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सिद्धारमैया फिर नहीं बन सकते कर्नाटक के मुख्यमंत्री, जानिए कारण

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई तो मतदान होना है। कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी समेत कई दिग्गज नेता सिद्धारमैया की दोबारा ताजपोशी की कोशिशों में जुटे हैं। पर कर्नाटक में जो जमीनी हालात हैं, उनसे साफ है कि सिद्धारमैया को दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिलने वाली है, यानी कांग्रेस की सत्ता में वापसी ना-मुमकिन है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कांग्रेस सरकार के काम-काम पर नजर डालें तो साफ जाहिर होगा कि जिस तरह से सीएम सिद्धारमैया का रवैया असंवेदनशील रहा है, उससे प्रदेश की जनता में खासी नाराजगी है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की किसान व गरीब विरोधी अय्याश छवि और राहुल गांधी के ढुलमुल नेतृत्व से प्रदेश की जनता ही नहीं, पार्टी कार्यकर्ता भी बेहद नाराज हैं। आगे डालते हैं उन कारणों पर नजर, जिनसे स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी का दोबारा सत्ता में आना मुश्किल ही नहीं असंभव है।

सीएम सिद्धारमैया और उनके मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी सरकार पर जमकर भ्रष्टाचार करने का आरोप है। सीएम सिद्धारमैया समेत उनके मंत्रिमंडल का एक भी मंत्री ऐसा नहीं है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप न लगे हों। चाहे शहरी विकास हो या फिर ग्रामीण विकास हर क्षेत्र में बिचौलियों, ठेकेदारों का बोलबाला है। यही वजह है कि सिद्धारमैया सरकार के सिद्धा’रुपैया’ सरकार तक कहा जाता है। कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में एक बात प्रचिलित है कि 10 पर्सेंट दिए बिना इस सरकार में कोई काम नहीं होता है। भ्रष्टाचार ने राज्य की जनता को बहुत परेशान किया है और चुनाव में लोगों ने भ्रष्ट सरकार को सबक सिखाने की तैयारी की है।

सिद्धारमैया की अय्याश छवि 
कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि एक अय्याश नेता की है। पांच वर्षों के कार्यकाल में सिद्धारमैया ने जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथों से अपने ऐशो-आराम पर उड़ाया है। सिर्फ मुख्यमंत्री आवास पर चाय-बिस्किट और पानी की खर्चे को ही लें, इसमें ही सीएम सिद्धारमैया करोड़ों रुपये खर्च कर चुके हैं। जिस राज्य में किसान और गरीब की माली हालत खराब हो, वहां इस तरह की अय्याशी से पता चलता है कि मुख्यमंत्री को आम लोगों की जरा सी भी फिक्र नहीं है।

              सीएम सिद्धारमैया का शाही अंदाज
वर्ष बिस्किट (लाख रुपये में) चाय, कॉफी, पानी (लाख रुपये में) कुल खर्च (लाख रुपये में)
2013-14 3.65  10  13.65 
2014-15 4.56  6.5  11.06 
2015-16 4.56  6.7  11.26 
2016-17 4.5  11.5 
2017-18 4.5  7.2  11.7 
  21.77  37.4  59.17 

 

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भ्रष्टाचारियों के साथ सिद्धारमैया का गठजोड़
मतदान से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की भगोड़ों के साथ आई एक तस्वीर ने उनकी भ्रष्ट छवि को एक बार फिर उजागर किया है। आरोप है कि सीएम सिद्धारमैया ने सितंबर 2013 में चीन में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक के दौरान धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में घिरे भगोड़ों से मुलाकात की थी। दरअसल, WEF में शिरकत करने गए सिद्धारमैया ने आर्थिक धोखाधड़ी कर पोंजी स्कीमों के जरिए लाखों लोगों को लूटने वाले भगोड़े विजय ईश्वरन समेत दूसरे भगोड़ों से मुलाकात की थी। आपको बता दें कि धोखाधड़ी के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी ‘सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस’ (SFIO) इन भगोड़ों को देश के लिए खतरा बता चुकी है। आपको बता दें कि भगोड़ा विजय ईश्वरन तमिल मूल का बिजनेसमैन है और मलयेशिया में रहता है। ईश्वरन QNet नाम की कंपनी का मालिक है, इसी कंपनी ने पोंजी स्कीमों के माध्यम से लाखों लोगों को लूटा है।  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कि इसी भगोड़े अपराधी से सीएम सिद्धारमैया ने लाखों रुपये की घड़ी गिफ्ट में ली थी। सिद्धारमैया पर आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक पुलिस पर दबाव बनाकर उसे ईश्वरन के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया। सिर्फ सिद्धारमैया ही नहीं इस भगोड़े अपराधी के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी संबंध हैं। यूपी सरकार के दौरान 2008 में भारतीय प्रवासी दिवस में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने विजय ईश्वरन को आमंत्रित किया था, जहां इसने राहुल गांधी के सलाहकार सैम पित्रोदा के साथ मंच साझा किया था।

