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अवैध बूचड़खाने को बंद होना ही था, फिर हाय तौबा क्यों …

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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पूरे प्रदेश में अवैध तरीके से चलने वाले बूचड़खाने को सख्ती से बंद करा दिया। अवैध रूप से चलने वाले बूचड़खाने केवल गोमाता की हत्या का केंद्र नहीं बल्कि काला धन का पोषक, देशविरोधी गतिविधियों को फंड उपलब्ध कराने का अड्डा भी रहा है।

अवैध बूचड़खाने के बंद होने के बाद लोग इसके विरोध में तरह-तरह के कुतर्क दे रहे हैं। ऐसे-ऐसे कुतर्क गढ़े जा रहे हैं, जैसे अवैध बूचड़खाने को चिड़ियाघरों में रहने वाले मांसाहारी जानवरों के लिए ही चलाया जा रहा था। जरा इन ट्वीट्स को देखिए-

अवैध बूचड़खाना बंद होने से मांस की कमी हो गई। इसके कारण कुछ घंटे के लिए टुंडा कबाब की दुकान क्या बंद हुए। देखिए कैसे-कैसे ट्वीट पोस्ट कर रहे हैं। कोई यह नहीं कह रहा है कि जब वैध बूचड़खाना नहीं था तो इतने सालों तक इस दुकान में बीफ कबाब कैसे बेच रहे थे। यूपी में गोहत्या पर प्रतिबंध है तो कैसे चल रहा था ये सब। इस पर किसी ने सवाल नहीं उठाया था, इससे पहले।

– दीपक राजा

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