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उज्ज्वला योजना ने बदली देश की तस्वीर, अब लक्ष्य आठ से बढ़ाकर दस करोड़ करने की तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब महिलाओं को चूल्हे के धुएं से आजादी दिलाने और उनके बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) शुरू की थी। इसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाता है। योजना की सफलता को देखते हुए मोदी सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना का लक्ष्य आठ करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने की तैयारी कर रही है। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पास आठ करोड़ से अधिक पात्र लाभार्थी गैस कनेक्शन के लिए आवेदन कर चुके हैं। अब तक करीब 10 करोड़ 80 लाख आवेदन मिले हैं। इनमें से आठ करोड़ 12 लाख से अधिक आवेदन सही पाए गए हैं। सरकार ने 2020 तक आठ करोड़ उज्ज्वला गैस कनेक्शन का लक्ष्य रखा है, लेकिन आठ करोड़ का यह लक्ष्य अगले महीने सितंबर के दूसरे सप्ताह तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस योजना के तहत सरकार 18 अगस्त, 2019 तक 7 करोड़ 82 लाख गैस कनेक्शन जारी कर चुकी है।

सात करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को दिए गए मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को 18 अगस्त, 2019 तक 7 करोड़ 82 लाख मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।

सात करोड़वां कनेक्शन को इस योजना के लागू होने के महज 34 महीनों के अंदर ही जारी कर दिया गया, जो कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक शानदार उपलब्धि है। प्रत्येक दिन लगभग 69,000 कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं। देश में एलपीजी के विस्तार में भारी उछाल आया है और यह 2014 में 55 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 93 प्रतिशत हो गया है। कुल लाभार्थियों में से 42 प्रतिशत एससी/ एसटी वर्ग के हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 86 प्रतिशत पीएमयूवाई लाभार्थी अपने सिलेंडर को रिफिलिंग करवाने जा रहे हैं और प्रति लाभार्थी औसत रिफिलिंग लगभग 6.5 सिलेंडर है।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता
आज इसी योजना का असर है कि साफ ईंधन यानि गैस पर खाना बनाने वाले परिवारों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की इस पहल से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता बन गया है। एशिया एलपीजी सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम सचिव एमएम कुट्टी ने कहा कि एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़त हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी पहुंच बढ़ने से एलपीजी उपभोग में औसतन 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे 2.25 करोड़ टन के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता बन गया है।

2019 तक देश के हर परिवार के पास होगा गैस कनेक्शन
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 1 मई, 2016 को लॉन्च होने के बाद से अब तक 7 करोड़ 82 लाख से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस वक्त देश में करीब 26.30 करोड़ गैस कनेक्शन हैं। 2011 की जनगणना के समय देश में 24.7 करोड़ परिवार (हाउसहोल्ड) थे। दिसंबर तक देश में कुल परिवार की संख्या करीब 28 करोड़ होगी। मोदी सरकार की योजना इस अवधि तक हर परिवार में गैस पहुंचाने की है। लक्ष्य को हासिल करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की पात्रता का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत बाकी बचे सभी घर को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिया जाएगा।

उज्ज्वला की वजह से 93% परिवारों में अब रसोई गैस पर बनता है खाना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब महिलाओं को चूल्हे के धुएं से आजादी दिलाने और उनके बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर उज्ज्वला योजना शुरू की थी। इसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाता है। आज इसी योजना का असर है कि देश में साफ ईंधन यानि गैस पर खाना बनाने वाले परिवारों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है।

रसोई गैस पर खाना बनाने वाले परिवारों की संख्या 38% बढ़ी
गौरतलब है कि चार वर्ष पहले देश के सिर्फ 55 प्रतिशत परिवारों में ही रसोई गैस पर खाना बनता था, वहीं आज यह आंकड़ा 93 प्रतिशत पहुंच गया है। यानि रसोई गैस पर खाना वाले परिवारों की संख्या में रिकॉर्ड 38 फीसदी की वृद्धि हुई है। मोदी सरकार की इस स्कीम के तहत बीपीएल परिवारों की वयस्क महिलाओं के नाम पर मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है। इस योजना के तहत एससी-एसटी परिवार, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थी, अंत्योदय अन्न योजना, जंगल में रहने वाले लोग, अति पिछड़े लोग, चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी, नदियों के बीच बने द्वीपों पर रहने वाले लोग शामिल हैं। 

मार्च तक नॉर्थ ईस्ट के 80 फीसदों घरों में एलपीजी कनेक्शन
मोदी सरकार के काम की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों के 80 फीसदी घरों में वर्ष 2030 तक एलपीजी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार ने इस दिशा में इतनी तेजी से काम किया है कि एक दशक पहले यानि मार्च, 2019 तक ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। आपको बता दें कि 2015-16 में पूर्वोत्तर राज्यों में रसोई गैस की पहुंच 44 प्रतिशत घरों तक ही थी, जो अब बढ़ कर 76 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अगर इसी स्पीड के साथ दूरदराज के इलाकों में एलपीजी कनेक्शन दिए गए तो जल्द ही वहां 80 फीसदी से अधिक घरों में एलपीजी पहुंच जाएगी।

