Home समाचार आजादी के आंदोलन के इतिहास को कुछ परिवारों तक सीमित किया गया-प्रधानमंत्री

आजादी के आंदोलन के इतिहास को कुछ परिवारों तक सीमित किया गया-प्रधानमंत्री

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आदिवासी या जनजातीय वर्ग के लोग विभिन्न राज्यों में रहते हैं और उन्होंने आजादी की लड़ाई में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आने वाली पीढ़ी को यह पता चलना चाहिए कि अभाव की जिंदगी जीने के बावजूद उपेक्षित वर्ग के इन लोगों ने आजादी के लिए किस प्रकार की कुर्बानी दी थी।
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को सम्मानित किया। 16 अप्रैल रविवार को गर्वनर हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में 1817 में अंग्रेजों के खिलाफ पाइका विद्रोह में शहादत देने वाले 16 परिवारों को इसके लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संघर्ष में में हिस्सा लेने वाले आदिवासियों की वीरता की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के आंदोलन की एक लम्बी श्रृंखला रही है और उन सभी सामयिक घटनाओं का स्मरण करने और उससे युवा पीढ़ी को अवगत कराये जाने की जरूरत है।

 
प्रधानमंत्री ने आजादी के आंदोलन के इतिहास को ‘कुछ समय’ और ‘कुछ परिवारों’ तक सीमित रखे जाने पर भी क्षोभ जताया। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण ओडिशा में जनजातीय वर्ग के सैंकड़ों लोगों को फांसी दी गयी थी और हजारों लोगों को जेल की सजा भुगतनी पड़ी थी। श्री मोदी ने कहा कि आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले आदिवासियों के त्याग को याद करने के वास्ते और भावी पीढ़ी को उससे शिक्षा लेने के लिए सरकार देश के विभिन्न हिस्सों में वर्चुअल म्यूजियिम स्थापित कर रही है।

 
प्रधानमंत्री की आदिवासी समाज के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने की पहल को चारों तरफ से सराहना मिल रही है। सोशल मीडिया पर तो प्रधानमंत्री को इसके लिए कोटि-कोटि धन्यवाद दिया जा रहा है।

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