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मोदीराज में भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं, जल्द स्विस बैंक में पैसा जमा करने वालों के नाम आएंगे सामने

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार के जरिए देश का पैसा लूटने वालों की नींद हराम कर दी है। भ्रष्टाचारी चाहे देश में हो या विदेश में प्रधानमंत्री मोदी एक-एक से लूट की रकम वसूलने का प्रयास कर रहे हैं। जाहिर है कि बड़ी संख्या में भ्रष्टाचारियों ने स्विस बैंकों में लूट की रकम छिपाई हुई है। लेकिन मोदी सरकार के प्रयासों से अब स्विस बैंक भारतीय खाताधारकों के नाम बताने पर राजी हो गया है और भारतीयों के स्विस बैंक खातों की जानकारी 1 सितंबर से साझा करने लगा है।

जाहिर है कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बैंकिंग सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान के समझौते के प्रभावी होने के साथ ही भारतीयों के स्विस बैंक खातों पर से रहस्य का पर्दा उठना निश्चित है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कालेधन से लड़ाई के खिलाफ इस कदम को काफी अहम करार दिया है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक सितंबर से ‘स्विस बैंक से जुड़ी गोपनीयता’ का दौर समाप्त हो जाएगा।

भ्रष्टाचार को लेकर नो टोलरेंस की नीति अपनाने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने करप्शन के खिलाफ अब तक कड़ी कार्रवाई की है। डालते हैं एक नजर-

भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का कड़ा प्रहार
भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का सख्त रवैया बरकरार है। इसी के चलते मोदी सरकार के निर्देश पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 30 अगस्त, 2019  को देशभर में 150 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई दिल्ली, जयपुर, जोधपुर, गुवाहाटी, श्रीनगर, शिलांग, चंडीगढ़, शिमला, चेन्नई, मदुरै, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, गांधीनगर, गोवा, भोपाल, जबलपुर, नागपुर, पटना, रांची, गाजियाबाद, लखनऊ और देहरादून में की गई।

किन बिंदुओं पर है फोकस
सीबीआई अधिकारियों ने विशेष अभियान के तहत मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के उन बिंदुओं पर ध्यान दिया, जिसके चलते सरकारी तंत्र में आम आदमी और छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ता है।

किन विभागों पर डाले गए छापे
सीबीआई ने जिन विभागों पर अचानक छापे मारे, उनमें रेलवे, कोयला खदानें, कोयला क्षेत्रों, चिकित्सीय और स्वास्थ्य संगठन, सीमा-शुल्क और एफसीआई जैसे विभाग शामिल रहे। ये सरप्राइज चैक उन स्थानों पर किए जा रहे हैं जहां आम लोगों, छोटे व्यापारियों ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी।

कैसे विभागों पर हुई कार्रवाई
इस अभियान के तहत केंद्र सरकार के विभाग, सार्वजनिक उपक्रम और सार्वजनिक बैंकों के अलावा केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। दरअसल एजेंसी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र मे आने वाले विभागों में ऐसा नहीं कर सकती, जब तक संबंधित सरकार अधिसूचना जारी ना करे या कोर्ट का आदेश न हो।

पहले भी हुआ है भ्रष्टाचार पर प्रहार
गौरतलब है कि मोदी सरकार न्यू इंडिया में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को नहीं पनपने देना चाहती है, इसी के चलते ऑपरेशन क्लीन के तहत मोदी सरकार बीते पांच सालों में 300 से अधिक भ्रष्ट अफसरों को जबरन रिटायर भी कर चुकी है।

करप्शन पर मोदी सरकार का एक्शन, भ्रष्टाचार करने वालों की अब खैर नहीं
मोदी सरकार ने करप्शन के खिलाफ जो जंग छेड़ी है, उसका असर अब दिखाई देने लगा है। सीबीआई और ईडी ने कई प्रभावी लोगों पर शिकंजा कसना शुरू भी कर दिया है, जिससे स्पष्ट है कि न्यू इंडिया में भ्रष्ट लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। दूसरी तरफ पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी से ये साफ हो चुका है कि अब रसूखदार लोग भी भ्रष्टाचार करके बच नहीं सकते हैं।

पांच साल में 312 भ्रष्ट अफसरों की छुट्टी
ऑपरेशन क्लीन के तहत मोदी सरकार बीते पांच सालों में 312 भ्रष्ट अफसरों को जबरन रिटायर कर चुकी है। वहीं मोदी सरकार 2.0 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन्डायरेक्ट टैक्सेज़ एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट CBIC के 15 वरिष्ठ अधिकारियों और भ्रष्टाचार के आरोपी 12 इनकम टैक्स अधिकारियों पर भी गाज गिरी।

 

ना कोई वीआईपी, ना कोई मंत्री
जहां पहले की सरकारों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर आम आदमी की गिरफ्तारी में तत्परता दिखती थीं। वहीं वीआईपी, नेता और रसूखदारों के मामले में जांच एजेंसियां सीधी कारेवाई से किनारा करती नजर आती थीं लेकिन मोदी सरकार में भ्रष्टाचार का आरोपी चाहे जो भी हो वह सजा से नहीं बच सकता है। 

पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी से सेट हुआ उदाहरण
मोदी सरकार के भ्रष्टाचार पर एक्शन के चलते ही आईएनएक्स मीडिया मामले में पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी गई है और चिंदबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी इसी केस के चलते जमानत पर हैं। इससे पहले कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को भी गिरफ्तार किया गया था। साथ ही एमएनएस चीफ राज ठाकरे की भी ईडी के सामने पेशी हुई है।

ये है पीएम मोदी का सपना
पीएम मोदी भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना पूरा करना चाहते हैं, मोदी सरकार के दौरान भारत ग्लोबल करप्शन इंडेक्स की रैंकिंग में तीन पायदान की रिकवरी कर चुका है। 2018 से पहले जहां इस इंडेक्स में 81वें पायदान पर था, वहीं अब भारत 78वें पायदान पर पहुंच चुका है। इस लिस्ट में डेनमार्क पहले नंबर की पोजीशन पर है और पीएम मोदी भारत को उसी पोजीशन पर लाना चाहते हैं।

साफ है कि मोदी सरकार के निशाने पर वो सभी लोग हैं जो काला कारोबार करने में जुटे हैं और देश को धोखा देकर पैसों का गबन कर रहे हैं।

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