Home विचार तमिल एक्टर विजय की जीएसटी पर घटिया एक्टिंग

तमिल एक्टर विजय की जीएसटी पर घटिया एक्टिंग

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हाल ही में एक तमिल फिल्म ‘मर्सल’ रिलीज हुई है। अब अगर खुशी से उछल-कूद कर रहे मोदी विरोधियों की खुशी के कारणों की समीक्षा की जाए तो उनके अनुसार यह फिल्म मोदी-सरकार के जीएसटी जैसे बड़े-बड़े निर्णयों को धूल चटा देगी। मारे उत्साह के होश खो रहे इन लोगों को यह कैसे समझाया जाए कि फिल्मों में कैमरे के सामने एक्टिंग करके और लिखे-लिखाए डायलॉग बोलकर ‘मानवीय नैतिकता’ की मिसाल कायम करने वाला एक्टर, सिवाय एक्टिंग के और कुछ नहीं कर रहा होता। जैसे इस विवाद की केंद्रबिंदु ‘मर्सल’ फिल्म की ही बात ले ली जाए तो इसके ‘हीरो’ जोसेफ विजय चंद्रशेखर की रील लाइफ और रियल लाइफ में उतना ही फर्क है, जितना कि इस फिल्म में उनके किरदार और असल भ्रष्ट जीवन के ‘सच’ में हो सकता है। यही हाल इस फिल्म को समर्थन दे रहे राजनेताओं और दूसरे लोगों का भी है, जो खुद तो गले तक भ्रष्टाचार की कीचड़ में धंसे हुए हैं और उंगली उठा रहे हैं बेदाग छवि वाले नरेंद्र मोदी के शासन पर।

क्या है मूल विवाद

‘मर्सल’ नाम से दिवाली के अवसर पर रिलीज हुई इस तमिल फिल्म में, भारत में मोदी-सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी और सिंगापोर के जीएसटी की कथित तथ्यात्मक रूप से तुलना की गई है। फिल्म में भाजपा शासित कुछ राज्यों में हुई दुर्घटनाओं के विषय में बताते हुए भी सारी जानकारियों को भ्रामक रूप से प्रस्तुत किया गया है और डिजिटल पेमेंट के अतिरिक्त वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था में पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। यह और बात है कि कई सोशल साइट्स पर चर्चाओं में बनी हुई इस फिल्म के दूसरे पक्ष के बारे में कोई बात ही नहीं हो रही है कि इस पूरी फिल्म का निर्माण ही दुर्भावना और बदले की भावना से ग्रस्त है, इसलिए इसमें जान-बूझकर सत्य को छिपाया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर, गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

रीयल लाइफ विलेन है यह हीरो

यह बात ध्यान देने वाली है कि वर्ष 2015 में इस फिल्म में अभिनय कर रहे जोसेफ विजय चंद्रशेखर के यहां इनकम टैक्स विभाग की ओर से छापा मारा गया था, जिसमें यह सच उभर कर सामने आया था कि विजय पिछले लगभग पांच सालों से लगातार टैक्स चोरी करते आ रहे हैं। अपनी फिल्मों में नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले विजय स्वयं इस सत्य का मखौल उड़ाते रहे हैं कि उन जैसे लोगों द्वारा चुकाए गए टैक्स से ही एक आम भारतीय के लिए विकास कार्य हो पाते हैं। देश और देशवासियों के विकास की विजय और उनका समर्थन कर रहे लोग कितनी परवाह करते हैं, यह बात इन लोगों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार से साफ तौर पर खुलकर सामने आती रही है। इसके अतिरिक्त विजय अपने निजी जीवन में भी समय-समय पर हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं की खुल कर धज्जियां उड़ाते रहे हैं। अपनी बयानबाजी में भी उन्हें मंदिर की बजाय अस्पताल का निर्माण तो तर्कसंगत लगता है, लेकिन देश में बीस सालों में बने 370 मंदिरों के मुकाबले, लगभग 17500 नए चर्चों और 9700 मस्जिदों के औचित्य पर कभी उन्हें कुछ कहने की आवश्यकता क्यों महसूस नहीं हुई?

मोदी विरोधियों का अभिनय

‘मर्सल’ फिल्म में दी गई गलत जानकारियों को आधार बनाकर मोदी-सरकार की खिल्ली उड़ा रहे लोगों के लिए यह बड़ा सुनहरा मौका है, क्योंकि स्वयं मोदी का भ्रष्टाचार रहित आदर्श जीवन तो अब तक विरोधियों को कोई मौका दे नहीं पाया है। ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के संकल्प के साथ काम कर रहे नरेंद्र मोदी का अपना स्वयं का जीवन किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से कोसों दूर है, जबकि उनके विरोधियों में चाहे पूरा का पूरा गांधी परिवार हो या सैकड़ों घोटालों में लिप्त और जीते जी अपनी मूर्तियां बनवाने वाली मायावती हों, पशुओं का चारा तक खा जाने वाले लालू का कुनबा हो या कुख्यात बाहुबलियों के सरपरस्त मुलायम, सभी के मुख भ्रष्टाचार की कालिख से काले हैं। मोदी सरकार पर आरोपों पर मढ़कर ये सभी विरोधी असल में उन सभी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे पीछा छुड़ाना उनके गले की हड्डी बना हुआ है।

स्वार्थ का जवाब काम से

विरोधियों के लिए भी तो कुछ काम होना चाहिए, इस बात को अमल में लाते हुए मोदी सरकार ने अपना ध्यान सिर्फ काम पर केंद्रित किया हुआ है। इसकी मिसाल हाल ही में मोदी सरकार द्वारा उठाया गया नया कदम है, जो कि उनके जीरो टॉलरेंस वाली नीति पर आधारित है। ऑनलाइन डिपार्टमेंटल प्रोसिडिंग प्रोसेसिंग सिस्टम नाम से शुरू किए गए कार्यक्रम का निशाना भ्रष्ट अधिकारी वर्ग होगा। इस कदम से किसी भी अधिकारी पर लगे आरोपों से डिपार्टमेंटल प्रोसिडिंग की प्रक्रिया दो से तीन सालों में ही पूरी कर ली जाएगी, जिसमें की अभी तक  आठ से दस वर्षों तक का समय लगता रहा है।  इसका सीधा संदेश यही है कि भ्रष्टाचार के मामले में मोदी सरकार ने न तो किसी आलोचना के डर से कोई समझौता किया है, न करेगी।     

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