बीमारी से भी मुक्ति दिला रही है प्रधानमंत्री मोदी की उज्ज्वला योजना
उज्ज्वला योजना से गरीब महिलाओं को चूल्हे के धुएं के साथ-साथ बीमारी से भी मुक्ति मिल रही है। उज्ज्वला योजना से अब सांस भी सेहतमंद होने लगी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कारण महिलाओं में सांस संबंधी बीमारी के मामलों में 20 प्रतिशत कमी आई है। लोकसभा में एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि चूल्हे के धुएं के कारण गरीब महिलाएं सबसे ज्यादा दमा-खांसी से पीड़ित होती हैं। यह योजना दमा-खांसी के मामलों में 20 प्रतिशत तक कमी लाने में भी सफल रही है। एक रिसर्च से पता चला है कि जहां एलपीजी रसोई गैस का इस्तेमाल होता है, वहां सांस के रोगियों की संख्या में 20 प्रतिशत की कमी आई है। ‘इंडियन चेस्ट सोसाइटी (ICS)’ और ‘चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन (CRF)’ ने दो साल की पड़ताल के बाद यह पाया है कि जिस रसोई में एलपीजी पहुंची है, वहां श्वास रोग और अन्य बीमारियां 20 प्रतिशत तक घटी हैं। वर्ष 2016 में 880 शहर और कस्बों में 13,500 डॉक्टरों ने ओपीडी में आए 2.05 लाख रोगियों के मर्ज के आधार पर वर्गीकरण किया। इस वर्ष नौ मई, 2016 को उज्ज्वला योजना लागू हुई तो इन्हीं रोगियों का क्षेत्रवार और एलपीजी प्रयोग के आधार पर विश्लेषण किया गया। जहां एलपीजी का प्रयोग कम है, वहां श्वास रोगी ढाई गुना अधिक मिले।

मोदी सरकार दिन-रात गरीबों और वंचितों को कल्याण के बारे में ही सोचती है। एक नजर डालते हैं उन योजनाओं पर जो देश में महिलाओं, वंचितों, किसानों,  गरीबों, आदिवासियों के आर्थिक और सामाजिक विकास में सहयोग कर रही है।

सिर्फ गरीबों के कल्याण के लिये सोचती है मोदी सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार की योजनाओं और नीतियों पर नजर डालें तो उनमें से अधिकतर गरीबों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। मोदी सरकार के शासन काल में अबतक गरीबों, किसानों और समाज के दबे-कुचले लोगों के कल्याण के लिये जितने काम हुए और हो रहे हैं, बीते 70 साल में कभी नहीं हुए। सबसे बड़ी बात ये है कि ये सारी योजनाएं जन-कल्याण के लिये हैं, न कि लोकप्रियता बटोरने के लिये। तथ्य ये है कि सरकार की प्राथमिकता पिछड़ों को समाज की मुख्यधारा में लाकर देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाना है।

गरीबों को पक्के मकान
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत गरीबों के लिए एक करोड़ पक्के मकान बनाए जा चुके हैं। मोदी सरकार ने 2022 तक हर नागरिक के सिर पर पक्की छत का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके लिये सरकार युद्धस्तर पर जुटी हुई है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में मूल रूप से दलित, पिछड़े और आदिवासियों को ही इसका फायदा मिलेगा। 

करीब 35 करोड़ गरीबों के खुले जनधन खाते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गरीबों को बैंकों से जोड़ने के लिए जन धन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत न सिर्फ 35 करोड़ 75 लाख से ज्यादा गरीबों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, बल्कि 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन जनधन खातों में जमा हैं।

खुले में शौच से मुक्ति
खुले में शौच करने वालों में ज्यादातर गरीब और खासकर दलित व आदिवासी रहे हैं जिनके पास अपना शौचालय नहीं था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2 अक्टूबर, 2014 के बाद से देश भर में 7 जून, 2019 तक 9,59,86,333 घरों में शौचालय बनाए जा चुके हैं। 5,61,970 गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच से मुक्ति मिल चुकी है। 

गांवों में दूर हुआ अंधेरा
मोदी सरकार ने आते ही यह पता लगाया कि 18, 452 गांवों में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंची थी। सरकार ने इस लक्ष्य को भी समय से पहले ही पूरा कर लिया है। अब देश के हर गांव में बिजली पहुंच चुकी है। दलित-आदिवासी और पिछड़े जो अब तक अंधेरे में रहने को मजबूर थे, उन्हें रोशनी मिल गयी है। ये लोकप्रियता के लिये नहीं हो रहा है, ये गरीबों के कल्याण के लिये है।

