Home नरेंद्र मोदी विशेष मोदी सरकार की मुहिम से सॉयल हेल्थ कार्ड बढ़ाएगा किसानों की आमदनी

मोदी सरकार की मुहिम से सॉयल हेल्थ कार्ड बढ़ाएगा किसानों की आमदनी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। किसानों को फसल की लागत कम करने, उन्हें उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने और उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। अब मोदी सरकार ने सॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को सामाजिक उद्यमों से जोड़ने की मुहिम शुरू करने की ठानी है, ताकि किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले और उनकी इनकम में बढ़ोतरी हो।

सॉयल हेल्थ कार्ड से बढ़ेगी इनकम
केंद्र सरकार देशभर में छोटे किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड का प्रयोग एक उपकरण की तरह करने की तैयारी में है। करीब चार करोड़ किसानों का आंकड़ा जुटा चुके इस प्लेटफार्म से खाद्य क्षेत्र में काम कर रहे सामाजिक उद्यमों को जोड़ा जाएगा। ये उद्यम किसानों को उपज की सही कीमत मुहैया कराने की मुहिम में सरकार का साथ देने को तैयार हैं। सरकार ने हाल ही में किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का ऐलान किया है। इसके लिए कृषि मंत्रालय और नीति आयोग लगातार काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों में सामाजिक उद्यमी किसानों से सीधे उपज खरीदने का काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नीति आयोग ने इन उद्यमियों से बातचीत की है और सॉयल हेल्थ कार्ड को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचने के उपकरण के तौर पर इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है। किसान और सामाजिक उद्यमों समेत अन्य, जो सीधे तौर पर किसान से खरीद करना चाहते हैं, उन्हें सॉयल हेल्थ कार्ड के जरिए एक दूसरे से मिलाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों को बड़ा फायदा होगा।

बिचौलियों के जाल से किसानों के मिलेगी मुक्ति
मौजूदा समय में किसान दूर तक अनाज ढोने समेत तमाम समस्याओं के मद्देनजर बिचौलिए को अनाज बेचता है और इससे किसानों को 30 से 40 प्रतिशत का नुकसान हो जाता है। जाहिर है कि सॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से सामाजिक उद्यमी किसानों से सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। सॉयल हेल्थ कार्ड में 3.80 करोड़ किसान अब तक जुड़ चुके हैं। नीति आयोग के सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने खास तौर पर आयोग से देशभर के सामाजिक उद्यमों को इस मुहिम के लिए आगे लाने को कहा है, ताकि छोटे किसानों को उपज की सही कीमत मिले और अनाज की मंडियों का एकाधिकार समाप्त हो और वह एक समानांतर इकाई बने। 

10 करोड़ से अधिक किसानों को मिला सॉयल हेल्थ कार्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि उत्पदकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलायी है। सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल हेल्थ सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। इसके तहत अब तक 10 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इससे 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 में खाद के उपयोग में 8 से 10 प्रतिशत की कमी और उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मिट्टी के नमूनों की जांच में तेजी के लिए सरकार ने वर्ष 2011-14 (174 मृदा-परीक्षण प्रयोगशालाएं) की तुलना में वर्ष 2014-17 के दौरान 9,063 प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई।

मोदी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयासरत है। एक नजर डालते हैं केंद्र सरकार के उन फैसलों पर, जिनसे किसानों की राह आसान हुई है और उनकी इनकम भी बढ़ रही है।