किसानों की अनदेखी से ग्रामीण इलाकों में गुस्सा
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कुछ भी नहीं किया है। किसानों को न तो फसल की उपज का उचित मूल्य मिलता है और न ही सरकार की तरफ से कोई मदद। कर्ज के लिए राज्य के किसान स्थानीय साहूकारों और निजी संस्थानों पर निर्भर हैं। कर्नाटक में खुदकुशी करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी इस बात की गवाह है कि राज्य में किसान अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। राज्य के कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में अप्रैल 2013 से नवंबर 2017 के बीच 3,515 किसानों ने खुदकुशी की है। इनमें से 2,525 मामलों में किसानों ने सूखा और फसल के उचित दाम नहीं मिलने के चलते आत्महत्या की है। इसके अलावा किसानों को उपज का मूल्य दिलाने के नाम पर सरकार की तरफ से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। कर्जमाफी के नाम पर भी किसानों को साथ धोखा किया गया है। इन्हीं सब कारणों से ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के खिलाफ लहर है और यह कांग्रेस को दोबारा सत्ता में आने से रोक सकती है।

              कर्नाटक में किसानों की खुदकुशी
वर्ष आत्महत्या करने वाले किसान
2013 1403
2014 768
2015 1569
2016 2079
स्रोत- लोकसभा में दिया गया जवाब

 

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कांग्रेस शासन में कर्नाटक का हुआ विनाश,विकास में पिछड़ा
पांच वर्षों में कर्नाटक विकास में काफी पिछड़ गया है। चाहे उद्योग धंधों की बात हो, या फिर कृषि की, हर क्षेत्र में राज्य पिछड़ रहा है। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है और राज्य पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। कभी सिलिकॉन वैली के तौर पर मशहूर बेंगलुरु शहर आज अपनी पहचान खो रहा है। राज्य में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। सिद्धारमैया सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुओं को बांटने की राजनीति की वजह से राज्य में भेदभाव बढ़ा है। कह सकते हैं कि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने कर्नाटक को विनाश के रास्ते पर धकेल दिया है। बेंगलुरु शहर पूरी दुनिया में सिलिकॉन वेली के रूप में विख्यात है। पांच साल पहले यहां के आईटी उद्योग की पूरी दुनिया में धाक थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के आने के बाद इसकी पहचान धूल में मिल गई है।

बेंगलुरू शहर में बढ़ता अपराध
बेंगलुरु शहर का कल्चर पहले ऐसा था कि दिन हो या रात कभी भी सड़क पर निकलने में डर नहीं ता। लेकिन 2013 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद से शहर में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। चाहे महिलाओं के प्रति अपराध की बात हो,या फिर हत्या की, साइबर क्राइम की बात हो या फिर अपहरण की, हर मामले में यह शहर अनसेफ हो गया है।

हिंदुओं को बांटने की रणनीति से कांग्रेस को नुकसान
सिद्धारमैया सरकार ने राज्य में विकास के लिए तो ऐसा कुछ किया है, जिसके बल पर वो कांग्रेस को दोबारा वोट देने की अपील करें। इसीलिए सिद्धारमैया ने कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाया है। कांग्रेस सरकार ने एक तरफ मुस्लिम तुष्टिकरण को हवा दी और दूसरी तरफ हिंदुओं को बांटने की चाल चली। लेकिन हिंदुओं को बांटने की यह रणनीति कांग्रेस को उल्टी पड़ने वाली है, क्यों कि राज्य की जनता में यह संदेश जा चुका है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ सत्ता पाने के लिए यह कर रही है।

