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मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून, अब विदेश नहीं भाग पाएगा आरोपी

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अब वह समय नजदीक आता दिख रहा है जब देश को हजारों करोड़ का चूना लगाने के आरोपी विजय माल्या, मेहुल चौकसी और नीरव मोदी को एक-एक कर भारत लाया जाएगा। मोदी सरकार ने जहां ऐसे भगोड़े आरोपियों को विदेशों से प्रत्यर्पित करने को लेकर कोशिशें तेज कर दी हैं वहीं ऐसे सख्त कानून को अमल में लाने का काम किया है जो अब इन जैसों को विदेश भागने ही नहीं देगा।    

मेहुल चौकसी को लाने की कवायद तेज
भारत ने एंटीगुआ सरकार को भगोड़े कारोबारी मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध पत्र सौंपा है। एंटीगुआ के विदेश मंत्री ईपी चेट ग्रीन कह चुके हैं कि मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण के लिए किसी भी वैध अनुरोध का सम्मान किया जाएगा। मेहुल को भारत भेजने को लेकर एंटीगुआ सरकार का रुख सकारात्मक रहा है। उसका कहना है कि भले ही दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है लेकिन दोनों ही देश कॉमनवेल्थ के सदस्य हैं इसलिए प्रत्यर्पण का पूरा स्कोप है। एंटीगुआ सरकार ने इसके लिए प्रत्यर्पण को लेकर अपने 1993 के कानून के एक सेक्शन का हवाला दिया है।

माल्या और नीरव को भी जल्द लाया जाएगा  
मेहुल चौकसी हो, विजय माल्या हो या फिर नीरव मोदी, इन तीनों ही भगोड़ों की कांग्रेस के शीर्ष परिवार से करीबी जगजाहिर हो चुकी है। इनसे जुड़े घटनाक्रमों के तारों को जोड़ने से यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि कांग्रेस इनमें अपने लिए चुनावी संभावनाएं देख रही थीं। आर्थिक धोखाधड़ी के इन आरोपियों के विदेश भागने के पीछे इसे एक बड़ी वजह माना जा रहा है। लेकिन राहुल गांधी के चुनावी अभियान को एक बड़ा झटका लगा है क्योंकि मोदी सरकार की  कोशिशों से तीनों को ही भारत लाने की कार्यवाही में तेजी आ चुकी है। माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर चल रहे मुकदमे में 12 सितंबर को होने वाली सुनवाई में कुछ बड़ा निकलकर सामने आ सकता है, तो भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून से नीरव मोदी भी हर तरह से घिर चुका है।     

‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून’ एक बड़ी उपलब्धि
कांग्रेस की सरकारों ने जहां भगोड़े आरोपियों को लेकर अपने राजनीतिक मतलब से नरम रवैया अपनाया वहीं मोदी सरकार सख्त कानून लेकर आई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून 2018 को मंजूरी दे दी है। इस कानून से आर्थिक घोटाले के आरोपी कानूनी प्रक्रिया का सामना करने से बच नहीं सकते। यह कानून घोटालेबाजों के विदेश भागने से रोकने में भी मददगार होगा।  लोकसभा ने इससे संबंधित विधेयक को 19 जुलाई को पारित किया था जबकि राज्यसभा में इसे 25 जुलाई को मंजूरी मिली थी।

आर्थिक अपराधियों का विदेश भागना मुश्किल
नए कानून के मुताबिक वह व्यक्ति भगोड़ा आर्थिक अपराधी है जो 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक के घोटाले के मामले में शामिल रहा है। जिस आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ हो और वह मुकदमे से बचने के लिए विदेश भाग गया हो, वह भी इसके दायरे में आता है। नए कानून के तहत प्राधिकृत विशेष अदालत को किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उसकी संपत्ति को जब्त करने का अधिकार होगा। जबकि जब्त की गई संपत्तियों का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहेगा। प्रवर्तन निदेशालय मामले में जांच एजेंसी का काम करेगा।

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