Home पोल खोल …तो चिदंबरम हैं एयरसेल-मैक्सिस फर्जीवाड़े के ‘मास्टरमाइंड’!

…तो चिदंबरम हैं एयरसेल-मैक्सिस फर्जीवाड़े के ‘मास्टरमाइंड’!

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कहा जाता है कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है, लेकिन केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान भ्रष्ट कार्यसंस्कृति ने अपनी जड़ें जमा ली थीं और लोकलाज को ताक पर रख दिया था। कोयला घोटाला, टू जी घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला… जैसे महाघोटालों की लंबी फेहरिस्त है। दरअसल सत्ता के दंभ में कांग्रेसियों ने सिर्फ यही सीखा कि अमीर पूंजीपतियों के साथ मिल कर देश के संसाधनों को कैसे लूटा जाए? यूपीए -1 और यूपीए-2 की सरकार के दौरान कांग्रेस की ये भ्रष्ट कार्यसंस्कृति परवान पर थी। उस दौर में देश के वित्त मंत्री और गृह मंत्री रह चुके पी चिदंबरम पर भी जब भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के आरोप लग रहे हों तो सहज ही कांग्रेस के भ्रष्टाचार की खुल जाती है।

शक के घेरे में पी चिदंबरम
एयरसेल-मैक्सिस मामले में गलत तरीके (गैर कानूनी) से अनुमति देने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन इकनॉमिक अफेयर्स (CCEA) को दरकिनार करने में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की कथित भूमिका प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शक के घेरे में आ गई है। ईडी के अनुसार तत्कालीन वित्त मंत्री 600 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट को अनुमति देने के लिए सक्षम थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 3,500 करोड़ रुपये के लिए फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) के प्रस्ताव को स्वीकृत किया।

प्रवर्तन निदेशालय के आरोप
प्रवर्तन निदेशाल के अनुसार यह प्रपोजल को ‘गलत तरीके (गैर कानूनी) से 180 करोड़ रुपये का निवेश दिखाकर मंजूर किया गया, जिससे इस प्रोजेक्ट को CCEA के पास भेजने की जरूरत न पड़े। एफडीआई में 37.5 करोड़ डॉलर (165 करोड़ रुपये से अधिक) के प्रेफरेंस शेयर जारी करने के जरिए अप्रत्यक्ष निवेशक शामिल था और इस तथ्य को छिपाया गया था। ईडी का दावा है कि उसकी जांच में पता चला है कि FIPB के मंजूरी देने के कुछ दिनों के अंदर इस डील में इक्विटी शेयर्स बेचने वाली एयरसेल टेलीवेंचर्स लिमिटेड (ATVL) ने ऐडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को 26 लाख रुपये का भुगतान किया था।

यह है मामला
दरअसल यह मंजूरी मैसर्स ग्लोबल कम्युनिकेशन सर्विसेज होल्डिंग्स लिमिटेड ने 80 करोड़ डॉलर (करीब 3,500 करोड़ रुपये) के लिए मांगी थी। प्रवर्तन निदेशालय उन परिस्थितियों की जांच कर रहा है जिनमें पी चिदंबरम ने मार्च 2006 में यह मंजूरी दी थी। चिदंबरम के बेटे कार्ति और उनकी कंपनियों को इन मंजूरियों की व्यवस्था करवाने से कथित तौर पर फायदा मिलना था। ईडी का कहना है कि मंजूरियां मिलने के कुछ दिनों के अंदर ही कार्ति की कंपनियों को भुगतान प्राप्त हुए थे।

फर्जीवाड़ा कर किया गया भुगतान
ईडी के अनुसार कार्ति और पी चिदंबरम के भतीजे को कथित तौर पर एक लीगल कम्प्लायंस सॉफ्टवेयर के लिए मैक्सिस ग्रुप की कंपनी से लगभग दो लाख डॉलर की रकम मिली थी। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मैक्सिस ग्रुप से भुगतान मिलने के काफी बाद में शुरू हुआ था। वह सॉफ्टवेयर केवल भारत में इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था और वह भारत में लागू कानूनों से जुड़ा था और इस वजह से मलेशिया की कंपनी के लिए यह बेकार था। इसके अलावा भी कार्ति की एक अन्य कंपनी को चिदंबरम की ओर से दी गई अन्य मंजूरियों के लिए भुगतान मिला था।

कार्ति चिदंबरम की संपत्तियां जब्त
ईडी ने रविवार को ही एयरसेल मैक्सिस डील मामले में चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कार्ति से जुड़ी 90 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति, बैंक अकाउंट और एफडी को अटैच कर दिया है। दरअसल कार्ति चिदंबरम ने अधिकतर बैंक खातों को बंद करने और संपत्तियों को बेचने के बाद धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत 90 लाख रुपये के सावधि जमा और बैंक खातों को जब्त करने के आदेश दिए थे। जांच में पाया गया कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के अंतर्गत अपने अधिकारों से बाहर जाकर आदेश दिए गए।

किसी से नहीं डरते पी चिदंबरम
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार जान बूझकर परेशान करने की कार्रवाई कर रही है। चिदंबरम कितनी भी सफाई दे दें, लेकिन बाप-बेटे के द्वारा भ्रष्टाचार का यह खेल उसी भ्रष्ट कार्यसंस्कृति का हिस्सा है जो कांग्रेस नीत सरकारें वर्षों से करती आ रही है। कांग्रेस ने 70 वर्ष की सत्ता में भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं तोड़ दीं और जनता के टैक्स मनी को जमकर खुले हाथों से लूटा है। अब मांग हो रही है कि देश का पैसा लूटने वाले सभी भ्रष्ट पूर्व कांग्रेसियों और उनके रिश्तेदारों पर उनकी चल, अचल, बेनामी संपत्ति की सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग द्वारा जांच की जानी चाहिये।

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