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पीएम मोदी की कार्यशैली का असर, 18 साल का सबसे बेहतर ये मानसून सत्र, संसद में रिकॉर्ड कामकाज

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प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेन्द्र मोदी बिना कोई अवकाश लिए लगातार देश की प्रगति और समृद्धि के लिए काम कर रहे हैं। पीएम मोदी के काम के प्रति समर्पण का असर अब देश में दिखने लगा है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद के दोनों सदनों में काम पहले की तुलना में बढ़ा है। अभी-अभी संसद का मानसून सत्र खत्म हुआ है। 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चले इस मानसून सत्र में वर्ष 2000 के बाद सबसे ज्यादा कामकाज हुआ। संसद की लोकसभा में यह उत्पादकता 110 प्रतिशत रही जबकि राज्यसभा की उत्पादकता 68 प्रतिशत।

मानसून सत्र में कई विधेयक पारित
पीएम मोदी के काम के प्रति समर्पण के चलते मानसून सत्र के दौरान कुल 17 बैठकें हुईं। कई विधेयक पारित हुए। पारित विधेयकों में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्ज देने संबंधी संविधान (123वां संशोधन) विधेयक-2018 और उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के मद्देनजर लाया गया अनुसूचित जातियां एवं अनुसूचित जनजातियां (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक-2018 प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक-2017, भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक-2018, भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक-2018, व्यक्तियों का दुर्व्यवहार (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक-2018, दांडिक विधि (संशोधन) विधेयक-2018 और वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग (संशोधन) विधेयक-2018, राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय 2018 को भी लोकसभा ने मंजूरी प्रदान की।

अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर 11 घंटे 46 मिनट बहस
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ चार साल में पहली बार लोकसभा में तेदेपा सदस्य श्रीनिवास केसिनेनीर की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर 11 घंटे 46 मिनट की चर्चा चली। इस पर 51 सदस्‍यों ने चर्चा में भाग लिया। मत विभाजन के बाद यह प्रस्ताव गिर गया।

112 घंटे चली कार्यवाही
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की 17 दिनों की बैठक में कुल 112 घंटे कार्यवाही चली। इस दौरान कुल 22 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 21 विधेयक पारित हुए। वर्ष 2018-19 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों (सामान्य) एवं वर्ष 2015-16 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगों (सामान्य) पर चार घंटे 46 मिनट से अधिक की चर्चा हुई और इसके बाद इन्हें मतदान के लिए रखा गया एवं संबंधित विनियोग विधेयक पारित किए गए।

पिछले सत्र की तुलना में 140 प्रतिशत अधिक कामकाज
लोकसभा में रुकावटों और इसके परिणामस्वरूप किए गए स्थगनों के कारण आठ घंटे 26 मिनट का समय नष्ट हुआ तथा सभा ने 20 घंटे 43 मिनट देर तक बैठकर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उधर, राज्यसभा में समय की उपलब्धता के लिहाज से इस सत्र में 74 प्रतिशत से अधिक कामकाज हुआ जबकि पिछले सत्र में यह महज 25 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि इस सत्र में उच्च सदन से 14 विधेयक पारित किये गए जबकि पिछले दो सत्रों में दस विधेयक पारित हो सके थे। स्पष्ट है कि पिछले दो सत्रों की तुलना में यह सत्र 140 प्रतिशत अधिक फलदायी रहा। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि यदि पिछले दो सत्रों में हुए कामकाज से तुलना की जाए तो मौजूदा सत्र में 140 प्रतिशत अधिक विधायी कामकाज हुआ।

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