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‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनी देश की पहली बिना इंजन वाली ‘T-18’ ट्रेन लॉन्च, जानिए खूबियां

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते चार वर्षों में रेलवे का कायाकल्प हो गया है। मोदी सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार में जितना काम किया है उतना काम पहले की किसी भी सरकार ने नहीं किया। रेलवे में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए मोदी सरकार ने अत्याधुनिक रेलवे इंजनों, डिब्बों का निर्माण शुरू किया है। इसी की बानगी सोमवार को देखने को मिली है। मोदी सरकार के महात्वाकांक्षी रेल प्रोजेक्ट देश की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन का लोकॉर्पण किया गया।

इस ट्रेन को स्वदेशी तकनीकि से लगभग 100 करोड़ रुपये में विकसित किया गया है। यह एक हाईटेक, ऊर्जा-कुशल, खुद से चलने वाली या बिना इंजन के चलने वाली ट्रेन है।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक चेन्नई की इंटीग्रल रेल कोच फैक्ट्री में निर्मित इस तरह की भारत की पहली ट्रेन T-18 भारतीय रेल के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

मेक इन इंडिया के तहत इस ट्रेन को आधी लागत में बनाया गया है। इस ट्रेन में 16 डिब्बे हैं और इसके यात्रियों को ढोने की क्षमता भी उतनी ही है, जितनी 16 डिब्बों के अन्य ट्रेन में होती है लेकिन इसमें इंजन नहीं है। यह 15-20 फीसदी ऊर्जा कुशल है और कम कार्बन फुटप्रिंट छोड़ती है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस ट्रेन को महज 18 महीनों में ही विकसित कर लिया गया, जबकि उद्योग का मानदंड 3-4 सालों का है।

इसमें सभी डिब्बों में आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट्स (जिससे यात्री आपातकाल में ट्रेन के क्रू से बात कर सकें) दिए गए हैं, साथ ही सीसीटीवी लगाए गए हैं ताकि सुरक्षित सफर हो। आईसीएफ ऐसे छह ट्रेन सेट को जल्द ही उतारने वाली है।

आम ट्रेनों से एकदम अलग ट्रेन-18 बिना इंजन की होगी। सब-अर्बन ट्रेनों की तरह इस ट्रेन के दोनों छोर पर मोटर कोच होंगे, यानी ये दोनों दिशाओं में चल सकेगी।

इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 170 किमी प्रतिघंटा के करीब रहने वाली है। यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित होगी, सभी कोच एक दूसरे से कनेक्टेड होंगे।

स्टेनलेस स्टील की बॉडी वाली इस ट्रेन में वाई-फाई, एलईडी लाइट, पैसेंजर इनफर्मेशन सिस्टम और पूरे कोच में दोनों दिशाओं में एक ही बड़ी सी खिड़की होगी।

    

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