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काम नहीं कारनामे: देखिए अखिलेश राज में अपराध के सबूत

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के राज में हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध का बोलबाला है। अपराध के आंकड़े देखने पर साफ हो जाता है कि यूपी में काम नहीं कारनामे बोल रहे हैं। अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश अपराध राज्य में बदल गया है। हत्या, अपहरण, महिलाओं और अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध के मामले में यूपी देश में नंबर वन बन गया है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। राज्य महिलाओं के सुरक्षित नहीं रह गया है। आए दिन गैंगरेप की घटनाएं सामने आती रहती है। अखिलेश यादव के शासन में सांप्रदायिक दंगा खूब फला-फूला है।

अगर अपराध के मामले में बीजेपी शासित राज्यों की तुलना उत्तर प्रदेश से करें तो अखिलेश के राज्य की स्थिति काफी खराब है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की तुलना में उत्तर प्रदेश में हत्या के मामले दोगुना से भी ज्यादा है। दंगा के मामले में भी उत्तर प्रदेश बीजेपी शासित राज्य राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश से काफी आगे है।यहीं हाल अपहरण के मामले में भी है। उत्तर प्रदेश यहां भी बढ़त बनाए हुए है।
बीजेपी शासित राज्य राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की तुलना में उत्तर प्रदेश में दस गुणा से भी ज्यादा अपराध के शिकायत किए गए।अखिलेश के शासन काल में अपराधियों को जमकर संरक्षण मिला। राज्य के लोग अपराध से त्रस्त हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक अखिलेश यादव के शासनकान में सिर्फ 2015 में ही मौखिक और लिखित रुप में कुल 59,41,118 शिकायत दर्ज हुए। राज्य में इस साल आईपीसी के तहत 2,41,920 और एसएलएल के तहत 25,49,421 केस दर्ज किए गए। आंकड़ों के हिसाब से राज्य में रोजाना पुलिस के पास 16,277 शिकायत दर्ज हुए।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट देखने से साफ है कि अखिलेश प्रशासन बुरी तरह से फेल हो गया है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद सिर्फ 2015 में 4732 लोगों की हत्या हुई और 4897 हत्या के प्रयास किए गए। इस हिसाब से यूपी में रोज 13 लोगों की हत्या हुई।

अखिलेश के मुख्यमंत्रित्व काल में यूपी महिलाओं के सुरक्षित नहीं रह गया है। 2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 35,527 केस दर्ज किए गए। इसी साल राज्य में दहेज से मौत के 2335 मामले दर्ज हुए। राज्य में आए दिन गैंग रेप की घटनाएं सामने आती रहती है। बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप, बरेली, बदायूं, कानपुर, इटावा जैसे सैकड़ों उदाहरण है जो अपराध की पराकाष्ठा है। इन कांडों के आरोपियों के पीछे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सपा का वरदहस्त रहा है। 2015 में राज्य में रेप की 3025 घटनाएं हुई जबकि 422 रेप के प्रयास किए गए। इस हिसाब से राज्य में रोज रेप की आठ घटनाएं होती है। ये सरकारी आंकड़ा है। हालांकि इतर स्थिति और भी भयावह है। क्योंकि लोकलाज की वजह से रेप और रेप के प्रयास के मामले दबा दिए जाते हैं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासनकाल में सांप्रदायिक दंगा भी खूब फला-फूला है। मुजफ्फरनगर, दादरी, कैराना, शामली, बरेली, आगरा और न जाने किन-किन शहरों में दंगे हुए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में उत्तर प्रदेश में 6813 दंगे हुए।

उत्तर प्रदेश में फिरौती के मामले भी काफी बढ़े हैं। लोगों को दिन-दहाड़े उठा लिया जाता है। अपराधी कानून को हाथ में लेकर बेखौफ होकर अपरहण कर रहे हैं। राज्य में साल 2015 में किडनैप के 11,999 मामले दर्ज किए गए।

मुख्यमंत्री गरीब, वंचितों और अनुसूचित जाति के कल्याण की बात करते हैं। लेकिन अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। 2015 में अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराध में 8358 केस दर्ज किए गए।

जाहिर है अखिलेश ने फैमिली ड्रामा करके अपराध की घटनाओं और अपनी नाकामी से ध्यान बंटाने की कोशिश की। बाप-बेटे और चाचा की नाटकबाजी की पोल खुलने पर कांग्रेस से हाथ मिलाकर लोगों को बरगलाने की कोशिश की।

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