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कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टिकरण का दांव पड़ा उल्टा
दोबारा सत्ता में आने के लिए कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर काफी भरोसा है। मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने के लिए सिद्धारमैया सरकार ने जहां एक तरफ टीपू सुल्तान की जयंती मनाने जैसा फैसला लिया, वहीं दूसरी तरफ पिछले पांच वर्षों में मुसलमानों पर दर्ज हिंसा के मामले वापस लेने का शासनादेश जारी किया। हिंदुओं की हत्या और हमला करने वालों पर कार्रवाई के नाम पर भी कांग्रेस सरकार ने चुप्पी साध ली। इससे राज्य के हिंदू जनमानस में सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ आक्रोश है। यह आक्रोश मतदान वाले दिन कांग्रेस की लुटिया डुबोने में अहम भूमिका निभाएगा।

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टिकट बंटवारे में वंशवाद से कांग्रेस के आम कार्यकर्ता नाराज 
किसी भी पार्टी की जीत-हार उसके कार्यकर्ताओं का जोश और उत्साह तय करता है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव से पहले हाईकमान की हरकतों की वजह से खासे नाराज हैं। कांग्रेस ने राहुल गांधी से प्रभावित होकर नेताओं के बेटे-बेटियों को जमकर टिकट बांटे हैं। राज्य के तमाम जिलों में टिकट की उम्मीद लगाए उम्मीदवारों ने इसके खिलाफ जमकर प्रदर्शन भी किया था। इनमें से कई नेता बगावत करते हुए कांग्रेस के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, वहीं कई नेताओं ने जेडीएस और दूसरी पार्टियों से टिकट हासिल कर लिया है। कांग्रेस नेताओं की यह बगावत पार्टी को चुनाव में भारी पड़ने वाली है।

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जेडीएस और बीएसपी के गठबंधन से सीधा नुकसान कांग्रेस को
कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की जेडीएस इस बार मायावती की बीएसपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। जीडीएस की दलित और मुस्लिम समुदाय के बीच खासी पकड़ है। जेडीएस के साथ बीएसपी के आ जाने से यह पकड़ और मजबूत हो गई है। इससे कांग्रेस के दलित और मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगेगी, यानी कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना है।

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चुनाव पूर्व सर्वे में कांग्रेस को नुकसान
कर्नाटक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सत्ता धारी कांग्रेस से काफी आगे निकलती दिखाई दे रही है। यह तब है जब अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रचार की शुरुआत भी नहीं की है। इंडिया टुडे की तरफ से कराए गए एक चुनाव पूर्व सर्वे के अनुसार बीजेपी की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले चुनाव में बीजेपी के 19.9 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं इस बार 35 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस के वोटबैंक में जेडीएस बड़ी सेंध लगाने जा रही है, यानी इस बार कांग्रेस को भारी नुकसान होने वाला है।

योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी से नाराजगी
कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडुराव ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। गुंडुराव ने कहा था कि योगी यदि कर्नाटक में आएं तो उनकी चप्पलों से पिटाई की जाएगी। जाहिर है कि योगी नाथ संप्रदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और वोक्कालिंगा समुदाय के बीच उनकी गहरी पैठ है। वोक्कालिंगा समुदाय के लोग कांग्रेस नेता की टिप्पणी से खासे आहत हैं। मतदान के दौरान यह गुस्सा दिखेगा और इससे कांग्रेस पार्टी को बड़ा नुकसान होने वाला है।

प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी के उतरने के बाद बदला माहौल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रचार में आने के बाद पूरे राज्य में बीजेपी के पक्ष में महौल बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में कुल 21 चुनावी रैलियों को संबोधित किया है और उनकी हर चुनावी जनसभा में लाखों की तादात में लोग उमड़े। प्रधानमंत्री की सभाओं में उमड़े जनसैलाब को देखते हुए यह आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीजेपी की बंपर जीत होने वाली है। प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में सिद्धारमैया सरकार और कांग्रेस की नाकामियों को गिन-गिन कर बताया है, इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी की सरकार बनने पर हर क्षेत्र में विकास के लिए काम करने का वादा किया है। पीएम मोदी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं भी रैलियों में पहुंचे थे और हर तरफ मोदी-मोदी के नारे सुनाई दे रहे थे। इस माहौल से स्पस्ठ प्रतीत हो रहा है कि कांग्रेस के दिन अब कर्नाटक में लद गए हैं और वहां भाजपा का डंका बजने वाला है।

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