‘हरित क्रांति-कृषोन्‍नति योजना’ जारी रखने की स्‍वीकृति
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि क्षेत्र में छतरी योजना ‘हरित क्रांति-कृषोन्‍नति योजना’ को 12वीं पंचवर्षीय योजना से आगे यानी 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। इसमें कुल केंद्रीय हिस्‍सा 33,269.976 करोड़ रुपये का है। छतरी योजना में 11 योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्‍य समग्र और वैज्ञानिक तरीके से उत्‍पादन और उत्‍पादकता बढ़ाकर तथा उत्‍पाद पर बेहतर लाभ सुनिश्‍चत करके किसानों की आय बढ़ाना है। ये योजनाएं 33,269.976 करोड़ रूपये के व्‍यय के साथ तीन वित्‍तीय वर्षों यानी 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए जारी रहेंगी। इन 11 योजनाओं का फोकस उत्‍पादन संरचना सृजन, उत्‍पादन लागत में कमी और कृषि तथा संबंद्ध उत्‍पाद के विपणन पर है। ये योजनाएं अलग-अलग अवधि के लिए पिछले कुछ वर्षों से क्रियान्वित की जा रही हैं।

गन्ना किसानों का बकाया निपटाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में चीनी सीजन 2017-18 में पेराई किये गये प्रति क्विटंल गन्ने पर 5.50 रुपये की वित्तीय सहायता चीनी मिलों को देने की मंजूरी दी गई है। इससे गन्ने की लागत की भरपाई हो सकेगी और चीनी मिलों को किसानों की बकाया गन्ना रकम निपटाने में मदद मिलेगी। यह सहायता चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों को दी जाएगी। यह सहायता उन चीनी मिलों को दी जाएगी जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करेंगी।

एक साल में बांटा 10 लाख करोड़ का कृषि ऋण
किसानों को फसल उत्पादन में मदद के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपये का ऋण बांटा है। सरकार ने जमीन पर मालिकाना हक रखने वाले किसानों को ही कर्ज नहीं दिया है, बल्कि बटाईदार यानी दूसरे के खेतों को किराए पर लेकर खेती करने वाले किसानों को भी बड़ी संख्या में ऋण वितरित किया है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक सरकार छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण सुविधा बेहतर करने पर भी ध्यान दे रही है। 10 लाख करोड़ के कृषि ऋण में से 6.8 लाख करोड़ रुपये छोटी अवधि के फसली ऋण में दिए गए हैं। इतना ही नहीं इस 6.8 लाख करोड़ रुपये में से आधी रकम छोटे और सीमांत किसानों को बांटी गई है। 2017-18 में 10 लाख करोड़ का ऋण बांटने का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में बढ़ाकर 11 लाख करोड़ कर दिया गया है।

खाद्यान्नों का रिकॉर्ड उत्पादन
वर्ष 2017-18 के लिए देश में कुल 275.68 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन हुआ है जो कि वर्ष 2013-14 में हासिल 265.04 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में 10.64 मिलियन टन (लगभग 4 प्रतिशत) ज्‍यादा है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह के अनुसार बागवानी फसलें जिनका पोषणिक सुरक्षा में अहम योगदान है, का भी वर्ष 2016-17 में रिकॉर्ड 305 मिलियन टन उत्‍पादन हुआ है। फलों का उत्‍पादन 93 मिलियन टन और सब्‍जी उत्‍पादन 178 मिलियन टन के आंकडे को पार कर गया है।

2020 तक जारी रहेगी यूरिया सब्सिडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आर्थिक उन्नति, फसल की लागत कम करने और उन्हें उपज का उचित मूल्य दिलाने के कार्य में लगी है। फसल की पैदावार बढ़ाने में यूरिया की अहम भूमिका है। हाल ही में मोदी सरकार ने किसानों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए यूरिया पर सब्सिडी को 2020 तक बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया है। डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी का पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। आपको बता दें कि इस वर्ष केंद्र सरकार किसानों को दी जा रही यूरिया सब्सिडी पर 42,748 करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं, जबकि 2018-19 में यूरिया सब्सिडी 45,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्ष 2020 तक किसानों को यूरिया सब्सिडी देने पर कुल 1,64,935 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। उर्वरक मंत्रालय सालाना आधार पर यूरिया सब्सिडी मंजूर करता है, लेकिन मोदी सरकार ने किसानों के हित में फैसला लेते हुए पहली बार तीन वर्षों के लिए यूरिया सब्सिडी को मंजूरी दी है।

