Home समाचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नीतियों का असर, मसाला निर्यात में बड़ी छलांग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नीतियों का असर, मसाला निर्यात में बड़ी छलांग

310
SHARE

खेती से जुड़े लोगों का जीवन को बेहतर हो, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का लक्ष्य किसानों की आय को 2022 में दोगुनी करना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार एक के बाद एक योजनाएं बनाकर उसे धरातल पर उतार रही है। उन योजनाओं का असर अब दिखने लगा है। भारतीय मसालों के निर्यात में जबरदस्त उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अप्रैल से सितंबर के बीच 24 प्रतिशत मसालों का निर्यात बढ़ा है। यह आंकड़ा मसाला बोर्ड ने जारी किए।

भारतीय मसालों के निर्यात में 24 प्रतिशत की उछाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुचारू और संगठित नीति के कारण भारतीय मसालों की मांग विश्व में बढ़ी है। भारतीय मसाला का निर्यात 2017 की अप्रैल-सितंबर छमाही में मात्रा के आधार पर 24 प्रतिशत बढ़ा है जबकि रुपये में मूल्य के आधार पर इसमें दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड के जारी किए आंकड़े के अनुसार, भारत का निर्यात 5,57,525 टन रहा जो 2016 की इसी अवधि में 4,50,700 टन था। रुपये में मूल्य के आधार पर अप्रैल-सितंबर 2017 में निर्यात किए गए मसालों की कीमत 8,850.53 करोड़ रुपये का रहा जबकि 2016 की इसी अवधि में निर्यात किए गए मसालों की कीमत 8,700.15 करोड़ रुपये था। मसाला बोर्ड के चेयरमैन डॉ. ए. जयतिलक ने बताया कि विश्व के बाजार में मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची, लहसुन और मिंट उत्पाद सबसे ज्यादा मांग वाले भारतीय मसाले रहे हैं।

बागवानी फसल का रिकॉर्ड उत्पादन रहने का अनुमान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों के कल्याण के लिए कृत संकल्पित हैं। उनकी पहल पर केंद्र सरकार ने कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कर दिया है। सरकार की योजनाओं का प्रभाव कृषक उत्पाद पर दिखने लगा है। 2017-18 में बागबानी फसल जैसे सब्जियों और फलों का उत्पादन रिकॉर्ड 305.4 मिलियन टन होने की संभावना है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 1.6% अधिक है और पिछले 5 वर्षों के औसत से 8% अधिक है। 2017-18 में सब्जियों का उत्पादन 181 मिलियन टन और फलों का उत्पादन 95 मिलियन टन होने की संभावना है।

डेयरी से जुड़े किसानों की आय में 23.77 प्रतिशत की वृद्धि
मोदी सरकार नीतियों और कार्यक्रमों का डेयरी क्षेत्र में असर दिखने लगा है। डेयरी का व्यवसाय भूमिहीन एवं सीमांत किसानों के लिए जीवन यापन एवं साद्य सुरक्षा प्रदाने करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। यूपीए सरकार के कार्यकाल 2011-14 की तुलना में मोदी सरकार के कार्यकाल 2014-17 में डेयरी से जुड़े किसानों की आय 23.77 प्रतिशत बढ़ी है। वर्ष 2013-14 की अपेक्षा 2016-17 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी 14.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 307 ग्राम से बढ़कर 351 ग्राम हो गई। कृषि मंत्रालय के अनुसार 7 करोड़ ग्रामीण किसान परिवार डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं जिनके पास कुल गायों की 80% आबादी है। बीते 3 वर्षों में प्रति वर्ष 5.53% की दर से दूध उत्पादन बढ़ रहा है जो विश्व में दुग्ध उत्पादन की वार्षिक दर 2.09 प्रतिशत से ढाई गुना से ज्यादा है। 

