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मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिलाने पर मोदी सरकार की कटिबद्धता

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नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हाल ही में कहा कि हमारा देश संविधान के आधार पर चलता है, शरियत के आधार पर नहीं। यह बात उन्होंने तीन तलाक के विषय में कही। भारतीय संविधान में यह स्पष्ट व्यवस्था है कि उसमें प्रत्येक नागरिक के समान अधिकार सुनिश्चित हों।
हाल ही में स्वतंत्रता दिवस समारोह के संबोधन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस विषय पर चिंता प्रकट करते हुए कहा था कि तीन तलाक के चलते मुस्लिम महिलाओं की दशा अत्यंत शोचनीय बनी हुई है। इसके विरोध में जो महिलाएं आगे आकर आवाज उठा रही हैं, हमारी पूरी सहानुभूति और सहयोग उनके साथ है।

तीन तलाक है क्या
मुस्लिम शरिया कानून में तीन तलाक की व्यवस्था है, लेकिन ऐसा किन परिस्थितियों में किया जा सकता है, उसकी स्थितियां और कारण भी स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। यह और बात है कि बड़ी संख्या में मुसलमान इसके वास्तविक स्वरूप को समझे बिना या उसे नजरअंदाज करके, केवल अपनी सुविधा के अनुसार इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके अंतर्गत पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक कह के, उससे अपने संबंध-विच्छेद कर सकता है। ऐसा वह आमने-सामने मौजूद होकर भी कर सकता है और फोन, फेसबुक या वॉट्सऐप के जरिये भी कर सकता है, जैसा कि इस समय बड़ी संख्या में हो रहा है।

क्यों नहीं होना चाहिए तीन तलाक
यदि वर्तमान स्थिति की समीक्षा का जाए तो तीन तलाक के चलते मुस्लिम महिलाओं की दशा में भारी गिरावट देखने को मिली है, क्योंकि ऐसा करने वाले अधिकांश मुसलमान इसे अपनी स्वार्थपूर्ति का साधन बना रहे हैं।
इस समुदाय की महिलाओं में अशिक्षा और सजगता का अभाव उनकी हालत को और अधिक बिगाड़ देता है। संविधानप्रदत्त समानता मिलने की बात तो सिरे से खारिज हो जाती है।

सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की रुकावटें
नरेंद्र मोदी सरकार ने इस दशा को बदलने की दिशा में काफी प्रयास किए, लेकिन कोई ठोस व्यवस्था इस कारण से नहीं बन पाई, क्योंकि कई धार्मिक नेताओं द्वारा इसे धार्मिक भावनाओं से छेड़छाड़ और शरिया कानून में दखलअंदाजी कहकर गलत छवि दे दी गई। भारत तीसरा बड़ा मुस्लिम समुदाय वाला देश है। यहां तीन तलाक के मुद्दे को अभी तक मान्यता मिली हुई है, जबकि इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों में काफी पहले खारिज कर दिया गया था. इसके बावजूद प्रधानमंत्री की चिंता इस विषय में निरंतर बनी हुई है और उनका जोर जल्दी से जल्दी इसका समाधान तलाशने में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला कल्याण और विकास के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। केंद्र की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल-मंत्र पर आगे बढ़ रही है। इसका फायदा अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को भी मिल रहा है। आइए, नजर डालते हैं उन योजनाओं पर-

51 हजार रुपये का ‘शादी शगुन’
केंद्र सरकार उन अल्पसंख्यक लड़कियों को 51,000 रुपये की राशि बतौर ‘शादी शगुन’ देगी,जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करेंगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ (एमएईएफ) ने मुस्लिम लड़कियों की मदद के लिए यह कदम उठाने का फैसला किया। दरअसल प्रधानमंत्री ने पहले भी मुस्लिम समुदाय, खासकर मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा के स्तर और उनकी सामाजिक स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

मुस्लिम लड़कियां और मोदी के लिए चित्र परिणाम

अभिभावकों को मिलेगा प्रोत्साहन
दरअसल मुस्लिम समाज के एक बड़े हिस्से में आज भी लड़कियों को उच्च शिक्षा नहीं मिल पाती है। इसका एक बड़ा कारण आर्थिक तंगी है। इस योजना का मकसद मुस्लिम लड़कियों और उनके अभिभावकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि लड़कियां कम से कम ग्रेजुएशन तक कि  पढ़ाई अवश्य पूरी कर सकें।

मुस्लिम लड़कियां और मोदी के लिए चित्र परिणाम

10वीं, 12वीं की लड़कियों को मिलेगा वजीफा
यह भी निर्णय किया गया है कि अब नौवीं और 10वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम बच्चियों को 10 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। अब तक 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलती रही थी। यह योजना केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के तहत शुरू की गई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की महिलाओं को एलपीजी का मुफ्त कनेक्शन देने का प्रावधान है। जिन महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन मिले हैं, उनकी जिंदगी बदल गई है। योजना के तहत 5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जाने हैं। ये एक समाज-कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है।

मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
यह योजना तीन से छह महीने की गर्भवती महिलाओं के लिए है। इस के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। इस जांच में गर्भ में पल रहे शिशु की जांच भी शामिल है। इसे देश के सभी 650 जिलों में लागू कर दिया गया है, जिसमें नकद राशि 4000 से बढ़ाकर 6000 रुपयों तक कर दी गई है।

सुकन्या समृद्धि योजना
ये योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का ही विस्तार है। यह बालिकाओं के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई है, जिसके तहत उनके पूरी शिक्षा और 18 साल की होने पर शादी के खर्च की व्यवस्था सुनिश्चित होती है। ये योजना बालिकाओं और उनके माता-पिता को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू की गई है, जिसमें छोटे निवेश पर ज्यादा ब्याज दर का इंतजाम है। 2 दिसंबर, 2014 को लांच होने के बाद से 31 अक्टूबर, 2016 तक इस योजना के तहत 99,96,085 खाते खोले जा चुके थे और इसमें 9455.30 करोड़ रुपए जमा हो चुके थे।

इंद्रधनुष
इस योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों में रोग-प्रतिरक्षण की प्रक्रिया को तेज गति देना है। वर्ष 2020 तक बच्‍चों को सात बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए वैक्‍सिनेशन की व्‍यवस्‍था भी की गई है।

महिला हेल्पलाइन
यह योजना हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए 24 घंटे तत्काल और आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए है। ये योजना विशेष रूप से परिवार, समुदाय, कार्यस्थल आदि निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा की शिकार सभी महिलाओं के लिए सामान्य रूप से लागू है।

मोबाइल फोन में पैनिक बटन और जीपीएस
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और उनके लिए समान कानून व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण विषय है। केंद्र सरकार की ओर से सभी फीचर और स्मार्ट मोबाइल फोन में पैनिक बटन की सुविधा सुनिश्चित की गई है। मोबाइल फोन में 5 और 9 नंबर का बटन इसके लिए निर्धारित होगा। स्मार्ट फोन में ऑन-ऑफ बटन को तीन बार हल्के से प्रेस करना होगा। 1 जनवरी, 2018 से सभी मोबाइल फोन में जीपीएस की सुविधा देना अनिवार्य होगा। पैनिक बटन सीधे 112 नंबर से जुड़कर सहायता उपलब्ध कराएगा।

केंद्र सरकार की सक्रियता के कारण महिलाओं के लिए शुरू की गई योजनाएं चामत्कारिक असर दिखा रही हैं। इसका लाभ समाज के सभी वर्गों को बिना किसी भेदभाव के मिल रहा है।

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