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देश ही नहीं, वैश्विक स्तर पर खुले में शौच की आदत से मुक्त होने की प्रेरणा देता है स्वच्छ भारत अभियान

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विश्व में असंभव को संभव कर दिखाने वाले गिनती भर के नाम जब भी लिए जाएंगे, तो उनमें से एक नाम हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी होगा। इसकी वजह है कि वे हर उस टास्क को संभव बना दे रहे हैं, जिसे बहुत बोझिल मानकर दूसरे छोड़ दिया करते थे। याद कीजिए कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने तो कभी स्वच्छता अभियान जैसे मुद्दों को तो हाथ तक नहीं लगाया। इसी के चलते स्थिति ऐसी रही कि आजादी से लेकर 2014 तक देश में स्वच्छता का दायरा महज 39 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने देश को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाकर सिर्फ चार वर्षों में इतिहास रच दिया।

यह संभव हुआ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान ने लोगों को खुले में शौच की आदत से मुक्त करने बड़ी भूमिका निभाई है। सिर्फ चार वर्षों के अंदर देश के लगभग 50 करोड़ लोग खुले में शौच करना पूरी तरह से बंद कर चुके हैं। 2014 तक देश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता का जो कवरेज था, वह अब करीब ढाई गुना बढ़कर 93 प्रतिशत हो चुका है। पिछले दिनों ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इसका क्रेडिट जनसामान्य के पुरुषार्थ और संकल्प को देते हुए कहा था: 

‘’क्‍या किसी ने ये कल्‍पना की थी कि चार वर्ष में लगभग साढ़े चार लाख गांव खुले में शौच से मुक्‍त हो जाएंगे। क्‍या किसी ने कल्‍पना की थी कि चार वर्षों में 450 से ज्‍यादा जिले खुले में शौच से मुक्‍त हो जाएंगे। क्‍या किसी ने ये कल्‍पना की थी कि चार वर्षों में 20 राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेश खुले में शौच से मुक्‍त हो सकते हैं।‘’

पीएम खुद उदाहरण बनते, जनता अपने आप जुड़ जाती
प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ स्वच्छ भारत के लिए आह्वान किया, बल्कि उन्होंने खुद को भी इसके लिए समर्पित कर दिया। जिस प्रतिबद्धता के साथ वे इस अभियान को लेकर आगे बढ़े, उसके चलते देखते ही देखते देश भर में लोगों के बीच स्वच्छता को लेकर एक अभूतपूर्व आग्रह बना और यह अभियान जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया। आज घर-द्वार, अपने परिवेश से लेकर देश और समाज को साफ-सुथरा रखने के लिए लोग बढ़-चढ़कर आगे आ रहे हैं और इसका नतीजा सबके सामने है।  

स्वच्छ भारत की सफलता विश्व के लिए प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान की सफलता की कहानी पूरे विश्व जगत के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। स्वच्छता अभियान की कामयाबी को लेकर Economic Times में अपने एक ब्लॉग में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लिखा है कि यह अभियान  2019 के अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में हर तरह से सक्षम है। वे लिखते हैं कि सफलता की यह एक ऐसी कहानी है जिसके बारे में शुरू में शायद ही किसी ने सोचा होगा। 2014 में जहां देश भर में करीब 60 करोड़ लोग खुले में शौच को मजबूर थे, वहीं अब दूरदराज के क्षेत्रों के सिर्फ 10 करोड़ लोगों को ही इससे बाहर निकालने की जरूरत है।

मिशन सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में
प्रधानमंत्री ने 2014 में लालकिले के प्राचीर से देश को 2019 तक खुले में शौच से मुक्त कराने की अपील की थी। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश की ओर से उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में श्रद्धांजलि देने का आह्वान किया था। सरकार ने इस मिशन को शीर्ष प्राथमिकता दी और समाज के सभी तबके के परिवारों में शौचालय सुनिश्चित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। देश भर में लगभग 8.5 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। स्थिति ये है कि जिस स्वच्छता विशेषकर शौचालय को लेकर पहले लोगों के बीच शायद ही चर्चा होती थी, आज उस पर लोग खुलकर बात कर रहे हैं। मीडिया से लेकर जनसामान्य तक इसकी अहमियत को समझते हुए जागरूकता बढ़ाने में लगे हैं।   

कई देश सीखना चाहते हैं भारत के अनुभव से
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। इस रफ्तार को और बढ़ाने के लिए यहां के नागरिकों के जीवन का हर प्रकार से क्वालिटीयुक्त होना आवश्यक है। स्वच्छता उसमें से पहली शर्त है जिसे सरकार के साथ मिलकर जनसामान्य मिलकर पूरा करने में जुटे हैं। World Health Organization (WHO) के एक अनुमान के अनुसार पूरे अभियान की निर्धारित अवधि में भारत में तीन लाख लोगों की जिंदगी बचाने में स्‍वच्‍छता की भूमिका होगी। इसके साथ ही एक स्‍टडी बताती है कि स्‍वच्‍छता से डायरिया के मामलों में 30 प्रतिशत की कमी आएगी। अगले 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच भारत Mahatma Gandhi International Sanitation Convention (MGISC) की मेजबानी करने जा रहा है। दुनिया के 50 से भी अधिक देशों के सैनिटेशन मिनिस्टर इसमें भाग लेने जा रहे हैं। कई देश हैं जो स्वच्छता पर भारत के अनुभव से सीख लेकर उसे अपने यहां क्रियान्वित करने की प्रेरणा लेना चाहते हैं।

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