अब छोटे पैक में मिलेगा यूरिया
किसानों की सहूलियत का ख्याल रखते हुए सरकार यूरिया के छोटे बैग मुहैया कराने पर विचार कर रही है। वर्तमान में किसानों को यूरिया 50 किलो के बैग में मिलता है। सरकार का प्रयास बैग के आकार को छोटा कर 45 किलो करने का है। सरकार मानना है कि इससे यूरिया की बचत होगी। दरअसल किसान अपने फसल में यूरिया की मात्रा तौल कर नहीं डालते हैं। बैग में यूरिया की मात्रा कम करने से इसकी खपत कम होगी।

यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहा भारत
एक वक्त था जब यूरिया की कालाबाजारी से किसान परेशान रहते थे। लेकिन मोदी सरकार की नीतियों से इसपर रोक लग गई है। दूसरी ओर सरकार ने देश को यूरिया उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का निर्णय लिया है। इस प्रयास में पुराने कारखानों को शुरू करने के साथ नए कारखानों की भी शुरुआत हुई है। कई राज्यों में बन रहे यूरिया कारखानों के निर्माण में भी कार्य तेज गति से चल रहा है। भारत सरकार गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी, तालचर और रामागुण्डम स्थित पांच उर्वरक संयत्रों का पुनरूद्धार कर रही है। गोरखपुर में निर्माणाधीन फैक्ट्री में यूरिया का उत्पादन वर्ष 2022 से शुरू हो जाएगा। इन संयत्रों में 65 लाख टन यूरिया का उत्पादन होना है। गौरतलब है कि देश में सालाना लगभग 310 लाख टन उर्वरक की जरुरत होती है। करीब 55 लाख टन उवर्रक आयात करना पड़ता है। 

नीम कोटिंग यूरिया से खेती बढ़ी, खाद का उपयोग घटा
नीम कोटेड यूरिया की पहल जमीन पर रंग ला रही है। इससे यूरिया की खपत में तो कमी आई ही है साथ में किसानों को खेती की लागत में कमी आई है। नीम कोटेड यूरिया के चलते खाद की बिक्री में कमी देखने को मिली है लेकिन अनाज की पैदावार में बढ़ोत्‍तरी दर्ज की गई है। साल 2012-13 से 2015-16 के बीच यूरिया की बिक्री 30 से 30.6 मिलियन टन के बीच रही। लेकिन 2017 में यह आंकड़ा 28 मिलियन टन पर आ गया और 2018 में इसके और घटने की संभावना है। यूरिया के अलावा केंद्र सरकार ने कई ऐसी योजनाएं बनाईं हैं जो किसानों के हित के लिए हैं। आइये देखते हैं इन्हीं में से कुछ महत्वपूर्ण कदम।  

गोबर-धन योजना से गांवों का होगा विकास
सरकार ने ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के अपने प्रयासों के तहत बजट 2018-19  में गोबर-धन यानि गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्स योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कम्पोस्ट, बायो-गैस और बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। समावेशी समाज निर्माण के दृष्टिकोण के तहत सरकार ने विकास के लिए 115 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सिंचाई, ग्रामीण विद्युतीकरण, पेयजल, शौचालय जैसे क्षेत्रों में निवेश करके निश्चित समयावधि में विकास की गति को तेज किया जाएगा और ये 115 जिले विकास के मॉडल साबित होंगे।

किसानों को लागत का डेढ़ गुना MSP 
किसानों की सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इसके लिए मोदी सरकार ने किसानों के लिए प्रतिबद्धता को दिखाते हुए किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का ऐलान किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को डेढ़ गुना मूल्य देने के लिए बाजार मूल्य और एमएसपी में अंतर की रकम सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही, मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए 11 लाख करोड़ का फंड बनाने का भी ऐलान किया है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी फसलों को एमएसपी के अंतर्गत लाया जाएगा।

