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मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 10 सरकारी बैंकों का होगा महाविलय

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आर्थिक सुस्ती दूर करने और सरकारी बैंकों को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है। इस विलय के बाद सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जायेगी। वर्ष 2017 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। अब पंजाब नेशनल बैंक विलय के बाद भारतीय स्टेट बैंक के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। मोदी सरकार 10 बैंकों में उनका पूंजीआधार मजबूत बनाने के लिए 52,250 करोड़ रुपये की पूंजी भी डालेगी।

आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए मोदी सरकार कई कदम उठा रही है। वित्त मंत्री ने पिछले सप्ताह करों में कटौती, बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की नकदी में सुधार, वाहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर सरकार का खर्च बढ़ाने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड कार्य में तेजी जैसे उपायों की घोषणा की है। इसके साथ ही कैबिनेट ने कोयला खनन, अनुबंध विनिर्माण, एकल खुदरा ब्रांड और डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश के नियमों को उदार बनाया है।

इसमें होगा विलय इसका होगा विलय
पंजाब नैशनल बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
केनरा बैंक सिंडिकेट बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक
इंडियन बैंक इलाहाबाद बैंक

 
 विलय नंबर-1
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक के साथ ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय होगा। इस विलय के बाद ये देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। साथ ही इसका कारोबार 17.95 लाख करोड़ रुपये के करीब होगा।

विलय नंबर-2
केनरा बैंक के साथ सिंडिकेट बैंक का विलय होने के बाद यह देश को चौथा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। इसका कारोबार 15.20 लाख करोड़ रुपये के करीब होगा।

विलय नंबर-3
तीसरा विलय यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का है। इस विलय के बाद यह देश का पांचवां सबसे बड़ा बैंक होगा

विलय नंबर-4
इसके साथ ही इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक विलय के बाद देश का सातवां सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।

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