सबसे पिछड़े जिलों के उत्थान की सोच
पिछड़ों और गरीबों के कल्याण के लिये मोदी सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगता है कि सरकार ने सबसे पहले देश के सबसे पिछड़े 115 जिलों में ही पहले विकास की योजना बनाई है। इस योजना पर नीति आयोग बाकी संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से काम करेगा। ये बात किसी से छिपी नहीं कि सबसे पिछड़े जिलों का मतलब क्या है? ये वो जिले होते हैं जहां आम तौर पर दलित और आदिवासियों की तादाद अधिक होती है। यानी मोदी सरकार की नजर जरूरतमंदों के उत्थान पर है, अपनी लोकप्रियता पर नहीं।

ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाया जा रहा है। इसके तहत 18 साल से 35 साल के ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाने के लिए कौशल प्रशिक्षण का इंतजाम किया गया है। इस योजना के तहत इस साल 30 जून तक 655 केंद्रों में 329 ट्रेड के लिये 38,057 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, इनमें से 24,103 युवाओं को रोजगार भी मिल चुका है। वहीं पिछले साल कुल 84,900 युवाओं को प्रशिक्षण मिलने के बाद रोजगार प्राप्त हो गया था।

स्टैंड अप इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देशभर में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में ऋणों के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हर बैंक को कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि दलित, पिछड़े और महिलाओ को खोज कर इस स्कीम से उन्हें जोड़ें। 

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
गरीबी के खिलाफ लड़ाई और बेहतर रोजगार अवसर के लिए युवाओं को कुशल बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई। जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय लोगों की जरूरतों और आवश्‍यकताओं के अनुरूप ढांचा तैयार करने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। 163 प्राथमिकता वाले जिलों (जनजातीय बहुल) में से प्रत्‍येक में एक बहु-कौशल संस्‍थान की स्‍थापना की योजना बनाई गई है। इसके तहत अबतक 398,164 को कम समय का प्रशिक्षण देकर रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया गया है।

अटल पेंशन योजना
सरकार की यह एक और अहम योजना है। इससे किसी भी नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के 18 से 40 साल के लोगों को पेंशन फायदों के दायरे में लाना है। इससे उन्हें हर महीने न्यूनतम भागीदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी। इस योजना के तहत अबतक 1 करोड़ 56 लाख लोगों का पंजीकरण हो चुका है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना
यह सरकार के सहयोग से चलने वाली जीवन बीमा योजना है। इसमें 18 साल से 50 साल तक के भारतीय नागरिक को 2 लाख रुपये का बीमा कवर सिर्फ 330 रुपये के सलाना प्रीमियम पर उपलब्‍ध है। इस योजना के तहत अब तक 5 करोड़ 98 लाख लोग पंजीकरण करा चुके हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
इसके तहत किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं। यदि मौसम के प्रकोप से या किसी अन्‍य कारण से फसल को नुकसान पहुंचता है तो यह योजना किसानों की मदद करती है। अब तक 14 करोड़ 24 लाख किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पंजीकरण करा चुके हैं।

मिट्टी की सेहत के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉयल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अभी तक 20 करोड़ 34 लाख से अधिक किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं।

हर खेत में पानी
प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के तहत सरकार का लक्ष्य देश के हर खेत तक पानी पहुंचाना। इसमें पांच सालों (2015-16 से 2019-20) के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है।

किसानों के लिए ऋण सुविधा बढ़ी
खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा बढ़ायी गयी है। अब 11 लाख करोड़ ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में खेती की जाए की जानकारी किसानों को दी जा रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है।

नीम से बदली लाखों महिलाओं की तकदीर
एक समय था जब गुजरात ने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से देश को एक नई राह दिखाई और पूरे भारत में दूध के उत्पादन में क्रांति आ गई। दशकों बाद उसी गुजरात से आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए यूरिया पर नीम का लेप चढ़ाने का विजन दिया। उनका ये विजन भारतीय कृषि के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। इससे यूरिया पर सब्सिडी के जरिये होने वाला भ्रष्टाचार तो रुका ही है लाखों गरीब महिलाओं की किस्मत चमक गई है। उदाहरण के तौर पर सिर्फ नीम के बीज इकट्ठा करने के लिये गुजरात के 4 हजार से अधिक गांव में लगभग 25 करोड़ रुपये की आय का नया श्रोत निकल आया है। इसका फायदा सीधे तौर पर वहां की करीब 2.25 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है।

मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का विस्‍तार
एक कुपोषित महिला अधिकांश तौर पर कम वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म देती है। उन्हीं की मदद के लिये ये योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसम्‍बर, 2016 को राष्‍ट्र को दिये गये अपने संबोधन में सभी जिलों में मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के अखिल भारतीय विस्‍तार की घोषणा की थी और यह 1 जनवरी 2017 से लागू है। इससे करीब 51.70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की उम्‍मीद है।

मिशन इंद्रधनुष
इस योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों में रोग-प्रतिरक्षण की प्रक्रिया को तेज गति देना है। इसमें 2020 तक बच्‍चों को सात बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए वैक्‍सनेशन की व्‍यवस्‍था की गई है। इस योजना के तहत अबतक 3.38  करोड़ बच्चों का टीकाकरण कराया जा चुका है।

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