गांवों में ही किसानों को मिलेगा उपज का बाजार
देश में 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे या सीमांत किसान हैं। इनके लिए मार्केट तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए सरकार इन्हें में ध्यान रखकर इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगी। इसके लिए सरकार 22 हजार ग्रामीण हॉट को ग्रामीण कृषि बाजार में बदलेगी। 2,000 करोड़ से कृषि बाजार और संरचना कोष का गठन होगा। ई-नैम को किसानों से जोड़ा गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सके। 585 EMPC को ई-नैम के जरिए जोड़ा जाएगा। यह काम मार्च 2019 तक ही खत्म हो जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है। पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी उपलब्ध कराने की योजना चलाई जा रही है. इसके तहत सिंचाई के पानी की कमी से जूझ रहे 96 जिलों को चिन्हित कर 2,600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

देश भर में किसानों को मिलेगी निर्बाध बिजली
खेती-किसानी में बिजली का अहम योगदान होता है, क्योंकि खेतों में ट्यूबबेल चलाने, सिंचाई के लिए बिजली जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को बाखूबी समझते हैं। हालांकि किसानों के लिए बिजली की अलग फीडर लाइन पर पिछले डेढ़ दशक से चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के दखल के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश में “पीएम सहज बिजली हर घर योजना” लांच की गई है। इसका फायदा खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में होगा, लेकिन किसानों को बिजली का असली फायदा देने के लिए अब फीडर लाइन को अलग किया जाएगा। अलग बिजली फीडर होने से किसानों को बिजली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में देने की व्यवस्था शुरू करने में भी काफी आसानी होगी। साथ ही किसानों को समय पर पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य ही यह है कि ‘हर खेत में पानी।‘ शायद ही इस कारण की जटिलता को पहले किसी और सरकार ने इस गंभीरता से समझा हो, जितना मोदी सरकार ने कि भारतीय खेती की सिंचाई संबंधी निर्भरता बहुत बड़े स्तर पर वर्षा पर है। वर्षा की अनिश्चितता सीधे तौर पर फसलों के उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे किसान का हित प्रभावित होता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना इसी समस्या का सशक्त समाधान है।

प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना
किसी भी कार्य का व्यावसायिक तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण उस कार्य में प्रगति की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देता है। प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करवाना है। विशेषकर ऐसे युवाओं को, जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं अथवा खेती से विमुख हो रहे हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा कुशल कामगारों को विकसित किया जाता है। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रमों में सुधार करना, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्‍य पहलुओं के साथ व्‍यवहार कुशलता और व्‍यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
किसानों के हित में बनने वाली किसी भी अन्य योजना के मुकाबले इस योजना का महत्त्व कई गुना अधिक इसलिए है, क्योंकि यह अन्य योजनाओं की समीक्षा कर, उसके गुण-दोषों की विवेचना के आधार पर बनाई गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहुंची क्षति को प्रीमियम के भुगतान द्वारा एक सीमा तक कम किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत 8,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे, ताकि किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम किया जा सके। यह खरीफ और रबी की फसल के अतिरिक्त वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को भी सुरक्षा प्रदान करेगी। खराब फसलों के विरूद्ध किसानों द्वारा दी जा रही बीमा की फसलों को बहुत नीचे रखा गया है।

सस्ता कर्ज उपलब्ध कराना
पहले की सरकारों द्वारा किसानों के लिए नीति के नाम पर कर्ज की ऐसी व्यवस्था की गई थी, जिसमें उन्हें नौ प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज मिलता था। मोदी शासन में ब्याज-दर को घटाकर केवल चार प्रतिशत कर दिया गया। सरकार इस स्कीम के अंतर्गत ब्याज का 5 प्रतिशत भाग किसानों को वापस करेगी। नए प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार किसानों के ब्याज में दो प्रतिशत की सब्सिडी देगी। सही समय पर कर्ज वापस करने वाले किसानों को ब्याज में 3 फीसदी की राहत अतिरिक्त रूप से दी जाएगी। इसमें 3 लाख तक के कर्ज की सुविधा भी दी गई है।

