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मनमोहन सरकार का सबसे बड़ा घोटाला है एनपीए, देखिये यूपीए के घोटालों की फेहरिस्त

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बैंकों के डूबे कर्ज यानि एनपीए के लिए मनमोहन सिंह सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। संसदीय समिति को भेजे अपने जवाब में राजन ने कहा, ‘’यूपीए-2 के शासन काल में 2006-08 के दौरान घोटालों की जांच में सुस्ती और पॉलिसी पैरालाइसिस के कारण बैंकों का डूबा कर्ज बढ़ता चला गया।‘’ जाहिर है रघुराम राजन ने यूपीए सरकार के उस झूठ का पर्दाफाश कर दिया है जिसमें कांग्रेस मोदी सरकार को एनपीए के लिए जिम्मेदार ठहरा रही थी। आपको बता दें कि मनमोहन सरकार में टूजी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ, कोल ब्लॉक आवंटन जैसे कई घोटाले हुए, लेकिन इन सब में सबसे बड़ा घोटाला NPA है।

दरअसल यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी की सरपरस्ती में बैंकों पर दबाव बना कर कुछ बड़े उद्योपतियों को लाखों करोड़ का लोन दिलवाया गया। कांग्रेस और उनसे ताल्लुक रखने वाली कंपनियों के लूट का आलम यह था कि आजादी से लेकर वर्ष 2008 तक बैंकों ने 18 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए, जबकि 2008 से लेकर 2014 तक के बीच बैंकों ने 52 लाख करोड़ रुपये कर्ज दिए। यानि 6 साल में लगभग तीन गुना लोन बांटे गए। इतना ही नहीं मोदी सरकार को भी भ्रम में रखा गया और एनपीए की रकम महज 2 लाख करोड़ रुपये बताई गई। हालांकि जब प्रधानमंत्री मोदी ने सख्ती की तो सही तथ्य सामने आ गए और यह आंकड़ा 9 लाख करोड़ तक पहुंच गया। 

                                 यूपीए सरकार में ‘लूट’ का खेल
                घोटालों के नाम                   ‘लूट’ की रकम
             कोल ब्लॉक आवंटन, 2012                  1.86 लाख करोड़ रुपये
               2 जी स्पेक्ट्रम, 2008                 1.76 लाख करोड़ रुपये
           महाराष्ट्र इरीगेशन स्कैम,2012                  70,000  करोड़ रुपये
              कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010                    35,000 करोड़ रुपये
            सत्यम कम्प्यूटर स्कैम, 2009                    14,000 करोड़ रुपये
              स्कॉर्पियन पनडुब्बी, 2005                    1,100 करोड़ रुपये
               अगस्ता वेस्ट लैंड, 2012                    3,600 करोड़ रुपये
                टेट्रा ट्रक स्कैम, 2012                        3,000 करोड़ रुपये

बहरहाल मोदी सरकार द्वारा एनपीए वसूली के लिए शिकंजा कसा गया जिसके बाद 9 लाख 52 हजार करोड़ रुपये एनपीए में से 4 लाख करोड़ रुपये सिस्टम में वापस आ चुके हैं। आइए एक नजर डालते हैं कि कैसे मोदी सरकार की सख्ती के बाद कंपनियों को अपनी संपत्ति बेचकर अपने कर्ज की रकम चुकानी पड़ रही है। 

               मोदी राज में सूट-बूट वालों की ‘लूट’ पर लगी ब्रेक
               बैंकों के कर्ज वापसी के लिए मजबूर हुए उद्योगपति

जिंदल स्टील
अक्टूबर, 2017
रायगढ़ और अंगूल स्टील प्लांट के दो यूनिट को 1,121 करोड़ में बेचना पड़ा
अगस्त 2017
6 हजार करोड़ वसूलने के लिए SBI ने अंगूल में जिंदल इंडिया थर्मल पावर प्लांट का टेंडर मंगवाया

एस्सार ऑयल
अगस्त 2017
ESSAR ऑयल को अपना 49 प्रतिशत शेयर रुस की Rosneft कंपनी को बेचना पड़ा
SBI, ICICI, Axis, IDBI और Standard Chartered बैंकों का 70,000 करोड़ रुपया चुकाना पड़ा

जीवीके पॉवर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर
जुलाई, 2017
बकाया चुकाने के लिए 3,439 करोड़ रुपये में बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेचना पड़ा

डीएलएफ
दिसंबर, 2017
DCCDL को अपना 40 प्रतिशत हिस्सा बेच कर बैंकों का 7100 करोड़ रुपया चुकाना पड़ा

जेपी एसोसिएट्स
40 हजार करोड़ का कर्ज चुकाने के लिए 15,000 करोड़ में Ultratech और ACC को बेचना पड़ा
बैंकों ने जेपी ग्रुप की 13, 000 करोड़ की जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू की

टाटा ग्रुप
जनवरी, 2018
टाटा ग्रुप ने बैंकों के 23 हजार करोड़ में से 17 हजार करोड़ चुका दिए
सितंबर, 2018
टीसीएस के लाभांश से टाटा मोटर्स और टाटा टेलिसर्विसेज लिमिटेड का कर्ज चुकाएंगे

जीएमआर
37,480 करोड़ रुपये में 18,480 हजार करोड़ वापस किए, बकाया 19,000 करोड़ रुपये जल्द चुकाएंगे

वीडियोकॉन
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में बैंकरप्सी के तहत कंपनी बेचकर वसूला जाएगा बकाया 20 हजार करोड़

रिलायंस
45,000 करोड़ रुपये बकाये की वापसी के लिए अपने Assets बेचकर कर्ज चुकाएगी कंपनी

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