विश्व का एक बड़ा झींगा निर्यातक बन चुका है भारत
इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद से उठाए गए कदमों के चलते ही 2016 में भारत विश्व एक बड़ा झींगा निर्यातक देश बन चुका था। तब भारत से झींगा निर्यात सालाना 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार 2022 तक यह आंकड़ा 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक, “हम लोग 2022 तक भारत से झींगा निर्यात में दोगुनी वृद्धि की उम्मीद करते हैं। यह मुख्यत: झींगा की मजबूत मांग, उसकी उच्च गुणवत्ता, उत्पादन में सुधार और आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मत्स्य पालन के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के कारण संभव होगा। वहीं हमारे एशियाई प्रतिद्वंदी संरचनात्मक मुद्दे और बढ़ते हुए घरेलू उपभोग की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”

वर्तमान समय में वैश्विक झींगा उद्योग का कारोबार करीब 30 बिलियल अमेरिकी डॉलर है। इस बाजार में मूल्य के आधार पर भारत की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने और बढ़ती हुई अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए मोदी सरकार ने बुनयादी संरचना के विकास पर जोर दिया है। साथ ही निर्यातकों को कई सुविधाएं भी प्रदान की हैं। सरकार की इन कोशिशों से जहां झींगा निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होगी, वहीं किसानों की आय दोगुनी करने में भी मदद मिलेगी।

वर्ष 2014 में सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के अन्नदाताओं के कल्याण के लिए काम करने लगे। लगभग साढ़े तीन साल के कार्यकाल में किसानों के लिए मोदी सरकार की योजनाओं का असर दिखने लगा है। किसानों को समर्पित मोदी सरकार की योजनाओं की एक झलक

राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM)
राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किसानों और उनके उत्पाद खरीदने वालों के बीच बिचौलियों की मौजूदगी को खत्म कर दिया। यह एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो कृषि से संबंधित उपजों के लिए एक ऑनलाइन राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराता है। इस पोर्टल से खरीददारों और विक्रेताओं को आसानी से जानकारी मिल जाता है। इससे वास्तविक मांग एवं आपूर्ति पर आधारित वास्तविक मूल्य तय हो जाता है। ई-नाम के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का शीघ्र भुगतान संभव हुआ। पारंपरिक बाजार बिक्री में जहां भुगतान में 10-15 दिन तक का समय लगता था, ई-नाम के जरिए केवल कुछ घंटों में भुगतान सुनिश्चित हो गया है। ई-नाम में अब तक 455 मंडियां जुड़ी हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
किसानों को न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम मुआवजा ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विशेषता है। इसके तहत किसानों को अब 33 फीसदी फसल नुकसान होने पर भी मुआवजा मिलता है। पहले नुकसान सीमा 50 प्रतिशत की थी। किसानों के हित में बनने वाली किसी भी अन्य योजना के मुकाबले इस योजना का महत्त्व कई गुना अधिक इसलिए है, क्योंकि यह अन्य योजनाओं की समीक्षा कर, उसके गुण-दोषों की विवेचना के आधार पर बनाई गई है। इसके तहत खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है। जबकि वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है।

अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया
मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ा दिया गया। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी हुई कि जीना आसान हो गया।

गन्ना किसानों का बकाया दिलवाया
गन्ना उत्पादक किसानों को सालों से उनका बकाया नहीं मिल रहा था। मोदी सरकार ने किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 4,305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी। इससे 32 लाख किसानों को फायदा हुआ। इस तरह से 2014-15 के 99.33 प्रतिशत और 2015-16 के 98.21 प्रतिशत किसानों को अपना बकाया रुपया वापस मिल चुका है। गन्ना किसानों के लिए मोदी सरकार वरदान बनकर आयी।

धान खरीद में लेवी खत्म
धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है।

खाद की किल्लत खत्म
मोदी सरकार ने खाद की किल्लत दूर करने के लिए नीम कोटिंग यूरिया का प्रयोग शुरू किया। सरकार ने सभी उर्वरक कंपनियों को सौ प्रतिशत नीम कोटेड यूरिया बनाने के दिशा-निर्देश दिए। उसके बाद से खाद का उपयोग सिर्फ और सिर्फ खेती में होना सुनिश्चित हो गया। इससे खाद की कालाबाजारी रूक गई। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलने लगा। नीम कोटेड यूरिया से खाद की कमी दूर हुई, सब्सिडी की चोरी खत्म हुई। नीम कोटेड यूरिया ने फसल की अच्छी सेहत भी सुनिश्चित की।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
हर खेत को पानी कभी बीजेपी का नारा हुआ करता था। इसे मोदी सरकार ने साकार कर दिखाया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 2016-17 में Per Drop More Crop की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंतर्गत लाया गया। खेती में यह योजना किसानों के लिए मददगार साबित हो रही है और उनके खेतों का पैदावार बढ़ रहा है।

