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पीएम मोदी की पहल पर ‘पापी प्रथा’ से मुक्ति के लिए तीन तलाक विधेयक मंजूर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) बिल यानि तीन तलाक विधेयक को मंजूरी दे दी गई। अब यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्‍त, 2017 को तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, इस बिल में तुरंत ट्रिपल तलाक को आपराधिक करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता में बनी मंत्री समूह ने देश को लोगों से सलाह मशवरे के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था। इस ड्राफ्ट को तैयार करने वाले मंत्री समूह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी थे।

तीन तलाक विधेयक की महत्वपूर्ण बातें

  • प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा।
  • इसके तहत पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे। 
  • मसौदा कानून के तहत, किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा। 
  • मसौदा कानून के अनुसार, एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा। ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है। यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा। 
  • तलाक और विवाह का विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है और सरकार आपातकालीन स्थिति में इस पर कानून बनाने में सक्षम है, लेकिन सरकारिया आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्यों से सलाह करने का फैसला किया।
  • प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होना है। 

सुप्रीम कोर्ट ने बताया था तीन तलाक को असंवैधानिक 
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त, 2017 को तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया था। पांच जजों में से तीन जजों… न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया। वहीं, चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने अपनी अलग राय रखी। यानि जजों ने 3-2 से दिये गए अपने निर्णय में इसे असंवैधानिक करार दे दिया।अदालत ने केंद्र से छह महीने के अंदर कानून बनाने को कहा था। 

लाल किले के प्राचीर से पीएम मोदी ने किया था वादा
प्रधानमंत्री ने अक्सर कहा है कि तीन तलाक के मुद्दे पर देश की कुछ पार्टियां वोट बैंक की भूख में 21वीं सदी में मुस्लिम औरतों से अन्याय करने पर तुली हैं। उनका साफ मानना है कि मुस्लिम महिलाओं को समानता का अधिकार मिलना ही चाहिए। लाल किले के प्राचीर से जब पीएम मोदी ने ट्रिपल तलाक का मुद्दा उठाया तो करोड़ों मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। केंद्र सरकार की दलील पर ही सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने के अंदर कानून बनाने का निर्देश दिया था। 

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पीएम मोदी की आवाज ने दी पीड़ित महिलाओं को ताकत 
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आने से पहले प्रधानमंत्री मोदी कम से कम छह बार सार्वजनिक मंच से तीन तलाक के मुद्दे को आवाज दी। उन्होंने पीड़ित महिलाओं के कानूनी और मानवीय हक को जायज ठहराया और हर बार साथ देने की बात दोहराई। प्रधानमंत्री 24 अक्टूबर, 2016 को यूपी के महोबा की धरती से ‘तीन तलाक’ को 21वीं सदी में चलने वाला सबसे बड़ा अन्याय बताया था। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की खुली अपील की थी। जिसके बाद तीन तलाक की कुप्रथा पर कठोर प्रहार करने का अभियान चल पड़ा। 

सुप्रीम कोर्ट ने इसे कहा था ‘पापी प्रथा’
इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है। ये गैर-जरूरी है। कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई ‘पापी प्रथा’ आस्था का विषय हो सकती है। 29 अप्रैल, 2017 को भी पीएम मोदी ने इस कुप्रथा पर अपनी राय जाहिर की थी।

केंद्र ने कहा था वैध नहीं है ट्रिपल तलाक
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी ओर से दिए हलफनामे में कहा था कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने माना था कि वह सभी काजियों को अडवाइजरी जारी करेगा कि वे ट्रिपल तलाक पर न केवल महिलाओं की राय लें, बल्कि उसे निकाहनामे में शामिल भी करें।

शायरा बानों ने दाखिल की थी याचिका
तीन तलाक की पीड़ित एक मुस्लिम महिला शायरा बानो ने इसके खिलाफ कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी। इस पर शायरा का तर्क था कि तीन तलाक न तो इस्लाम का हिस्सा है और न ही आस्था का मामला। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था ये है कि तीन तलाक मेरे और ईश्वर के बीच में पाप है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी कहता है कि ये बुरा है, पाप है और अवांछनीय है।

22 मुस्लिम देशों में ट्रिपल तलाक बैन 

  • मिस्र दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां तीन तलाक को पहली बार बैन किया गया था। साल 1929 में मुस्लिम जजों की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दे दिया था। साल 1929 में ही मिस्र को नजीर मानते हुए सूडान की अदालत ने अपने देश में तीन तलाक को बैन कर दिया।
  • 1945 में भारत और पाकिस्तान एक साथ अलग हुए लेकिन, तीन तलाक को बैन करने में हमारा पड़ोसी हमसे कई कदम आगे है। पाकिस्तान में सन 1956 में ही तीन तलाक को बैन कर दिया गया था। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा ने 1955 में पहली पत्नी को तलाक दिए बिना अपनी सेक्रेटरी से शादी कर ली थी। इसी घटना के बाद देशभर की महिलाएं उठ खड़ी हुईं और तीन तलाक को बैन कर दिया गया।
  • भारत के सहयोग से 1971 में पाकिस्तान से अलग हुए बांग्लादेश ने भी संविधान में संशोधन कर तीन तलाक को बैन कर दिया था। यहां तलाक से पहले यूनियन काउंसिल के चेयरमैन को शादी खत्म करने से जुड़ा एक नोटिस देना होता है।
  • भारत के एक ओर पड़ोसी देश श्रीलंका में मैरिज एंड डिवोर्स (मुस्लिम) एक्ट 1951 के तहत पत्नी से तलाक चाहने वाले पति को एक मुस्लिम जज को नोटिस देना होगा, जिसमें उसकी पत्नी के रिश्तेदार, उसके घर के बड़े लोग और इलाके के प्रभावशाली मुसलमान भी शामिल होंगे। ये सभी लोग दोनों के बीच सुलह की कोशिश करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर 30 दिन बाद तलाक को मान्य करार दिया जाएगा। तलाक एक मुसलमान जज और दो गवाहों के सामने होता है।
  • साल 1959 में इराक दुनिया का पहला अरब देश बना था, जिसने शरिया कोर्ट के कानूनों को सरकारी कोर्ट के कानूनों के साथ बदल दिया। इसके साथ ही यहां तीन तलाक खत्म कर दिया गया। इराक के पर्सनल स्टेटस लॉ के मुताबिक ‘तीन बार तलाक बोलने को सिर्फ एक ही तलाक माना जाएगा। 1959 के इराक लॉ ऑफ पर्सनल स्टेटस के तहत पति और पत्नी दोनों को ही अलग-अलग रहने का अधिकार दिया गया है।
  • करीब 74 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या वाले देश सीरिया में तीन तलाक के नियम को इस तरह से तैयार किया गया है कि कोई भी पुरुष आसानी से पत्नी से अलग नहीं हो सकता है। यहां 1953 में बने कानून के तहत तलाक जज के सामने ही वैध माना जाता है।
  • साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, इरान, ब्रुनेई, मोरक्को, कतर और यूएई में भी तीन तलाक पर बैन है।

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