कृषि एप का लाभ
मौसम से जुड़ी सही-सही जानकारी को समय पर किसानों को उपलब्ध कराना इस योजना का उद्देश्य है। मौसम में बदलाव, वर्षा अथवा इस विषय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं इस एप पर उपलब्ध हैं।

ई-कृषि मंडी योजना
कड़ी से कड़ी मेहनत और उत्पादन का कोई लाभ नहीं, यदि किसान को उसके उत्पादन के सही दाम न मिलें। यही वह विषय है, जो पूरी कृषि-प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील पक्ष है। बिचौलियों के वर्चस्व के चलते किसानों का हित हमेशा से प्रभावित होता रहा है। इसी समस्या के समाधान के तौर पर इ-कृषि मंडी योजना की रूपरेखा तय की गई, ताकि किसान अपनी उपज के सही दाम जानकर उसी पर फसल बाजार में बेच पाएं।

परंपरागत कृषि विकास योजना
परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) को लागू किया जा रहा है ताकि देश में जैव कृषि को बढ़ावा मिल सके। इससे मिट्टी की सेहत और जैव पदार्थ तत्वों को सुधारने तथा किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भंडार गृह की सुविधा
किसानों द्वारा मजबूरी में अपने उत्पाद बेचने को हतोत्साहित करने और उन्हें अपने उत्पाद भंडार गृहों की रसीद के साथ भंडार गृहों में रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे छोटे और मझौले किसानों को ब्याज रियायत का लाभ मिलेगा, जिनके पास फसल कटाई के बाद के 6 महीनों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड होंगे।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) को सरकार उनकी जरूरतों के मुताबिक राज्यों में लागू कर सकेगी, जिसके लिए राज्य में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। राज्यों को उऩकी जरूरतों, प्राथमिकताओं और कृषि-जलवायु जरूरतों के अनुसार योजना के अंतर्गत परियोजनाओँ/कार्यक्रमों के चयन, योजना की मंजूरी और उऩ्हें अमल में लाने के लिए लचीलापन और स्वयत्ता प्रदान की गई है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत 29 राज्यों के 638 जिलों में एनएफएसएम दाल, 25 राज्यों के 194 जिलों में एनएफएसएम चावल, 11 राज्यों के 126 जिलों में एनएफएसएम गेहूं और देश के 28 राज्यों के 265 जिलों में एनएफएसएम मोटा अनाज लागू की गई है ताकि चावल, गेहूं, दालों, मोटे अऩाजों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। एनएफएसएम के अंतर्गत किसानों को बीजों के वितरण (एचवाईवी/हाईब्रिड), बीजों के उत्पादन (केवल दालों के), आईएनएम और आईपीएम तकनीकों, संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकीयों/उपकणों, प्रभावी जल प्रयोग साधन, फसल प्रणाली जो किसानों को प्रशिक्षण देने पर आधारित है, को लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रीय तिलहन और तेल मिशन कार्यक्रम
राष्ट्रीय तिलहन और तेल (एनएमओओपी) मिशन कार्यक्रम 2014-15 से लागू है। इसका उद्देश्य खाद्य तेलों की घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए तिलहनों का उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है। इस मिशन की विभिन्न कार्यक्रमों को राज्य कृषि/बागवानी विभाग के जरिये लागू किया जा रहा है।

बागवानी के समन्वित विकास के लिए मिशन
बागवानी के समन्वित विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच), केन्द्र प्रायोजित योजना फलों, सब्जियों के जड़ और कन्द फसलों, मशरूम, मसालों, फूलों, सुगंध वाले वनस्पति,नारियल, काजू, कोको और बांस सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 2014-15 से लागू है। इस मिशन में ऱाष्ट्रीय बागवानी मिशन, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नारियल विकास बोर्ड और बागवानी के लिए केन्द्रीय संस्थान, नागालैंड को शामिल कर दिया गया है।

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