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मासूम हिंदू बच्ची से रेप पर राहुल, केजरीवाल और सेक्यूलरवादियों की खामोशी का सबब समझिये…

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मध्य प्रदेश के मंदसौर में जिस 7 साल की मासूम बच्ची का रेप हुआ  उसकी 7 घंटे सर्जरी चली, गले पर 7 टांके लगे हैं, बच्ची की आंत और प्राइवेट पार्ट भीतर से अलग हो गए हैं और बच्ची जीवन और मौत से जूझ रही है। आरोप है कि इरफान और आसिफ नाम के दरिंदे ने बच्ची का रेप उसे ‘काफिर’… यानि गैर मुस्लिम का समझकर किया था।

बच्ची कोमा में है, परिवार वाले बेसुध हैं, लोगों में आक्रोश है, लेकिन ये गुस्सा आम जनमानस में है। मीडिया मौन है, तथाकथित बुद्धिजीवी खामोश हैं और सेक्यूलरवादियों की जुबानों पर ताले लगे हैं।  सवाल उठ रहे हैं कि मंदसौर में बच्ची के साथ हुए ‘अधर्म’ पर इतनी चुप्पी क्यों है?  एक 7 साल की बच्ची के साथ निर्भया जैसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली दरिंदगी हुई, लेकिन उसके गुनहगार को फांसी देने की कोई मांग नहीं उठ रही… कोई कैंडल नहीं जल रहे… कोई कैंपेन नहीं चल रहे…! सवाल यह भी कि हैवानियत में धर्म देखकर मुंह खोलने वालों को क्या सांप सूंघ गया है!

कठुआ कांड पर राहुल ने किए थे 9 ट्वीट, निकाला था कैंडल मार्च

548 लोगों की राय पर बनी रिपोर्ट को लेकर राहुल गांधी भारत को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश घोषित कह रहे थे, लेकिन सात साल की बच्ची से रेप पर वे खामोश हैं। सच्चाई यह भी है कि इसी राहुल ने कठुवा कांड पर राहुल गांधी ने एक के बाद एक 9 ट्वीट किए थे। उनकी पूरी पार्टी बयानबाजी कर रही थी। हिंदुओं को जमकर कोसा जा रहा था। मंदिरों को बदनाम किया जा रहा था, लेकिन मंदसौर रेप पर राहुल गांधी ने घटना के पांच दिन बाद एक ट्वीट किया है। उसमें भी अपराधियों को दंड देने जैसी कोई बात नहीं है। जाहिर है राहुल गांधी ने यह साबित कर दिया है कि अगर पीड़ित हिंदू होगी और उसपर कोई अब्दुल, कोई मोहम्मद, कोई आसिफ या  कोई इरफान अत्याचार करेगा तो कांग्रेस पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

केजरीवाल एंड कंपनी की खामोशी ये कहती है कि आरोपी ‘विशेष समुदाय’ से है!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने कठुवा कांड पर बहुत शोर मचाया था।  इन सभी ने मिलकर हिंदुओं और मंदिरों को गलत तरीके से बदनाम किया था, लेकिन मंदसौर रेप कांड पर ये लोग खामोश हैं। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने कठुआ कांड के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल तक की थी, लेकिन वह भी मंदसौर पर खामोश हैं। अलका लांबा और मनीष सिसोदिया का ‘निर्लज्ज’ मौन भी तो शायद इसी बात की तश्दीक कर रही है कि दोषी अगर ‘विशेष समुदाय’ का होगा तो वे इसकी निंदा नहीं करेंगे बल्कि उन्हें सिलाई मशीन देने जाएंगे!  

       कठुआ कांड – मंदसौर रेप   में अंतर करने वालों की हकीकत देखिये
           नाम            कठुआ कांड में ट्वीट         मंदसौर मामले में ट्वीट
         राहुल गांधी               09                       01
       सीताराम येचुरी                03                                      00
        तेजस्वी यादव                  08                   00
       अखिलेश यादव                  03                    00
        जावेद अख्तर                   37                     00
       बॉलीवुड कलाकार                78                     00
       राजदीप सरदेसाई                 17                     01
          बरखा दत्त                   18                    00
        निधि राजदान                   14                          00
        सागरिका घोष                  14                          00
        स्वाति चतुर्वेदी                 24                    02

 कठुआ और मंदसौर रेप में अंतर करने वालों को पहचानना जरूरी है

मंदसौर रेप कांड पर जिस तरह से मीडिया ने मिटटी डालने की कोशिश की उसे सोशल मीडिया ने Expose कर दिया। मीडिया के मठाधीशों पर सवाल उठे तो राजदीप सरदेसाई जैसे लोग, जिन्होंने कठुआ कांड पर 10 ट्वीट किए थे, उन्होंने भी एक ट्वीट कर दिया। हालांकि यहां भी वे मुस्लिम प्रेम और हिंदू विरोध की मानसिकता छिपा नहीं पाए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘’बलात्कारी का कोई धर्म नहीं होता और मंदसौर रेप मामले पर देश के मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा है, सांप्रदायिक एजेंडा चलाया जा रहा है।‘’

बड़ी बात यह है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेता और प्रदेश में पार्टी के प्रचार का कमान संभाल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंदसौर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और जांच को भी गलत दिशा में ले जाने का आरोप लगाय है। हालांकि इसके इतर सच्चाई यह है कि इन्हीं लोगों ने कठुआ कांड में सीबीआई जांच की मांग को टालने की मांग की थी क्योंकि वहां का हिंदू समुदाय सीबीआई जांच की मांग कर रहा था। 

दरअसल मंदसौर की पीडिता बच्ची हिंदू है, और उसका रेप करने वाला मोहम्मद इरफान और आसिफ मुसलमान है। शायद  इसलिए ही इस मामले पर सेक्यूलर खेमे की तरफ से पिन ड्रॉप साइलेंस है। 

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