेड की परिकल्पना असम शांति प्रस्ताव के अंग के तौर पर की गई थी जिस पर समझौता तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में हुआ था और इसकी बुनियाद 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि परियोजना की स्थापना 25 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री कर देते तो मुझे इस परियोजना का उद्घाटन करने का मौका नहीं मिला होता। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने असम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी की वैक्स उत्पादन इकाई का भी उद्घाटन किया, जिसकी सालाना क्षमता 50,000 टन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार सभी अटकी परियोजनाओं को पूरा करने और लोगों के सपने पूरा करने का प्रयास कर रही है।

मोदी सरकार में कांग्रेस शासन के अटके प्रोजेक्ट को पूरा करने की फेहरिस्त काफी लंबी है। इन परियोजनाओं के आलवा भी आधार को सब्सिडी से जोड़ना, डीबीटी, स्वच्छता मिशन, घर-घर शौचालय, गंगा सफाई, गरीबों को गैस कनेक्शन, मिड डे मील, जीएसटी, बेनामी संपत्ति पर शिकंजा जैसे तमाम काम हैं जिन्हे यूपीए सरकार के कार्यकाल में आधे-आधूरे तरीके से शुरू किया था। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता की वजह से इन योजनाओं को नया मकाम हासिल हुआ और सही मायने में देश के लोगों को फायदा भी हुआ।

दरअसल बिहार में मधेपुरा और छपरा में रेल कारखाना हो या कर्नाटक में बिदार-कालबुर्गी रेलवे ट्रैक। ऐसे कई प्रोजेक्ट सालों से या तो बंद पड़े थे या फिर इसकी गति धीमी थी। मोदी सरकार ने ऐसे सभी प्रोजेक्ट को बंद नहीं किया बल्कि इसकी समय सीमा निर्धारित की और उसे पूरा किया। जाहिर है मोदी सरकार ने लटकाने, अटकाने और भटकाने की कार्य संस्कृति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

पूर्वोत्तर में 102 रणनीतिक सड़कों के निर्माण में आई तेजी, 22 सड़कें बनकर तैयार
पूर्वोत्तर में 102 सड़क परियोजनाओं में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 73 सड़कें बननी थीं, लेकिन कांग्रेसी कार्यशैली की भेंट चढ़ गईं।  सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 4644 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली 61 सड़कों के 2012 तक पूरा करना था, लेकिन मार्च 2016 तक केवल 22 सड़कों का निर्माण पूरा हो सका था। गौरतलब है कि इन 22 सड़कों के निर्माण पर ही 4544 करोड़ रुपये खर्च हो गए। हालांकि मोदी सरकार ने इसमें बढ़ोतरी की और तेजी से काम पूरा करने के लिए अभियान चला दिया। चीन-भारत सीमा पर महत्वपूर्ण 3,488 किलोमीटर लंबी ये सड़कें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक फैली हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी संवेदशीलता को देखते हुए 73 सड़कों के निर्माण का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है। इनमें से 46 सड़कों का निर्माण रक्षा मंत्रालय कर रहा है और शेष 27 सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के हाथों में सौंपी गई है। इनमें से 24 सड़कें बनकर तैयार हो चुकी हैं और बाकी सड़कों का काम वर्ष 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा।

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