सॉइल हेल्थ कार्ड से सुधरी खेतों की सेहत
किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। फसल की उपज पर इसका सकारात्मक असर पड़ा है। अब तक 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

जैविक खेती से बदली उन्नत कृषि की परिभाषा
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10 हजार समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया है। अब तक राज्य सरकारें 7,186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015-17 तक 143.13 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

किसानों को ऋण में राहत
मोदी सरकार ने खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा भी बढ़ायी है। अब 10 लाख करोड़ का कृषि ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। यूपी जैसे राज्यों ने किसानों के लिए बड़े पैमाने पर ऋण माफ कर दिया है। सरकार 3 लाख रुपये तक के अल्प अवधि फसल ऋण पर 3 प्रतिशत दर से ब्याज में भी रियायत देती है। ब्याज रियायत योजना 2016-17 के अंतर्गत, प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में 2 प्रतिशत की ब्याज रियायत पहले वर्ष के लिए बैंकों में अलग से उपलब्ध रहेगी।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के अंतर्गत 29 राज्यों के 638 जिलों में दाल, 25 राज्यों के 194 जिलों में चावल, 11 राज्यों के 126 जिलों में गेहूं और देश के 28 राज्यों के 265 जिलों में मोटा अनाज के लिए ये योजना लागू की गई। इससे चावल, गेहूं, दालों, मोटे अनाजों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा सकेगा। एनएफएसएम के अंतर्गत किसानों को बीजों के वितरण (एचवाईवी/हाईब्रिड), बीजों के उत्पादन (केवल दालों के), आईएनएम और आईपीएम तकनीकों, संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकीयों/उपकणों, प्रभावी जल प्रयोग साधन, फसल प्रणाली जो किसानों को प्रशिक्षण देने पर आधारित है, को लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय तिलहन और तेल मिशन कार्यक्रम
राष्ट्रीय तिलहन और तेल (एनएमओओपी) मिशन कार्यक्रम 2014-15 से लागू है। इसका उद्देश्य खाद्य तेलों की घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए तिलहनों का उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है। इस मिशन की विभिन्न कार्यक्रमों को राज्य कृषि/बागवानी विभाग के जरिये लागू किया जा रहा है।

बागवानी के समन्वित विकास के लिए मिशन
बागवानी के समन्वित विकास के लिए ये मिशन (एमआईडीएच) फलों, सब्जियों के जड़ और कन्द फसलों, मशरूम, मसालों, फूलों, सुगंध वाले वनस्पति,नारियल, काजू, कोको और बांस सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लागू है। इस मिशन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड और बागवानी के लिए केन्द्रीय संस्थान, नागालैंड को शामिल कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना
किसी भी कार्य का व्यावसायिक तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण उस कार्य में प्रगति की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करवाना है। विशेषकर ऐसे युवाओं को, जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं अथवा खेती से विमुख हो रहे हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा कुशल कामगारों को विकसित किया जाता है। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रमों में सुधार करना, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्‍य पहलुओं के साथ व्‍यवहार कुशलता और व्‍यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा शुरू
मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति मोदी सरकार ने शुरू की। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ। इसके लिए एक विशेष कृषि एप भी शुरू किया। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंचने लगी हैं।

किसानों को समर्पित खास चैनल
पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मंत्र दिया था- हर खेत को पानी और हर हाथ को काम। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हल के पीछे चल रहे आदमी की सुध ली और देश को ‘किसान चैनल’ की सौगात दी। 26 मई, 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह ‘किसान चैनल’ कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है। इसमें किसानों को उत्पादन, वितरण, जोखिम, बचने के तरीके, खाद, बीज, वैज्ञानिक कृषि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।

LEAVE A REPLY